भारत बंद का बिहार में नहीं दिखा असर,इंडिया-अमेरिका ट्रेड डील के विरोध में आज ट्रेड यूनियनों का दिखा दम

 भारत बंद का बिहार में नहीं दिखा असर,इंडिया-अमेरिका ट्रेड डील के विरोध में आज ट्रेड यूनियनों का दिखा दम
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देश की 10 प्रमुख केंद्रीय ट्रेड यूनियनों ने भारत-अमेरिका ट्रेड डील , केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियों और नए श्रम कानूनों के विरोध में आज भारत बंद का आह्वान किया है. बंद में कई बैंक यूनियन भी शामिल हैं. ऑल इंडिया बैंक इंप्लाइज एसोसिएशन (AIBEA), ऑल इंडिया बैंक ऑफिसर्स एसोसिएशन (AIBOA) और बैंक इंप्लाइज फेडरेशन ऑफ इंडिया (BEFI) ने अपने सदस्यों से इस हड़ताल में शामिल होने का आह्वान किया है. आंदोलन को INTUC, AITUC, CITU, HMS सहित कई राष्ट्रीय यूनियंस का समर्थन है. इसका मिलाजुला असर आज पटना की सड़कों पर भी देखने को मिला. कई बैंकों पर हड़ताल का बैनर लटका था. कुछ संगठनों ने सड़क पर उतरकर बैनर-पोस्टर के साथ प्रदर्शन किया. ‘

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प्रदर्शन में शामिल भाकपा माले के नेता सरोज चौबे ने बताया कि जिस तरह से सरकार श्रम विरोधी कानून लाई है और श्रमिकों के साथ धोखा किया गया है उसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. भारत सरकार ट्रंप के सामने घुटने टेक दी है. इसकी लड़ाई हम लोगों ने आज से शुरू की है. आज एक दिन के लिए सांकेतिक हड़ताल है. यह लड़ाई आगे भी जारी रहेगी.ट्रेड यूनियंस का कहना है कि नई नीतियां उद्योगपतियों को फायदा पहुंचा रही हैं. यूनियन के नेताओं ने कहा कि नए श्रम कानून से नौकरियों की सुरक्षा खतरे में पड़ जाएगी. हायरिंग और फायरिंग के नियम आसान होंगे. सामाजिक सुरक्षा घटेगी और अनौपचारिक क्षेत्र के लाखों मजदूर कानूनी दायरे से बाहर हो जाएंगे. यूनियंस सरकार द्वारा नवंबर में लागू किए गए चार नए लेबर लॉ के खिलाफ प्रदर्शन कर रही हैं, जिन्होंने 29 मौजूदा श्रम कानूनों की जगह ली है. इन संगठनों ने ‘मजदूर वर्ग पर बढ़ते हमलों’ को लेकर चिंता जताई है. कहा गया कि प्रस्तावित श्रम संहिताएं पूरी तरह से मजदूरों के खिलाफ हैं. ट्रेड यूनियन रजिस्ट्रेशन के लिए सख्त शर्तें रखी गई हैं. लंबे समय से ये संघ वर्क लाइफ बैलेंस और फाइव-डे वर्किंग की मांग भी करते आ रहा है.

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