ममता बनर्जी को बीजेपी से अधिक डैमेज करेंगे हुमायूं कबीर,मुस्लिमों के Vote में होगा बिखराव
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की रणभेरी बज चुकी है. तृणमूल कांग्रेस की सुप्रीमो और राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भवानीपुर से विधानसभा चुनाव लड़ रही हैं. वहीं भाजपा ने विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष सुवेंद अधिकारी को उनके खिलाफ उतारा है तो ममता बनर्जी से नाराज तृणमूल कांग्रेस से निकाले गये हुमायूं कबीर की पार्टी आम जनता उन्नयन पार्टी (AJUP) ने 15 कैंडिडेट्स की पहली लिस्ट जारी की. उन्होंने ममता बनर्जी के खिलाफ एक गैर-बंगाली मुस्लिम उम्मीदवार पूनम बेगम को मैदान में उतारने का ऐलान किया है.भवानीपुर से सुवेंदु अधिकारी को उतारने और हुमायूं कबीर के एक गैर-बंगाली मुस्लिम उम्मीदवार को उतारने को ममता बनर्जी को सियासी चक्रव्यूह में फंसाने की कोशिश मानी जा रही है. यह देखना दिलचस्प होगा कि ममता बनर्जी इस सियासी चक्रव्यूह से कैसे बाहर निकलती हैं? टीएमसी की रणनीति क्या होगी?2021 के विधानसभा चुनाव में नंदीग्राम में ममता बनर्जी बीजेपी के उम्मीदवार सुवेंदु अधिकारी से 1956 मतों से पराजित हुई थीं. उसके बाद ममता बनर्जी ने भवानीपुर विधानसभा उपचुनाव में जीत हासिल की थी. इस बार बीजेपी ने फिर से भवानीपुर में उनके खिलाफ सुवेंदु अधिकारीख को खड़ा कर कड़ी चुनौती पेश की है. सुवेंदु अधिकारी को ममता बनर्जी के खिलाफ उतारकर बीजेपी ने सीएम को राजनीतिक चक्रव्यूह में फंसाने की कोशिश की है.बीजेपी की कोशिश है कि ममता बनर्जी को भवानीपुर तक ही सीमित रखें. उनके पूरे राज्य में प्रचार को सीमित करें और उन्हें रक्षात्मक लड़ाई के लिए मजबूर करें. इस कदम से ममता बनर्जी के भवानीपुर में ज्यादा समय बिताने और पश्चिम बंगाल के 23 जिलों में कैंपेन करने के प्लान पर असर पड़ सकता है, खासकर जहां मुकाबला कड़ा है.ममता बनर्जी चुनाव में तृणमूल की टॉप स्टार कैंपेनर होंगी और हर उम्मीदवार अपने चुनाव क्षेत्रों में उनकी मौजूदगी की उम्मीद करेगा, ताकि उनके चांस बढ़ सकें. ममता के खिलाफ सुवेंदु अधिकारी को खड़ाकर बीजेपी ममता बनर्जी को बांधने की कोशिश की है.बीजेपी ने सुवेंदु अधिकारी को भवानीपुर और नंदीग्राम दोनों जगहों से मैदान में उतारा है. पार्टी का मकसद तृणमूल लीडरशिप पर लगातार प्रेशर बनाना है.

यह सिर्फ चुनावी कदम होने से ज्यादा साइकोलॉजिकल फाइट भी है. भवानीपुर को प्रतिष्ठा की लड़ाई बनाकर बीजेपी पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री को वहां फिजिकली भी रोकने की उम्मीद कर रही है.बीजेपी का मानना है कि अगर सुवेंदु अधिकारी हार जाते हैं, तो यह बीजेपी विधायक के लिए एक झटका होगा, लेकिन अगर ममता बनर्जी हार जाती हैं, तो इसका मतलब ममता बनर्जी के लिए एक के बाद एक झटका होगा. पहले एक ग्रामीण सीट पर, और अब कोलकाता के बीचों-बीच मिली पराजय उन्हें नैतिक रूप से कमजोर करेगी. हालांकि ममता बनर्जी ने अपने प्रेस कॉन्फ्रेंस में साफ कर दिया कि वह केवल भवानीपुर से ही उम्मीदवार नहीं हैं. राज्य की सभी 294 सीटों पर वह ही उम्मीदवार हैं.भवानीपुर कोई आम कोलकाता सीट नहीं है. इसे अक्सर “मिनी भारत” कहा जाता है. ऐसा इसलिए है, क्योंकि लगभग 40% वोटर गैर-बंगाली समुदाय से हैं, जिनमें ज्यातर गुजराती, मारवाड़ी, पंजाबी और ओडिया हैं. भवानीपुर सीट पर लगभग 20% मुस्लिम हैं. हालांकि यह वोटबैंक हमेशा से ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस के पक्ष में रहा है.लेकिन बीजेपी को गैर-बंगाली बिजनेस कम्युनिटी में एक मौका दिख रहा है, जिन्हें अक्सर बीजेपी तरफ झुका हुआ माना जाता है. तृणमूल की “बाहरी” वाली बातों ने भी वोटरों को इन कम्युनिटी से दूर कर दिया है, और उन्हें BJP की तरफ धकेल दिया है. ममता बनर्जी न्यू टाउन इलाके में जैन मंदिर के लिए सब्सिडी वाली दरों पर जमीन देकर जैन लोगों को लुभाने की कोशिश कर रही हैं. अपनी आम बंगाली भाषा से हटकर, उन्होंने गैर-बंगाली कम्युनिटी से बात करने के लिए हिंदी का इस्तेमाल किया.वोटर लिस्ट का स्पेशल इंटेंसिव रिव्यू (SIR) भवानीपुर की लड़ाई को दिलचस्प बना दिया है. SIR के दौरान भवानीपुर से 47,000 से ज्यादा नाम हटा दिए गए. इसके अलावा 14,000 नामों को पेंडिंग में रखा गया है. जहां बीजेपी का दावा है कि ये डुप्लीकेट या इनवैलिड एंट्री थीं, वहीं तृणमूल कांग्रेस ने बड़े पैमाने पर असली वोटर्स को हटाने का आरोप लगाया है. ममता बनर्जी ने इसे BJP और इलेक्शन कमीशन की मिलीभगत वाली साजिश बताया है.बीजेपी का भवानीपुर गेमप्लान कितना कामयाब होगा, यह अभी तय नहीं है. 2021 के उपचुनाव में, ममता बनर्जी ने भवानीपुर में 58,000 से ज्यादा वोटों से जीत हासिल की थी. यह सीट 2011 से टीएमसी का गढ़ रही है. बीजेपी अब माहौल बदलने की कोशिश कर रही है. वह पश्चिम बंगाल चुनाव शुरू होने से पहले ही भवानीपुर को मुख्य चुनावी मैदान बना रही है.दूसरी ओर से तृणमूल कांग्रेस से निकाले गए विधायक हुमायूं कबीर ने अपनी नई बनी आम जनता उन्नयन पार्टी (AJUP) के 15 कैंडिडेट्स की पहली लिस्ट जारी की. उन्होंने ऐलान किया है कि AJUP पश्चिम बंगाल में होने वाले असेंबली इलेक्शन में 294 में से 182 सीटों पर चुनाव लड़ेगी. मुर्शिदाबाद में बाबरी मस्जिद का शिलान्यास कर सुर्खियां बंटोरने वाले हिमायूं कबीर ने ममता बनर्जी को चुनौती देने का ऐलान किया है.हुमायूं कबीर मुर्शिदाबाद के दो सीटों – रेजिनगर और नावदा – से चुनाव लड़ेंगे, हालांकि वह उसी जिले के भरतपुर से मौजूदा विधायक थे. हुमायूं कबीर ने भवानीपुर से एक नॉन-बंगाली मुस्लिम कैंडिडेट पूनम बेगम को भी मैदान में उतारने का ऐलान पर ममता बनर्जी के घेरने और तृणमूल कांग्रेस के वोटबैंक में घुसपैठ करने की कोशिश की है.राजनीतिक जानकारों को लगा कि कबीर के नॉन-बंगाली मुस्लिम कैंडिडेट को मैदान में उतारने के फ़ैसले का इस चुनाव क्षेत्र में तृणमूल के मुस्लिम वोट बैंक पर असर पड़ सकता है. हालांकि, उन्होंने कहा कि नई पार्टी का चुनावी असर काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगा कि वह माइनॉरिटी वोटों को बांटने में कामयाब होती है या नहीं, जो हाल के चुनावों में पारंपरिक रूप से टीएमसी के पीछे एकजुट हुए हैं. 2011 की जनगणना के अनुसार, भवानीपुर में मुस्लिम आबादी का हिस्सा 20 प्रतिशत है.भवानीपुर में मुकाबला सिर्फ असेंबली की एक सीट के लिए नहीं, बल्कि एक ऐसे राज्य में पॉलिटिकल दबदबे के लिए भी इज्जत की लड़ाई बन गया है, जहां ममता और सुवेंदु के बीच आमना-सामना टीएमसी और बीजेपी के बड़े टकराव का प्रतीक बन गया है. एक ओर बीजेपी अपनी रणनीति बनाने में जुटी है, तो टीएमसी ने भी पूरी ताकत लगा दी है.भवानीपुर को लेकर गुरुवार को टीएमसी के नेताओं ने बड़ी बैठक की. इस बैठक में भवानीपुर में चुनावी प्रचार को लेकर रणनीति बनाई गई. टीएमसी ने भवानीपुर में डोर-टू-डोर कैंपेन पर जोर दिया है. पार्टी के वरिष्ठ नेता सुब्रत बक्शी और कोलकाता के मेयर फिरहाद हकीम को कई वार्ड की जिम्मेदारी दी गई है और कहा गया कि ममता बनर्जी खुद भवानीपुर में मीटिंग करेंगी.
