नवरात्रि के पहले दिन आज होगी मां शैलपुत्री की पूजा,जानिए मुहूर्त,कथा,आरती और मंत्र

 नवरात्रि के पहले दिन आज होगी मां शैलपुत्री की पूजा,जानिए मुहूर्त,कथा,आरती और मंत्र
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हिंदू धर्म में शारदीय नवरात्रि बहुत महत्वपूर्ण माने जाते हैं। हिंदू पंचांग के अनुसार, हर साल आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से शारदीय नवरात्रि प्रारंभ होते हैं। इस साल शारदीय नवरात्रि आज 11 अक्तूबर, रविवार से शुरू हुए हैं। रविवार से नवरात्रि प्रारंभ होने के कारण मां दुर्गा की सवारी गज यानी हाथी है। नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा-अर्चना की जाती है। नवरात्रि के पहले दिन मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप मां शैलपुत्री की विधि-विधान से पूजा का विधान है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां शैलपुत्री की पूजा करने से जीवन में सुख-समृद्धि आती है और मानसिक शांति मिलती है। नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा करने के साथ ही कलश स्थापना या घटस्थापना भी जाती है। घटस्थापना के लिए शुभ मुहूर्त का विचार किया जाता है। हिंदू धर्म में राहुकाल में घटस्थापना की मनाही होती है। आइए जानते हैं मां शैलपुत्री की पूजा विधि, प्रिय भोग, मंत्र और घटस्थापना का समय।

पौराणिक कथाओं के अनुसार, मां शैलपुत्री को पर्वतराज हिमालय की पुत्री माना जाता है। इनके नाम का अर्थ है पर्वत की पुत्री। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, मां शैलपुत्री अपने पूर्व जन्म में राजा दक्ष की पुत्री सती थीं। भगवान शिव से विवाह के बाद उन्होंने अपने पिता के यज्ञ में अपमानित होने पर देह त्याग दिया था। इसके बाद उन्होंने हिमालय के घर पुत्री के रूप में जन्म लिया और शैलपुत्री कहलाईं।मां शैलपुत्री के स्वरूप की बात करें तो उनके दाहिने हाथ में त्रिशूल और बाएं हाथ में कमल का पुष्प सुशोभित रहता है। वे वृषभ यानी बैल पर सवार होती हैं। मां का यह स्वरूप शक्ति, धैर्य, दृढ़ संकल्प और प्रकृति से जुड़ाव का प्रतीक माना जाता है।

मां शैलपुत्री की पूजा विधि:


नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा विधि-विधान से करने का विशेष महत्व है। पूजा के लिए सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें और पूजा स्थल को साफ करें। अब एक चौकी पर मां दुर्गा और मां शैलपुत्री की तस्वीर या प्रतिमा स्थापित करें। घी का दीपक जलाकर पूजा का संकल्प लें। मां दुर्गा को अक्षत, लाल या सफेद पुष्प, चंदन, फल, मिठाई, धूप और दीप आदि अर्पित करें। मां शैलपुत्री को भोग के रूप में गाय के दूध से बनी मिठाई या फल अर्पित कर सकते हैं। मां शैलपुत्री के मंत्र का श्रद्धा पूर्वक जाप करें और दुर्गा चालीसा या दुर्गा सप्तशती का पाठ करें। अंत में मां की आरती करें और परिवार की सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य तथा खुशहाली की प्रार्थना करें।

मां शैलपुत्री पूजन के शुभ मुहूर्त:

ब्रह्म मुहूर्त- सुबह 04:50 बजे से सुबह 05:38 बजे तक।
अभिजीत मुहूर्त- सुबह 11:50 बजे से सुबह 12:36 बजे तक।
अमृत काल- दोपहर 03:53 बजे से शाम 05:32 बजे तक।

मां शैलपुत्री को कौन-सा भोग लगाएं?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां शैलपुत्री को गाय का शुद्ध घी अर्पित करना शुभ माना जाता है। इसके अलावा आप गाय के दूध से बनी मिठाई या फल भी भक्ति भाव से अर्पित कर सकते हैं। पूजा के बाद भोग को प्रसाद के रूप में परिवार के सदस्यों में बांटें।

मां शैलपुत्री का पूजा मंत्र:

नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा करते समय इस मंत्र का जाप किया जा सकता है। मान्यता है कि इस मंत्र का जाप करने से मां दुर्गा प्रसन्न होती हैं और अपने भक्तों के मन की मुरादें पूरी करती हैं।

मंत्र:

ॐ देवी शैलपुत्र्यै नमः॥

मां शैलपुत्री का ध्यान मंत्र:
वन्दे वाञ्छितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखराम्।

वृषारूढां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम्॥

11 अक्टूबर को घटस्थापना का शुभ मुहूर्त 2026:

नवरात्रि के पहले दिन घटस्थापना या कलश स्थापना की जाती है। आज कलश स्थापना के लिए सुबह का शुभ मुहूर्त सुबह 6:19 बजे से 10:12 बजे तक रहेगा। इसके बाद अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:44 बजे से दोपहर 12:31 बजे तक रहेगा।

शैलपुत्री माता की आरती:

शैलपुत्री माँ बैल असवार। करें देवता जय जय कार॥
शिव-शंकर की प्रिय भवानी। तेरी महिमा किसी ने न जानी॥
पार्वती तू उमा कहलावें। जो तुझे सुमिरे सो सुख पावें॥
रिद्धि सिद्धि प्रदान करे तू। दया करें धनवान करें तू॥
सोमवार को शिव संग प्यारी। आरती जिसने तेरी उतारी॥
उसकी सगरी आस पुजा दो। सगरे दुःख तकलीफ मिटा दो॥
घी का सुन्दर दीप जला के। गोला गरी का भोग लगा के॥
श्रद्धा भाव से मन्त्र जपायें। प्रेम सहित फिर शीश झुकायें॥
जय गिरराज किशोरी अम्बे। शिव मुख चन्द्र चकोरी अम्बे॥
मनोकामना पूर्ण कर दो। चमन सदा सुख सम्पत्ति भर दो॥

देवी शैलपुत्री स्तोत्रम्:

प्रथम दुर्गा त्वंहि भवसागरः तारणीम्।
धन ऐश्वर्य दायिनी शैलपुत्री प्रणमाम्यहम्॥
त्रिलोजननी त्वंहि परमानन्द प्रदीयमान्।
सौभाग्यरोग्य दायिनी शैलपुत्री प्रणमाम्यहम्॥
चराचरेश्वरी त्वंहि महामोह विनाशिनीं।
मुक्ति भुक्ति दायिनीं शैलपुत्री प्रणमाम्यहम्॥

मां शैलपुत्री स्तुति:

या देवी सर्वभूतेषु माँ शैलपुत्री रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

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