शराबबंदी से कितना बदला बिहार?नीतीश सरकार के फैसले से नुकसान हुआ या फायदा?

 शराबबंदी से कितना बदला बिहार?नीतीश सरकार के फैसले से नुकसान हुआ या फायदा?
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पिछले कुछ समय से बिहार में शराबबंदी को जारी रखने या हटाने को लेकर बहस छिड़ी हुई है. हालांकि सरकार और खासकर जनता दल यूनाइटेड का रुख साफ है कि शराबबंदी नहीं हटेगी. हालांकि अब जब सत्ता का हस्तांतरण होना तय है, वैसे में नीतीश कुमार की जगह बीजेपा का कोई नेता राज्य का मुख्यमंत्री बनेगा. ऐसी स्थिति में सूबे के अगले मुखिया तय करेंगे कि शराबबंदी पर क्या फैसला लेंगे?2015 में जब नीतीश कुमार महागठबंधन के साथ मिलकर विधानसभा चुनाव लड़ रहे थे, तभी उन्होंने महिलाओं की मांग पर वादा किया था कि सरकार बनने पर पूर्ण शराबबंदी लागू करेंगे. नवंबर में सत्ता में आने के बाद आखिरकार अप्रैल में शराबबंदी कानून को लागू कर दिया गया. हालांकि साल दर साल शराबबंदी की सफलता और नाकामी को लेकर चर्चा होती रही।बिहार में 21 दिसंबर 2015 को नई उत्पाद नीति लागू की गई थी. इसके बाद 1 मार्च 2016 से शराबबंदी की घोषणा हुई. वहीं 1 अप्रैल 2016 से शराबबंदी कानून लागू किया गया, जबकि 5 अप्रैल 2016 से पूर्ण शराबबंदी हो गई. 10 सालों से राज्य में शराबबंदी है लेकिन इसके बावजूद अवैध रूप से शराब का धंधा जारी है. जिस वजह से न केवल राजस्व का नुकसान हो रहा है, बल्कि जहरीली शराब से मौत के मामले भी सामने आते रहते हैं. हालांकि पुलिस-प्रशासन की तरफ से धुआंधार कार्रवाई भी होती रही है.बिहार में शराब की तस्करी या फिर शराब पीने वालों के खिलाफ कार्रवाई भी की गई. मद्य निषेध शराबबंदी से लेकर अब तक राज्य में कुल 6 लाख 40 हजार 379 लोगों को सजा सुनाई गई, इसमें 6 लाख 38 हजार मामले सिर्फ शराब पीने के हैं. कानून के तहत कोर्ट ने 9 लोगों को मृत्युदंड की भी सजा सुनाई. इसके अलावे 18 लोगों को आजीवन कारावास और कई दोषियों को 10 वर्ष से अधिक कई की सजा सुनाई गई।रिपोर्ट के मुताबिक 2016 से 2023 तक राज्य में शराब के खिलाफ 6.61 लाख से अधिक मामले दर्ज किए गए, जिसमें 9 लाख से अधिक लोगों की गिरफ्तारी हुई. 75 हजार से अधिक वाहनों की नीलामी की गई. इस कार्रवाई में सरकार को 4 अरब 28 करोड़ 50 लाख रुपये राजस्व प्राप्त हुए.पिछले 10 सालों में शराबबंदी से जहां फायदा हुआ, वहीं इसके नुकसान भी देखने को मिले. शराबबंदी से फायदे की बात करें तो राज्य में घरेलू हिंसा में काफी गिरावट हुई. एनसीआरबी की रिपोर्ट कहती है कि 2015 में जहां 15000 के आसपास घरेलू हिंसा के मामले सामने आए थे. शराबबंदी के बाद इसमें गिरावट देखने को मिली. 2020 में घरेलू हिंसा के मामले 9000 के आसपास रहे.

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2024 में यह घटकर 7500 हो गए।वहीं, दूसरी ओर शराबबंदी के कारण नुकसान भी हुए. शराब नहीं मिलने के कारण लोग नकली शराब खरीदकर पीने लगे, जिससे कई लोगों की मौत हो चुकी है. एनसीआरबी की रिपोर्ट देखें तो 2016 से अब तक 400 से अधिक लोगों की मौत हुई है. जानकार कहते हैं कि यह सरकारी आंकड़ा ह, लेकिन असल में इससे ज्यादा लोगों की मौत हुई है।एनसीआरबी की रिपोर्ट के अनुसार साल 2016 में 156, साल 2018 में 09, साल 2021 में 90, साल 2022 में 100, साल 2023 में 35, और साल 2024 में 25 के आसपास लोगों की मौत हुई है. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 190 लोगों की मौत इस दस साल में जहरीली शराब से हुई है.इन दस सालों में सबसे चर्चित घटना भागलपुर शराब कांड है. 2022 में 70 से अधिक लोगों की मौत जहरीली शराब पीने से हुई थी. यह घटना होली के समय की है, जब जिले में जहरीली शराब की घटना सामने आयी थी. कई लोगों की आंखों की रोशनी चली गयी थी. साल 2024 में सिवान और छपरा में जहीरी शराब कांड हुआ था, जिसमें दोनों जिलो को मिलाकर कुल 60 से अधिक लोगों की मौत हुई थी. इसके अलावे गोपालगंज समेत कई अन्य जिलों से मामले सामने आए थे. इसको लेकर जमकर सिसायत भी हुई थी।शराबबंदी की दूसरी तस्वीर ये भी है कि अवैध रूप से इसमें कमाई बढ़ी है और एक सिंडिकेट खड़ा हुआ है. शराबबंदी से सरकार को राजस्व में 15% की हानि हो रही है लेकिन अवैध रूप से करोड़ की कमाई की जा रही है. वे कहते हैं कि कार्रवाई का आलम ये है कि जब्त शराब को जब थाने में रखी जाती है तो कुछ दिनों के बाद पता चला कि चूहा शराब पी गया. शराब की होम डिलीवरी हो रही है. न्यायालय पर भी बोझ बढ़ गया है. जो लोग पकड़े जा रहे हैं, उन मामलों का तेजी से निपटारा नहीं हो रहा है. जिस वजह से जेल में विचाराधीन कैदियों की संख्या बढ़ गई है. पटना हाईकोर्ट कई बार फटकार लगा चुका है.वहीं, शराबबंदी को धरातल पर लागू कराने में अहम भूमिक निभाने वाले मद्य निषेध विभाग के असिस्टेंट कमिश्नर प्रेम प्रकाश कहते हैं कि उनकी नजर में शराबबंदी सफल रही है. वे कहते हैं कि इससे घरेलू हिंसा में काफी कमी आई है. महिला खुद को सुरक्षित महसूस कर रही हैं. देर शाम और रात में भी वह बेखौफ होकर घूमती हैं. जहां तक शराब की अवैध तस्करी का सवाल है तो उनके खिलाफ लगातार कार्रवाई हो रही है।जब शराबबंदी शुरू हुई थी तो पूरे विभाग में अधिकारियों की संख्या 200 भी नहीं थी. बाद में वैकेंसी निकली थी, उसके बाद अधिकारी बढ़े थे लेकिन इस दौरान पुलिस का बहुत सहयोग मिला देखिए. चुनौती अभी भी है. शराबबंदी के दौरान प्रतिदिन 60 से 70 लोग पकड़े जा रहे हैं. शराब भी पकड़ी जा रही हैं. यह नकली शराब जो होती है, वह दो-तीन तरह की होती है. एक तो बहुत ही खराब मटेरियल वाली शराब बड़े ब्रांड के बोतल में भरकर देना भी, नकली होता है. इसके अलावे शराब की जो अवैध फैक्ट्रियां हैं, उनको पता ही नहीं है कि किस पदार्थ को शराब में कितना डालना है. इसी वजह से शराब जहरीली हो जाती है।

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