विपक्ष में टूट की बढ़ी संभावना,बिहार में फ्लोर टेस्ट के दौरान कई विपक्षी विधायक देंगे सीएम सम्राट का साथ!
पहली बार बिहार में बीजेपी का मुख्यमंत्री बना है. एक सप्ताह पुरानी ये नई सरकार 24 अप्रैल को विधानसभा में बहुमत हासिल करेगी. एनडीए के संख्या बल को देखते हुए लगता नहीं कि कहीं कोई दिक्कत आने वाली है. नजर इस बात पर भी होगी कि क्या विश्वास मत के बहाने विपक्षी खेमे में सेंध लगेगी?बिहार में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) को पूर्ण बहुमत हासिल है. 2025 के विधानसभा चुनाव में एनडीए को 202 सीटों पर जीत मिली थी. हालांकि नितिन नबीन के इस्तीफे के बाद एक सीट खाली है. 201 विधायकों के समर्थन से सम्राट सरकार बहुत आसानी से बहुमत साबित कर देगी. 2024 में विश्वास मत प्रस्ताव के दौरान जिस तरह एनडीए ने महागठबंधन में तोड़फोड़ की थी, इस बार भी वैसी ही विपक्ष में टूट की आशंका है.243 सदस्यीय बिहार विधानसभा में बहुमत का आंकड़ा 122 है. फिलहाल एनडीए के पास 201 विधायकों का समर्थन है. इनमें बीजेपी के 88, जेडीयू के 85, एलजेपीआर के 19, हम पार्टी के 5 और आरएलएम के 4 विधायक हैं. इस तरह सम्राट सरकार आसानी से विश्वात मत हासिल कर लेगी.मौजूदा विधानसभा में विपक्ष की स्थिति बेहद कमजोर है. 2025 के चुनाव में महागठबंधन को सिर्फ 35 सीटों पर जीत मिली. जिनमें आरजेडी के 25, कांग्रेस के 6, वाम दलों के 3 और आईआईपी के एक विधायक हैं. वहीं एआईएमआईएम के 5 और बीएसपी के एक विधायक हैं. यानी समूचा विपक्ष 41 पर सिमट गया. ऐसी स्थिति में विपक्ष किसी भी तरह से एनडीए सरकार को चुनौती नहीं दे सकता.सम्राट चौधरी राजनीति के माहिर खिलाड़ी माने जाते हैं. राज्यसभा चुनाव के दौरान उन्होंने ने ‘खेल’ कर दिया था. महागठबंधन के चार विधायकों ने राज्यसभा चुनाव के दौरान मतदान नहीं किया था, जिससे संयुक्त विपक्ष के प्रत्याशी चुनाव हार गए थे. एक बार फिर सबकी निगाहें मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पर टिकी हैं।पिछले दिनों मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने भी पत्रकारों से ऑफ कैमरा बातचीत में विपक्षी दलों में टूट के संकेत दिए थे.

माना जा रहा है कि कांग्रेस और आरजेडी के कई विधायक पाला बदलना चाहते हैं और बीजेपी नेताओं के संपर्क में हैं. वैसे भी राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस के तीन और आरजेडी के एक विधायक ने पार्टी के आदेश के बावजूद मतदान प्रक्रिया में हिस्सा नहीं लिया. बाद में इन ‘बागी’ विधायकों ने नीतीश कुमार और अन्य एनडीए नेताओं से मुलाकात की थी.भारतीय जनता पार्टी की ओर से चौंका देने वाला दावा किया गया है. पार्टी की ओर से कहा गया है कि महागठबंधन के आधे से अधिक विधायक हमारे संपर्क में हैं. विश्वास मत प्रस्ताव के बाद बहुत कुछ स्पष्ट रूप से दिखाई भी देने वाला है।हालांकि राष्ट्रीय जनता दल का दावा है कि विपक्ष एकजुट है. प्रवक्ता एजाज अहमद ने कहा कि अविश्वास का खेल तो एनडीए में चल रहा है. जहां एक नेता (नीतीश कुमार) पर अविश्वास किया गया और दूसरे नेता (सम्राट चौधरी) पर विश्वास किया गया है. जहां तक विपक्षी दलों में टूट का सवाल है तो एनडीए को असल में लोकतांत्रिक प्रक्रिया में यकीन नहीं है, इसलिए तोड़फोड़ की राजनीति करते हैं लेकिन इस बार साजिश कामयाब नहीं होगी।सम्राट सरकार में फिलहाल सीएम सम्राट चौधरी के अलावे सिर्फ दो मंत्री हैं. जेडीयू कोटे से विजय कुमार चौधरी और बिजेंद्र प्रसाद यादव डिप्टी सीएम हैं. मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर कुछ भी स्पष्ट तौर पर नहीं कहा गया है लेकिन माना जा रहा है कि 4 मई के बाद ही मंत्रिंमंडल का विस्तार होगा, क्योंकि बीजेपी के शीर्ष नेता अभी बंगाल चुनाव में व्यस्त हैं. जिस वजह से मंत्रियों की सूची फाइनल नहीं हो रही है. हालांकि जेडीयू और अन्य सहयोगी दलों की तरफ से संभावित मंत्रियों के नाम तय हैं।
