पुरुषों की बराबरी करने में महिलाओं को लग जाएंगे 2 दशक,बढ़ाना होगा शिक्षा का दायरा
भारत सहित दुनिया भर में महिलाओं की शिक्षा और स्किल डेवलपमेंट में काफी सुधार देखा जा रहा है, इसके बावजूद भी रोजगार में उनकी भागीदारी को लेकर चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं. महिला दिवस के मौके पर अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन ने महिलाओं के रोजगार में भागीदारी को लेकर रिपोर्ट जारी की है।रिपोर्ट के मुताबिक, 2024 में केवल 46.4 प्रतिशत कामकाजी उम्र की महिलाएं ही रोजगार पा सकेंगी, जबकि पुरुषों के लिए यह 69.5 प्रतिशत है. 1991 से महिलाओं और पुरुषों के बीच रोजगार के अंतर के आंकड़ों पर गौर करें तो 27.1 से 23.1 प्रतिशत अंकों की कमी आई है. लेकिन इसके बावजूद भी महिलाओं की रोजगार करने की संख्या पुरुषों की तुलना में कम है।

तीस साल पहले बीजिंग घोषणापत्र और प्लेटफॉर्म फॉर एक्शन की ओर से महिलाओं और पुरुषों के बीच समानता का एक एजेंडा तैयार किया गया था. इतने समय बीतने के बाद भी अभी तक अर्थव्यवस्था में महिलाओं की भागीदारी को लेकर कुछ खास बदलाव सामने नहीं आए हैं।रिपोर्ट के मुताबिक, रोजगार में पुरुषों के बराबर समानता पाने में महिलाओं को 200 साल लग जाएंगे. खासकर हम ऐसे दौर में जी रहे हैं जब महिलाएं हर क्षेत्र में अपनी भागीदारी सुनिश्चत कर रही हैं. हाल ही में भारत के लखनऊ की रहने वाली तनुष्का फाइटर जेट जगुआर उड़ाने वाली पहली महिला पायलट बन गई हैं।पहले की तुलना में महिलाएं आज के समय में पढ़ाई और नौकरी दोनों में अपनी भागीदारी दिखा रही हैं, इसके बावजूद भी लेबरे मार्केट(श्रम बाजार) में बहुत ज्यादा फायदा देखने को नहीं मिला है. पिछले 2 दशकों में इसमें मामूली सा बदलाव देखा गया है. वैश्विक स्तर के आकंड़ों पर गौर करें तो मैनेजमेंट लेवल पर महिलाओं की हिस्सेदारी केवल 30 प्रतिशत ही है, जो कि बहुत कम है।
