आखिर कब तक सामने आएगा सच?राम मंदिर चढ़ावा मामले में नहीं होगा इंसाफ़!

 आखिर कब तक सामने आएगा सच?राम मंदिर चढ़ावा मामले में नहीं होगा इंसाफ़!
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अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावा चोरी का मामला इन दिनों सुर्खियों में बना हुआ है. योगी सरकार ने मामले की जांच के लिए SIT का गठन किया था, जिसने हाल में अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट सौंपी थी. इसके बाद गिरफ्तारियों का दौर शुरू हुआ. मामले में FIR दर्ज करने के बाद आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया गया. वहीं ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा ने भी इस्तीफा दे दिया. ऐसे में श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में अचानक एक संकट की स्थिति दिखाई दे रही है.दरअसल अध्यक्ष नृत्य गोपाल दास लंबे समय से अस्वस्थ हैं और उनकी अवस्था किसी भी सक्रिय काम में हिस्सा लेने की नहीं है. वो मौजूदा प्रकरण और विवाद से वाकिफ़ भी नहीं हैं. ट्रस्ट के अध्यक्ष के बाद सबसे महत्वपूर्ण पद चंपत राय का है जो महासचिव थे.

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अब उनके इस्तीफे के बाद सबसे बड़ा सवाल है कि सबसे शक्तिशाली व्यक्ति के न होने की स्थिति में ट्रस्ट का संचालन कौन करेगा.ट्रस्ट के सक्रिय सदस्यों में चंपत राय के बाद दूसरा नाम अनिल मिश्रा का आता है. उनका भी इस्तीफा हो चुका है. वो नंबर-2 की हैसियत में थे लेकिन अब नहीं हैं. राम मंदिर ट्रस्ट के पावर सेंटर के दो संचालक अब बाहर हैं, ऐसे में करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र अयोध्या राम मंदिर के सामने एक संकट है. चंपत राय के खसम खास और डे टू डे ऑपरेशन या यू कहें कि संचालन में तीसरे सबसे पावरफुल व्यक्ति टिन्नू यादव गिरफ्तार हो कर जेल जा चुके. अनिल मिश्रा के करीबी भी जेल जा चुके.इन सबके बाद जो व्यक्ति बचते हैं वो हैं ट्रस्ट के विशेष आमंत्रित सदस्य गोपाल जी राव, जिनकी मुस्कुराती हुई तस्वीर आज सामने आई. ऐसे में उनकी भूमिका क्या होगी ये भी बड़ा सवाल है, क्योंकि संदेह के घेरे में वो भी हैं और लंबी पूछताछ उनसे भी हुई थी, बेशक अभी तक कार्रवाई या इस्तीफ़े के दायरे में नहीं आए हैं.FIR, गिरफ़्तारी और इस्तीफे की खबरों के बीच जो ट्रस्ट क्राइसिस आया है उससे श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ही क्राइसिस में आ गया है. ऐसे में सबसे बड़ा सवाल ट्रस्ट के पुनर्गठन का है. प्रोफेशनल अरेंजमेंट तय करने का है, और इसकी रूपरेखा क्या होगी, कैसे होगी इस बात का है. प्रोफेशनल अरेंजमेंट की बात नृपेंद्र मिश्र भी कर चुके हैं और विश्व हिन्दू परिषद के अध्यक्ष भी इसकी वकालत करते हुए बयान दे रहे हैं. ये सब संकेत ट्रस्ट की संरचना में जल्द ही बड़े बदलाव की ओर इशारा करते हैं.यह मिस मैनेजमेंट के बाद मिसिंग मैनेजमेंट की स्थिति है. हजारों भक्त रोजाना इस तपती गर्मी में भी राम लला के दर्शन के लिए आ रहे हैं. जाहिर तौर पर उनकी श्रद्धा पर नहीं तो चढ़ावे के प्रति उनके विश्वास पर इस चोरी प्रकरण का प्रभाव जरूर पड़ा है. ऐसे में एक सवाल ये भी है कि डैमेज कंट्रोल का अगला कदम कब और कितनी जल्दी उठाया जाएगा?राम मंदिर ट्रस्ट और चंपत राय की उसमें भूमिका से अयोध्या के आम लोग से लेकर संत समाज तक वाकिफ़ हैं. वो अपने विचार भी रखते हैं और कहते हैं कि चंपत राय अयोध्या में एक पैरेलल सिस्टम चला रहे थे, जिसमें टिन्नू की भूमिका बहुत अहम थी और जो अब जेल में है. उसके ठिकाने से कैश और ज्वैलरी बरामद हुई है. जब यही चंद लोग जो पूरे सिस्टम को चला रहे थे वो अब आउट ऑफ़ सिस्टम हो चुके हैं. ऐसे में यह एक बड़ा संकट है और इसको तत्काल प्रभाव से पुनर्गठित करने की जरूरत दिखाई देती है.

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