क्या अमेरिका के हथियार हो रहे हैं खत्म?युद्ध के बीच ईरान के दावों से मचा हड़कंप!
ईरान ने रविवार को यूक्रेन के खिलाफ बदले की धमकी दी. ईरान का कहना है कि कैस्पियन सागर में एक ईरानी कमर्शियल जहाज पर हमला हुआ था, जिसमें एक नाविक की मौत हो गई थी. विदेश मंत्री सईद अब्बास अराघची ने चेतावनी दी कि इस घटना का बिना जवाब दिए नहीं रहा जा सकता और राष्ट्रपति जेलेंस्की पर इजराइल के कहने पर काम करने का आरोप लगाया.सोशल साइट एक्स पर एक पोस्ट में, अराघची ने कहा कि जेलेंस्की ने एक ईरानी कमर्शियल जहाज पर हमला किया था, जिसमें एक नाविक की मौत हो गई थी, और इसे UN चार्टर का खुला उल्लंघन बताया. अराघची ने लिखा, “यूरोप को अपनी लड़ाई में घसीटने के लिए इजराइल के कहने पर UN चार्टर का खुला उल्लंघन किया गया.उन्होंने आगे कहा कि EU के विदेश नीति प्रमुख काजा कैलास और रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव के साथ अलग-अलग कॉल के दौरान, उन्होंने यह साफ कर दिया था कि “कीव में मुफ्तखोर ने जो किया, उसका बिना जवाब नहीं दिये नहीं रहा जा सकता.यह ताजा टिप्पणी ईरान के विदेश मंत्रालय द्वारा कैस्पियन सागर में एक ईरानी कमर्शियल जहाज पर यूक्रेन के हमले की निंदा करने के एक दिन बाद आई है, जिसमें कहा गया है कि धमाके में एक नाविक मारा गया और दूसरा घायल हो गया.

यूक्रेन के चार्ज डी’अफेयर्स को औपचारिक विरोध दर्ज कराने के लिए बुलाया और कीव पर यूक्रेन से आगे लड़ाई को बढ़ाने की कोशिश करने का आरोप लगाया.ईरान की सरकारी न्यूज एजेंसी IRNA के मुताबिक, विदेश मंत्रालय ने इस कथित हमले को दुश्मनी वाला और क्रिमिनल बताया और कहा कि ईरान अपने राष्ट्रीय हितों और सुरक्षा की रक्षा करेगा. यह डिप्लोमैटिक झगड़ा ईरान के रूस के साथ मिलिट्री रिश्तों के बैकग्राउंड में हुआ है, जिसने यूक्रेन पर हमले के दौरान ईरान के डिजाइन किए गए शाहेद ड्रोन पर बहुत ज्यादा भरोसा किया है.बदले में कीव ने मिडिल ईस्ट के उन देशों को अपनी ड्रोन इंटरसेप्शन एक्सपर्टीज दी है, जिन्होंने ईरानी हथियारों से हुए हमलों का सामना किया है. ईरान की यह बुराई जेलेंस्की के नए आरोपों के साथ हुई, जिन्होंने दावा किया कि रूस मिडिल ईस्ट में हमलों की प्लानिंग में मदद के लिए ईरान के साथ सैटेलाइट इंटेलिजेंस शेयर कर रहा है.यूक्रेनी राष्ट्रपति ने कहा कि कीव ने कैस्पियन सागर में एक रूसी वॉरशिप और ईरान से जुड़े मिलिट्री कार्गो को ट्रांसपोर्ट करने वाले जहाजों पर हमला किया था. उन्होंने यह भी दावा किया कि यूक्रेन ने बहरीन, जॉर्डन और कुवैत में मिलिट्री ठिकानों पर रूसी सैटेलाइट निगरानी को डॉक्यूमेंट किया था, और आरोप लगाया कि बाद में ईरान ने इन तस्वीरों का इस्तेमाल इलाके में हमलों की तैयारी और उनका आकलन करने के लिए किया.ये ताजा आरोप तेहरान और कीव के बीच तनाव में तेज़ी से बढ़ोतरी दिखाती है, जिससे एक ऐसे टकराव में एक नया डिप्लोमैटिक मोर्चा खुल गया है जो पहले से ही रूस को ईरान के मिलिट्री सपोर्ट और मॉस्को की सप्लाई चेन को रोकने की यूक्रेन की कोशिशों से बना हुआ है।वहीं दूसरी तरफ अमेरिका और ईरान के बीच जंग फिलहाल थम चुकी है. ट्रंप की सेना ने हमले रोक दिए हैं. ईरान ने हर हमले का कड़ा जवाब दिया है, जिससे ट्रंप को पीछे हटना पड़ा है. जब से अमेरिका ने हमले रोके हैं, ईरान ने भी कोई जवाबी हमला नहीं किया है. कहा जा रहा है कि अमेरिका के एयर डिफेंस मिसाइल स्टॉक कम हो रहे हैं, जिससे अरब क्षेत्र में अमेरिकी ठिकानों की सुरक्षा करना मुश्किल हो सकता है. इसी वजह से ट्रंप को पीछे हटना पड़ा.दरअसल, ईरान ने युद्ध की शुरुआत से ही सस्ते ड्रोन से लगातार हमले करने की रणनीति बनाई थी जिसका परिणाम ये हुआ कि अमेरिकी पैट्रियट मिसाइलें का इस्तेमाल बहुत अधिक करना पड़ा. और चंद दिनों में मिसाइलों की स्टॉक बेहद कम हो गया. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका पिछले 13 दिनों से अपने तमाम बेस की सुरक्षा के लिए पैट्रियट मिसाइलों का इस्तेमाल कर रहा था.13 दिनों की जंग के बाद अब कहा जा रहा है कि अमेरिकी सेना के पास करीब 900 से 1000 पैट्रियट मिसाइलें ही बची हैं. दूसरी तरफ अमेरिकी कंपनियां हर महीने सिर्फ 20 मिसाइलों का प्रोडक्शन कर रही हैं. अब अगर और हमले होते हैं तो ईरान फिर जवाबी प्रहार करेगा और बची खुची मिसाइलें भी खत्म हो जाएंगी. ऐसे में अमेरिका को अपने बेस की सुरक्षा की फिक्र है.ईरान के हमलों से भी अमेरिकी एयर डिफेंस को भारी नुकसान हुआ है. हमलों के दौरान अमेरिकी बेस पर 7 कमांड एंड कंट्रोल सेंटर नष्ट चुके हैं. इसके अलावा 6 पैट्रियट एयर डिफेंस रडार नष्ट हो चुके हैं. अमेरिका हमलों की वजह से 3 EPS रडार सिस्टम गंवा चुका है. हमलों में 5 लॉन्ग रेंज रडार भी नष्ट हो गए. एक तरफ हथियारों की कमी है तो दूसरी तरफ नुकसान की वजह से युद्ध का बढ़ता खर्च भी ट्रंप पर दबाव बना रहा है. हमलों के दौरान अमेरिका का एक F-15 विमान नष्ट हो गया. एक P-8 विमान भी नष्ट हो चुका है. ईरानी हमलों की वजह से C-17 कार्गो विमान जल गया. 8 हवा में तेल भरने वाले रिफ्यूलिंग विमान भी नष्ट हो गए हैं. हमलों के दौरान 4 हेलिकॉप्टर नष्ट हो गए.13 दिनों में अमेरिका को भारी नुकसान हुआ है क्योंकि ईरान जॉर्डन और इराक में भी हमले करता रहा. ईरान ने इस बार सिर्फ अमेरिकी बेस पर मौजूद हथियारों को टारगेट किया. दावा किया जा रहा है कि चीन की सैटेलाइट्स की मदद से ईरान ने सटीक निशाने से हमले किए. जिससे ईरान के हमलों में अमेरिका के नुकसान का ग्राफ बढ़ता गया. ईरान की रणनीति ने अमेरिका को भारी नुकसान पहुंचाया है क्योंकि ईरान इस बार अमेरिकी हथियारों को नष्ट करने के मकसद से हमले कर रहा था।
