मूर्ति की तस्वीर पोस्ट करके फंस अखिलेश यादव,भाजपा और ओवैसी की पार्टी ने कहा यहीं है अवसरवादी राजनीति!

 मूर्ति की तस्वीर पोस्ट करके फंस अखिलेश यादव,भाजपा और ओवैसी की पार्टी ने कहा यहीं है अवसरवादी राजनीति!
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समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इटावा में निर्माणाधीन श्री केदारेश्वर महादेव मंदिर में भगवान श्रीराम की सुंदर मूर्ति लगाए जाने की तस्वीर सोशल मीडिया पर पोस्ट कर दी. इस पोस्ट पर AIMIM और भाजपा दोनों ही दलों ने अखिलेश यादव पर निशाना साधा है. AIMIM ने इसे ‘हिंदुत्व की राजनीति’ करार दिया, जबकि भाजपा ने इसे ‘डर से बदली सपा की अवसरवादी राजनीति’ बताया. अखिलेश यादव ने पोस्ट में मंदिर की तस्वीर शेयर करते हुए लिखा था, ‘प्रभु राम की अभिराम मूर्ति : निर्माणाधीन श्री केदारेश्वर महादेव मंदिर, इटावा.’ पोस्ट आने के बाद ही राजनीतिक बयानबाजी शुरू हो गई.AIMIM के पूर्वांचल अध्यक्ष इसरार अहमद ने अखिलेश यादव पर सीधा निशाना साधते हुए कहा, अखिलेश मुसलमानों को अपना गुलाम समझते हैं. अखिलेश अयोध्या में राम मंदिर जाने को कहते हैं, अपने यहां मंदिर में राम की मूर्ति लगाते हैं। उनके पिता ने अयोध्या में बाबरी मस्जिद की हिफाजत के लिए गोली चलवा दी थी. इसरार अहमद ने आगे कहा कि योगी सरकार में 14 हजार से अधिक एनकाउंटर हुए, अखिलेश ने कभी मुसलमानों के लिए आवाज नहीं उठाई. अब अखिलेश इस तरह एजेंडे से घिर गए हैं कि वो राम मंदिर की बात कर रहे हैं और मुसलमानों की भावना की कोई कदर नहीं कर रहे. अखिलेश अब हिंदुत्व की राजनीति कर रहे हैं, मुसलमान उनके लिए विकल्प रह गया है.

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भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष एवं डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने अखिलेश के पोस्ट पर लंबा पोस्ट लिखकर तंज कसा. उन्होंने लिखा, भाजपा के भय से पहले मंदिर बनवाना और अब प्रभु श्रीरामलला की मूर्ति लगवाने की चर्चा करना, यह समाजवादी पार्टी की ‘अवसरवादी’ राजनीति का नया चेहरा है. विडंबना यह है कि जिस सपा और सपाइयों के दामन पर रामभक्तों के खून के छींटे लगे हों, वे आज रामभक्ति का स्वांग रच रहे हैं.’ केशव मौर्य ने सपा की नियत पर सवाल उठाते हुए कहा यदि वास्तव में आस्था का सम्मान होता और नीयत सही होती तो श्रीकृष्ण जन्मभूमि पर बनी ईदगाह को हटाकर भव्य मंदिर निर्माण की बात करते और बाबरी समर्थकों के खिलाफ भी आवाज उठाते.दुविधा में फंसे सपा बहादुर और उनकी सपा न तो रामभक्तों का विश्वास पाएगी और न ही अपना कथित वोट बैंक बचा पाएगी. 2027 में इनको न तो हिंदू मिलेगा और न मुसलमान, मिलेगा तो केवल सैफई में स्थान. भाजपा प्रवक्ता राकेश त्रिपाठी ने भी कहा कि समाजवादी पार्टी का रक्तरंजित इतिहास देश नहीं भूला है. अब केदारेश्वर मंदिर के नाम पर स्वांग रच रहे हैं. राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारी में सपा हिंदुत्व की छवि बनाने की कोशिश कर रही है, जिस पर विपक्षी दल हमलावर हो गए हैं. यह घटना सपा की रणनीति और उसके पारंपरिक वोट बैंक पर सवाल खड़े कर रही है। दोनों तरफ से बयानबाजी तेज होने के आसार हैं.

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