युनुस के फैसले को नहीं मान रहे बांग्लादेशी पीएम,इंडिया के लिए दिखाई बड़ी दिल
तारिक रहमान की जीत के बाद भले ही मोहम्मद यूनुस इसे अपनी ही जीत मान बैठे हों लेकिन बांग्लादेश की मौजूदा हकीकत इससे काफी उलट दिखाई पड़ती है. राष्ट्रपति बनने का सपना देख रहे मोहम्मद यूनुस को तारिक रहमान प्रधानमंत्री बनने के बाद एक के बाद एक झटके दे रहे हैं और उनके फैसलों को बदलते जा रहे हैं. इसे लेकर बांग्लादेश की दुनियाभर में किरकिरी हुई. तारिक रहमान जिस तरह से फैसले ले रहे हैं, उसे बांग्लादेश की राजनीति में एक नई शुरुआत के तौर पर देखा जा रहा है. भारत और बांग्लादेश के रिश्ते पिछले कुछ समय से बेहद नाजुक दौर से गुजर रहे हैं. ये बदलाव लोगों को एक नई उम्मीद दे रहा है कि अब हालात बेहतर हो सकते हैं.मोहम्मद यूनुस के कार्यकाल के दौरान भारत और बांग्लादेश के रिश्तों में काफी खटास आ गई थी. बातचीत कम हो गई थी, बयानबाजी ज्यादा होने लगी थी और कई जरूरी मुद्दे अटके रह गए थे. ऐसे माहौल में भरोसा कमजोर हो गया था. इसलिए अब जब तारिक रहमान सत्ता में आए हैं तो सबसे बड़ी उम्मीद यही है कि दोनों देश फिर से बातचीत शुरू करें और रिश्तों को सुधारने की कोशिश करें. नई सरकार बनने के तुरंत बाद भारत की ओर से जो प्रतिक्रिया आई, वह काफी अहम है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तारिक रहमान को बधाई दी और भारतीय संसद के स्पीकर ओम बिरला उनके शपथ ग्रहण समारोह में शामिल हुए. यह संकेत साफ है कि भारत नई सरकार के साथ रिश्ते सुधारना चाहता है और एक सकारात्मक शुरुआत के लिए तैयार है.ढाका में भारत की ओर से वीजा सेवाओं को धीरे-धीरे बहाल करने की बात कही गई है. फिलहाल मेडिकल और डबल-एंट्री वीजा जारी किए जा रहे हैं. जल्द ही ट्रैवल वीजा भी शुरू करने की योजना है. यह कदम छोटा लग सकता है, लेकिन इसका असर बहुत बड़ा होता है क्योंकि इससे आम लोगों के बीच आना-जाना आसान होता है. रिश्तों में गर्माहट आती है लेकिन यह भी सच है कि सिर्फ नई सरकार आने से सारी समस्याएं खत्म नहीं हो जातीं. पिछले डेढ़ साल में जो दूरी बनी है, उसे खत्म करने में समय लगेगा. गंगा जल समझौता, सीमा सुरक्षा, अवैध घुसपैठ, व्यापार और मेडिकल टूरिज्म जैसे कई मुद्दे अभी भी हल होने बाकी हैं. इन पर आगे बढ़ने के लिए दोनों देशों के बीच भरोसा फिर से मजबूत करना जरूरी है.तारिक रहमान के नेतृत्व में नई सरकार बनने के बाद बांग्लादेश की राजनीति में कुछ बदलाव देखने को मिल रहे हैं, जिनसे पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को राहत मिलने के संकेत हैं. उनकी पार्टी की गतिविधियां फिर से सक्रिय हो गई हैं. इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय आपराधिक ट्रिब्यूनल (ICT) में उनके खिलाफ चल रहे मामलों से जुड़े मुख्य अभियोजक ताजुल इस्लाम को पद से हटा दिया गया है।

शेख हसीना के खिलाफ इस ट्रिब्यूनल में 100 से अधिक मामले दर्ज हैं, जिनमें भ्रष्टाचार और नरसंहार जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं. ऐसे में अभियोजक का बदला जाना उनके लिए राहत के तौर पर देखा जा रहा है, क्योंकि ताजुल इस्लाम को उनका कड़ा विरोधी माना जाता था.देश को संबोधित करते हुए तारिक रहमान ने सभी धर्मों के लोगों को भरोसा दिलाया कि बांग्लादेश में हर नागरिक को समान अधिकार और सुरक्षा मिलेगी. उन्होंने कहा कि चाहे कोई मुस्लिम हो, हिंदू, बौद्ध या ईसाई, हर व्यक्ति को बिना भेदभाव के सुरक्षित वातावरण दिया जाएगा. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार का उद्देश्य ऐसा माहौल बनाना है, जहां हर नागरिक चाहे उसकी राजनीतिक या धार्मिक पहचान कुछ भी हो सम्मान और सुरक्षा के साथ जीवन जी सके.अवामी लीग के कार्यकर्ताओं की गतिविधियों को लेकर बांग्लादेश में चर्चाओं का बाजार गरम है. लोग जानना चाहते हैं कि क्या वे अपने स्तर पर पार्टी कार्यालय खोल रहे हैं या यह सब संगठन के निर्देश पर हो रहा है.पिछले घटनाक्रम पर नजर डालें तो अगस्त 2024 में बड़े स्तर पर विरोध और बगावत के बीच तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना को देश छोड़ना पड़ा था, जिसके साथ ही अवामी लीग की सरकार गिर गई. इसके बाद मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व में बनी अंतरिम सरकार ने मई 2025 में अवामी लीग की सभी राजनीतिक गतिविधियों पर प्रतिबंध लगा दिया. इससे पहले 2024 में छात्र दल पर भी रोक लगाई जा चुकी थी, जिसके चलते अवामी लीग चुनावी प्रक्रिया से बाहर रही. हालांकि अब स्थिति बदलती नजर आ रही है. तारिक रहमान के नेतृत्व में बीएनपी की सरकार बनने के बाद अवामी लीग के नेता और कार्यकर्ता फिर सक्रिय हुए हैं और ढाका सहित कई जिलों व उपजिलों में पार्टी कार्यालय खोलने लगे हैं।
