मौलाना अरशद मदनी ने मोदी सरकार पर लगा दी गंभीर आरोप,मुसलमानों को बनाया जा रहा है निशाना

 मौलाना अरशद मदनी ने मोदी सरकार पर लगा दी गंभीर आरोप,मुसलमानों को बनाया जा रहा है निशाना
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जमीयत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की वर्तमान प्रक्रिया पर गहरी चिंता व्यक्त की है. उन्होंने कहा कि देश में जो कुछ हो रहा है, वह केवल मतदाता सूची के पुनरीक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि नागरिकों के बुनियादी लोकतांत्रिक और संवैधानिक अधिकारों से जुड़ा अत्यंत गंभीर मामला बनता जा रहा है. यदि प्रत्येक नागरिक को बार-बार अपनी नागरिकता और मतदान का अधिकार साबित करने के लिए मजबूर किया जाएगा, तो यह केवल वोट का नहीं बल्कि संविधान, लोकतंत्र और नागरिक स्वतंत्रता का प्रश्न बन जाएगा.मौलाना मदनी ने कहा कि पहले भी समय-समय पर मतदाता सूचियों का पुनरीक्षण होता रहा है, लेकिन वर्तमान एसआईआर अपनी प्रकृति, कार्यप्रणाली और संभावित परिणामों के कारण पूरी तरह अलग दिखाई देता है. लाखों नागरिक सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगा रहे हैं, विभिन्न दस्तावेज जमा कर रहे हैं और मानसिक तनाव का सामना कर रहे हैं, फिर भी उन्हें इस बात का भरोसा नहीं है कि उनका नाम मतदाता सूची में बना रहेगा.

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यदि मतदान जैसा संवैधानिक अधिकार सरकारी विवेक पर निर्भर हो जाए, तो यह लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए अत्यंत खतरनाक संकेत होगा.उन्होंने कहा कि जमीयत उलमा-ए-हिंद ने शुरुआत में ही आशंका व्यक्त की थी कि वर्तमान एसआईआर कहीं एनआरसी का नया रूप साबित न हो. अब विभिन्न राज्यों से प्राप्त हो रही जानकारियां इन आशंकाओं को और अधिक मजबूत कर रही हैं. चुनाव आयोग की संवैधानिक जिम्मेदारी स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव कराना है, न कि नागरिकों की नागरिकता का निर्धारण करना. यदि मतदाता सूची से नाम हटना व्यवहारिक रूप से किसी की नागरिकता पर प्रश्नचिह्न बन जाए, तो यह संवैधानिक सीमाओं का अतिक्रमण होगा.मौलाना मदनी ने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि एसआईआर की आड़ में वास्तविक नागरिकों को उनके मतदान के अधिकार से वंचित करने की कोशिशें की जा रही हैं और कई राज्यों में विशेष रूप से मुसलमानों को निशाना बनाया जा रहा है. उन्होंने पश्चिम बंगाल का उल्लेख करते हुए कहा कि 27 लाख मतदाताओं को संदिग्ध बताना और उनके मताधिकार पर सवाल उठाना लोकतंत्र पर एक गंभीर धब्बा है. उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार प्रभावित लोगों में बड़ी संख्या मुसलमानों की है, जिससे पूरी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर गंभीर प्रश्न खड़े होते हैं.उन्होंने कहा कि एसआईआर के अगले चरण शुरू हो चुके हैं, इसलिए मुसलमानों सहित सभी नागरिकों को असाधारण जागरूकता, कानूनी समझ और सावधानी के साथ आगे बढ़ने की आवश्यकता है. सभी आवश्यक दस्तावेज पहले से तैयार रखें और किसी भी प्रकार की जल्दबाजी या लापरवाही में कोई फॉर्म जमा न करें, क्योंकि छोटी-सी तकनीकी त्रुटि भी आगे चलकर गंभीर कानूनी जटिलताओं का कारण बन सकती है.मौलाना मदनी ने भरोसा दिलाया कि जमीयत उलमा-ए-हिंद पहले की तरह पूरे देश में अपने कार्यकर्ताओं पदाधिकारियों, अधिवक्ताओं और कानूनी विशेषज्ञों के माध्यम से लोगों का मार्गदर्शन, दस्तावेजों की जांच और आवश्यक कानूनी सहायता उपलब्ध कराती रहेगी, ताकि कोई भी नागरिक अज्ञानता या तकनीकी त्रुटि के कारण अपने संवैधानिक और लोकतांत्रिक अधिकारों से वंचित न हो.उन्होंने कहा कि यह धारणा लगातार मजबूत होती जा रही है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया केवल चुनावी सूचियों में सुधार तक सीमित नहीं है, बल्कि कुछ हलकों में इसे मुस्लिम मतों के प्रभाव को कमजोर करने के एक माध्यम के रूप में भी देखा जा रहा है. उन्होंने असम के नए परिसीमन का उल्लेख करते हुए कहा कि वहां निर्वाचन क्षेत्रों के पुनर्गठन के दौरान मुस्लिम मतों के प्रभाव को कमजोर किए जाने की आशंकाएं व्यक्त की गई थीं और अब यह डर है कि अन्य राज्यों में भी इसी प्रकार के कदम उठाए जा सकते हैं.मौलाना मदनी ने कहा कि जब प्रशासन और अन्य संस्थाएं न्याय दिलाने में विफल हो जाएं, तब सुप्रीम कोर्ट जनता की अंतिम आशा होता है. उन्होंने एसआईआर के खिलाफ विपक्षी दलों द्वारा सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाने का स्वागत करते हुए आशा व्यक्त की कि सर्वोच्च न्यायालय संविधान की सर्वोच्चता, नागरिकों के मौलिक अधिकारों और चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता की रक्षा के लिए प्रभावी मार्गदर्शन प्रदान करेगा.मौलाना मदनी ने कहा कि असम में NRC के दौरान जमीयत उलमा-ए-हिंद ने एक ऐतिहासिक कानूनी संघर्ष किया था, जिसके परिणामस्वरूप लाखों हिंदू और मुस्लिम परिवारों को कानूनी सहायता प्रदान की गई और असंख्य भारतीय नागरिकों को विदेशी घोषित किए जाने से बचाया गया. उन्होंने कहा कि जमीयत का यह संघर्ष किसी एक समुदाय के लिए नहीं, बल्कि संविधान, न्याय और प्रत्येक भारतीय नागरिक की गरिमा की रक्षा के लिए था.अंत में मौलाना मदनी ने कहा कि अगर एसआईआर के नाम पर किसी भी नागरिक के मतदान के अधिकार अथवा अन्य संवैधानिक अधिकारों पर आघात करने का प्रयास किया गया, तो जमीयत उलमा-ए-हिंद हर कानूनी, संवैधानिक और लोकतांत्रिक मोर्चे पर पूरी मजबूती के साथ उनके साथ खड़ी रहेगी. उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की मजबूती इसी में है कि प्रत्येक नागरिक का मताधिकार सुरक्षित रहे, संविधान की सर्वोच्चता कायम रहे और किसी भी भारतीय नागरिक को बिना किसी उचित कारण अपनी नागरिकता सिद्ध करने के लिए मजबूर न किया जाए.

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