भारत-अमेरिका की नई रणनीति!चीन की बढ़ेगी मुश्किल?
क्वाड देशों ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में आर्थिक और समुद्री सुरक्षा मजबूत करने के साथ-साथ महत्वपूर्ण तकनीकों और ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखलाओं को सुरक्षित बनाने की प्रतिबद्धता दोहराई है. अमेरिका, भारत, जापान और ऑस्ट्रेलिया के विदेश मंत्रियों ने 31 अक्टूबर को अमेरिका के अटलांटा में बैठक की. इस दौरान क्वाड की विभिन्न पहलों की प्रगति की समीक्षा की गई और स्वतंत्र, खुले तथा स्थिर हिंद-प्रशांत क्षेत्र के लिए सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया गया.बैठक में आर्थिक दबाव बनाने की नीतियों, मनमाने निर्यात प्रतिबंधों और महत्वपूर्ण उद्योगों में जरूरत से ज्यादा उत्पादन के जरिए वैश्विक सप्लाई चेन को प्रभावित करने पर गंभीर चिंता जताई गई. वहीं क्वाड देशों ने नेपाल में आई अचानक बाढ़ के दौरान राहत और बचाव कार्यों में भारत की भूमिका की तारीफ की.

क्वाड देशों ने होर्मुज स्ट्रेट, लाल सागर और बाब-अल-मंदेब स्ट्रेट में निर्बाध समुद्री आवाजाही और नौवहन की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने को अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत जरूरी बताया. इसके साथ ही ऊर्जा सुरक्षा और समुद्री व्यापार को बिना किसी बाधा के जारी रखने पर जोर दिया गया.क्वाड देशों ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और Pax Silica जैसी पहलों को भविष्य की आर्थिक वृद्धि के लिए अहम बताया. हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भरोसेमंद AI तकनीक तक पहुंच बढ़ाने के लिए 8.5 करोड़ डॉलर से अधिक की तकनीकी और वित्तीय सहायता देने का इरादा जताया गया. इसमें क्वाड AI एक्सेलरेटर भी शामिल होगा.सेमीकंडक्टर, 5G, 6G और AI हार्डवेयर की सुरक्षित सप्लाई चेन बनाने के लिए भी सहयोग बढ़ाया जाएगा. क्वाड देश ऐसी कमजोर कड़ियों की पहचान करेंगे, जिनके बाधित होने से वैश्विक तकनीकी आपूर्ति प्रभावित हो सकती है.क्वाड मंत्रियों ने साइबर और ऑनलाइन ठगी के बढ़ते नेटवर्क पर गंभीर चिंता जताई. उन्होंने कहा कि आपराधिक समूह लोगों की तस्करी कर उन्हें जबरन साइबर ठगी में शामिल कर रहे हैं और हर साल संबंधित देशों के नागरिकों की मेहनत की कमाई से अरबों डॉलर की चोरी हो रही है. क्वाड देशों ने ऐसे नेटवर्क को खत्म करने और इनके संचालकों तथा अंतरराष्ट्रीय आपराधिक गिरोहों के नेताओं को जवाबदेह ठहराने का संकल्प लिया.क्वाड देशों ने महत्वपूर्ण खनिजों की सप्लाई चेन को मजबूत करने के लिए इलेक्ट्रॉनिक कचरे से खनिजों को दोबारा प्राप्त करने और रीसाइक्लिंग नेटवर्क विकसित करने पर सहमति जताई. अमेरिका भारत और ASEAN देशों में इस दिशा में बुनियादी ढांचे के विकास के लिए 1 करोड़ डॉलर की सहायता देगा. इसके अलावा सितंबर में आयोजित पहले क्वाड फ्यूल सिक्योरिटी फोरम में रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार और ईंधन सुरक्षा को मजबूत करने पर भी चर्चा हुई.क्वाड देशों का दूसरा क्वाड-एट-सी शिप ऑब्जर्वर मिशन चेन्नई से पर्थ तक सफलतापूर्वक पूरा हुआ. 25 सितंबर से 7 अक्टूबर तक चले इस मिशन में चारों देशों के प्रतिनिधि भारतीय तटरक्षक बल के जहाज पर मौजूद रहे.2027 में सी ड्रैगन अभ्यास के तहत समुद्री निगरानी और सूचना साझा करने के लिए पहला संयुक्त अभ्यास आयोजित किया जाएगा. इसके अलावा 2027 की शुरुआत में समुद्री क्षेत्र की जागरूकता और निगरानी तकनीकों पर पहला क्वाड सिम्पोजियम भी आयोजित होगा.क्वाड देशों ने अगस्त में नेपाल में आई अचानक बाढ़ के दौरान राहत और बचाव कार्यों में भारत की अग्रणी भूमिका की सराहना की. बैठक में बाढ़ में जान गंवाने वालों के प्रति संवेदना व्यक्त की गई और आपदा के समय साझेदार देशों की मदद करने की प्रतिबद्धता दोहराई गई. नवंबर में भारत के वार्षिक संयुक्त मानवीय सहायता और आपदा राहत अभ्यास (AJHE-26) में अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया पर्यवेक्षक भेजेंगे. इसका उद्देश्य प्राकृतिक आपदाओं से निपटने की साझा क्षमता मजबूत करना है.क्वाड देशों ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में बुनियादी ढांचे, बंदरगाहों, डिजिटल कनेक्टिविटी और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क को मजबूत करने की दिशा में जारी सहयोग को भी आगे बढ़ाने पर सहमति जताई. बैठक के अंत में चारों देशों ने क्वाड नेताओं के आगामी शिखर सम्मेलन और अगली विदेश मंत्रियों की बैठक के जरिए हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति, स्थिरता और समृद्धि के लिए सहयोग जारी रखने की प्रतिबद्धता दोहराई.
