ईरान ने अमेरिका को बताया सरेंडर करने वाला देश?इजराइल ने भी ट्रंप का किया विरोध
लंबे इंतजार के बाद अमेरिका और ईरान के बीच साथ शांति समझौता हो गया है. इस समझौते का मकसद दोनों देशों के बीच चल रहे युद्ध को खत्म करना है. हालांकि, ये शांति समझौता इजराइल के कुछ नेताओं को रास नहीं आ रहा है. ऐसे में इस ईरान डील की आलोचना करने वाले नेताओं को अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने करारा जवाब दिया है. उन्होंने कहा कि हर राष्ट्रीय सुरक्षा समस्या का समाधान सिर्फ ‘मार-काट’ से नहीं निकल सकता।एक इंटरव्यू में वेंस ने इजराइल के राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन-गवीर और वित्त मंत्री बेजलेल स्मोट्रिच की ईरान-अमेरिका डील पर की गई टिप्पणी की कड़ी आलोचना की. वेंस ने कहा, “आपका असल प्रस्ताव क्या है? आप 90 लाख लोगों का देश हैं. आप अपनी हर राष्ट्रीय सुरक्षा समस्या का समाधान सिर्फ लोगों को मारकर नहीं निकाल सकते.” वेंस ने कहा, “मुझे इजराइल में मची ये खलबली थोड़ी अजीब लगती है क्योंकि मुझे लगता है कि इस अविश्वास की वजह से है. वेंस ने कहा, मेरा मानना है कि अमेरिका ने दुनिया के उस इलाके में भरोसा जीता है.”दरअसल, इस हफ्ते ईरान के साथ युद्ध खत्म करने के लिए हुए समझौते का वेंस बचाव कर रहे थे. हालांकि इजराइल के आलोचकों ने इस पीस डील की कड़ी आलोचना की है. ऐसा इसलिए क्योंकि ये समझौता ईरान के मिसाइल प्रोग्राम को रोकने में नाकाम रहा है और इसके परमाणु ठिकानों को खत्म करने का कोई साफ रास्ता भी नहीं बताता है. इसके साथ ही लेबनान में हिज्बुल्लाह उग्रवादियों के साथ युद्ध में इजराइल को सीमित करता है.डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को फ्रांस में G7 शिखर सम्मेलन के समापन भाषण के दौरान इजराइल को लेबनान में हिजबुल्लाह के खिलाफ अपनी सैन्य कार्रवाई में कम आक्रामक और ज्यादा संयमित रुख अपनाने की सलाह दी. वहीं समझौते के बाद दी गई पहली टिप्पणी में नेतन्याहू ने एक सार्वजनिक कार्यक्रम में कहा कि इजराइल अमेरिका के साथ अपने संबंधों की सराहना करता है, लेकिन इजराइल की उत्तरी सीमा के पास रहने वाले नागरिकों की सुरक्षा बनाए रखने के लिए दक्षिणी लेबनान पर कब्जा बनाए रखेगा.नेतन्याहू ने गुरुवार को अमेरिका और ईरान के बीच डील कहा कि हमारे सामने और भी चुनौतियां हैं. शांति बनाए रखने, अपनी सुरक्षा से जुड़े हितों पर मज़बूत रुख अपनाने और साथ ही, अपने अमेरिकी दोस्तों के साथ अहम संबंध बनाए रखने की ज़रूरत है.

प्रधानमंत्री ने कहा कि इजराइल अपने मुख्य लक्ष्य पर कायम रहेगा. हम ईरान के पास परमाणु हथियार नहीं होने देंगे.उन्होंने यह भी वादा किया कि इज़राइल उत्तर में, लेबनान के साथ अपनी सीमा के पास सुरक्षा बहाल करेगा. उन्होंने कहा, इसके लिए दक्षिणी लेबनान में सुरक्षा ज़ोन बनाए रखना ज़रूरी है और जब तक इज़राइल की सुरक्षा की ज़रूरतें इसकी मांग करती हैं, तब तक हमें वहां से पीछे नहीं हटना चाहिए.अब इस पूरे घटनाक्रम पर ईरान के सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई का बयान आया है.मोजतबा ने कहा कि अमेरिका के साथ हुए MoU को लेकर उनके मन में कुछ आपत्तियां और संदेह थे लेकिन इसके बावजूद उन्होंने इसकी मंजूरी दी. उन्होंने बताया कि राष्ट्रपति पेजेश्कियान और वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारियों ने उन्हें आश्वासन दिया था कि इस समझौते में ईरान के हितों की पूरी तरह रक्षा की जाएगी.अमेरिका-ईरान ड्राफ्ट समझौते पर वर्चुअल हस्ताक्षर होने के बाद पहली सार्वजनिक प्रतिक्रिया में खामेनेई ने कहा कि उन्होंने अधिकारियों की इस प्रतिबद्धता के बाद समझौते को मंजूरी दी कि वे ईरानी के अधिकारों और सहयोगियों के हितों की रक्षा करेंगे.मोजतबा ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने उत्सुकता में आकर इस एमओयू को अस्तित्व में लाने के लिए हर तरह के दबाव और प्रभाव का इस्तेमाल किया.मोजतबा ने कहा कि अमेरिका के साथ एमओयू को लेकर मेरी राय अलग थी लेकिन ईरान के राष्ट्रपति और सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के अन्य सदस्यों की प्रतिबद्धता को देखते हुए मैंने इसकी अनुमति दी.वहीं, खामेनेई ने अमेरिका के साथ बातचीत के आलोचकों को आश्वस्त करने का भी प्रयास किया. उन्होंने स्पष्ट किया कि भविष्य में होने वाली आमने-सामने की वार्ताओं का अर्थ अमेरिकी दृष्टिकोण को स्वीकार करना नहीं है. उन्होंने कहा कि आगे होने वाली प्रत्यक्ष वार्ताएं इस बात का संकेत नहीं हैं कि हम दुश्मन के नजरिए को स्वीकार कर रहे हैं।मोजतबा ने अमेरिका को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर अमेरिकी पक्ष अत्यधिक मांगें रखने की कोशिश करेगा, तो हम उसे स्वीकार नहीं करेंगे. खामेनेई की ये टिप्पणियां ईरान की आंतरिक निर्णय प्रक्रिया की एक दुर्लभ झलक पेश करती हैं, ऐसे समय में जब ईरान, अमेरिका के साथ 60 दिनों की वार्ता अवधि में प्रवेश कर रहा है।
