बिहार MLC चुनाव में महागठबंधन के लिए चुनौती,जानिए किसे नुकसान और किसे होगा फायदा?

 बिहार MLC चुनाव में महागठबंधन के लिए चुनौती,जानिए किसे नुकसान और किसे होगा फायदा?
Sharing Is Caring:

राज्यसभा के बाद बिहार विधान परिषद की 11 सीटों पर जून से पहले चुनाव होगा. इसको लेकर पटना से दिल्ली तक हलचल बढ़ने लगी है. नेता अपनी जुगाड़ लगाने में भी लग गए हैं. नीतीश कुमार के इस्तीफे के बाद चार सीटें खाली हो चुकी है, जबकि जून में 7 विधान पार्षदों का कार्यकाल पूरा हो जाएगा. इस तरह कुल 11 सीटें खाली हो जाएंगी.हालिया राज्यसभा चुनाव में एनडीए को पांचों सीटों पर जीत मिली थी. हालांकि महागठबंधन एक सीट जीत सकता था लेकिन अपने ‘बागी विधायकों’ के कारण नाकाम रहा. आरजेडी के एक और कांग्रेस की तीन विधायक वोट देने नहीं आए. अब विधान परिषद चुनाव में भी अगर विपक्ष एकजुट नहीं हुआ तो इस बार भी परिणाम निराशाजनक हो सकता है. ऐसे में विपक्ष को न केवल एकजुट होना होगा, बल्कि अपने विधायकों को भी संभालकर रखना होगा।विधान परिषद की 11 सीटों के लिए भले ही चुनाव एक साथ होंगे लेकिन अधिसूचना अलग-अलग जारी होगी. इसकी वजह ये है कि 2 सीटों पर उपचुनाव होंगे, जबकि 9 सीटों पर चुनाव होंगेअसल में 2025 विधानसभा चुनाव में मंगल पांडे, सम्राट चौधरी और भगवान सिंह कुशवाहा के विधायक चुने जाने के कारण विधान परिषद की सीट खाली हुई थी. इसमें से मंगल पांडे की जो सीट खाली हुई है, उसका कार्यकाल 2030 तक का है. वहीं सम्राट चौधरी और भगवान सिंह कुशवाहा का कार्यकाल जून में ही समाप्त हो रहा है. अब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के इस्तीफे से जो विधान परिषद की सीट खाली हुई है, उसका भी कार्यकाल 2030 तक का है.साल जून में 7 और विधान परिषद सदस्यों का कार्यकाल पूरा हो रहा है. जिसमें डॉ. कुमुद वर्मा, सुनील कुमार सिंह, प्रोफेसर गुलाम गौस, मोहम्मद फारूक, भीष्म सहनी, संजय प्रकाश और समीर कुमार सिंह शामिल हैं. मंगल पांडे और नीतीश कुमार के इस्तीफे के बाद विधान परिषद की जो दो सीट खाली हुई है, उसके लिए भी जून में खाली हो रही सभी 9 सीटों के साथ ही उपचुनाव होंगे.विधान परिषद की 11 सीटों में से 8 सीट एनडीए की है, जबकि तीन सीट महागठबंधन के पास है. विधानसभा में सीटों के लिहाज से 10 सीट एनडीए को मिलना तय है. यानी दो सीट का लाभ एनडीए को मिलता दिख रहा है.

1000038191

वहीं महागठबंधन को दो सीट का नुकसान होना तय है. यदि विपक्ष में टूट नहीं हुई तो एक सीट आरजेडी को मिल सकती है. इसके बावजूद आरजेडी और कांग्रेस को एक-एक सीट का नुकसान होगा।राज्यसभा चुनाव में आरएलएम के 4 विधायक होने के बावजूद एनडीए ने उपेंद्र कुशवाहा फिर से राज्यसभा भेजा है. अब विधान परिषद के चुनाव में उनके बेटे और पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश को मौका मिल सकता है. बिना किसी सदन के सदस्य होते हुए भी उन्होंने मंत्री पद की शपथ ली थी. ऐसे में उनको 6 महीने के अंदर किसी सदन का सदस्य होना जरूरी है. मई में 6 महीना का कार्यकाल पूरा हो जाएगा. यदि किसी सदन के सदस्य नहीं बने तो मंत्री पद छोड़ना पड़ सकता है.विधान परिषद की एक सीट पर चिराग पासवान की पार्टी भी दावा कर सकती है. विधानसभा में चिराग पासवान की पार्टी लोजपा (रामविलास) के 19 विधायक हैं. जेडीयू और बीजेपी को विधान परिषद की चार-चार सीट मिलनी तय है. ऐसे में जेडीयू को एक सीट का इस बार नुकसान उठाना पड़ेगा, जबकि बीजेपी को एक सीट का फायदा होगा लेकिन ओवरऑल बात करें तो एनडीए को दो सीटों का फायदा होगा.नीतीश कुमार के नजदीकी जेडीयू एमएलसी संजय गांधी का कहना है कि हम लोगों को खेला करने की कोई जरूरत नहीं है. हम लोगों के पास 202 विधायक हैं. संख्या बल के हिसाब से ही एनडीए को सीट मिलेगा. आरजेडी और कांग्रेस के बागी विधायकों के मुख्यमंत्री और मंत्रियों से मिलने के सवाल पर उनका कहना है कि अपने क्षेत्र के विकास काम को लेकर मिलते हैं।महागठबंधन में दूसरी प्रमुख पार्टी कांग्रेस के नेता पहले से ही सरेंडर कर चुके हैं. पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मदन मोहन झा कहते हैं कि हमारे पास उतने विधायक नहीं हैं कि अपना उम्मीदवार उतार सकें. वहीं, कांग्रेस के बागी विधायकों के मंत्रियों से मिलने के सवाल पर उन्होंने कहा कि इसका मतलब यह नहीं है कि वे लोग पार्टी छोड़ रहे हैं. उन्होंने राज्यसभा की तरह विधान परिषद चुनाव में खेला से इंकार किया है. कांग्रेस विधान पार्षद ने कहा कि इस बार इसलिए वह स्थिति नहीं आएगी, क्योंकि इस बार जरूरत से अधिक विधायकों की संख्या है.बिहार विधान परिषद के 75 सदस्यों में अभी एनडीए के 43 और विपक्ष महागठबंधन के 21 सदस्य हैं. निर्दलीय सदस्यों की संख्या 7 है. एनडीए की तरफ से बीजेपी के 22, जेडीयू के 19 और हम पार्टी के एक सदस्य हैं. वहीं विपक्षी खेमे से आरजेडी के 15, कांग्रेस के 3 के अवाले सीपीआई और सीपीआई-माले के एक-एक सदस्य हैं. पशुपति पारस की आरएलजेपी के भी एक एमएलसी हैं. विधान परिषद के चुनाव के बाद जहां एनडीए की संख्या बल 49 तक पहुंच जाएगा, वहीं विपक्ष की संख्या घटकर 19 रह जाएगी।

Comments
Sharing Is Caring:

Related post