अरुणाचल में फिर आमने-सामने!भारत-चीन सीमा पर क्या हुआ?

 अरुणाचल में फिर आमने-सामने!भारत-चीन सीमा पर क्या हुआ?
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आईटीबीपी महानिदेशक शत्रुजीत कूपर के एक बयान से देश की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल पूछे जाने लगे हैं. कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सीधे जवाब मांगा है. शत्रुजीत कपूर ने कहा कि अरुणाचल प्रदेश में कई जगहों पर भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच आमना-सामना हुआ है. उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति अभी भी बनी हुई है.उनके इस वक्तव्य को लेकर कांग्रेस पार्टी ने स्पष्टीकरण की मांग की है. पार्टी अध्यक्ष खड़गे ने इन घटनाओं को “बेहद चिंताजनक” बताया. उन्होंने सरकार से राष्ट्रीय सुरक्षा, चीन के साथ आर्थिक संबंधों और दोनों देशों के बीच बार-बार हुई राजनयिक बातचीत के नतीजों को लेकर सवाल किए. एक महीने पहले ही भारत और चीन के बीच बातचीत को लेकर खबर दी गई थी. कहा गया था कि इस बातचीत के बाद लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (एलएसी) पर स्थिति धीरे-धीरे सामान्य हो रही है. पिछले महीने छह सितंबर को वाचा-दमाई बॉर्डर मीटिंग प्वाइंट पर कोर कमांडर स्तर की बातचीत हुई थी.कांग्रेस अध्यक्ष खड़गे ने कहा कि अरुणाचल प्रदेश में चीनी सैनिकों के साथ लगातार हो रहे टकराव की आईटीबीपी के डीजी द्वारा पुष्टि बेहद चिंताजनक है.

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उन्होंने कहा कि डोकलाम और गलवान के बाद, क्या एक और गंभीर टकराव की स्थिति बन रही है ? अगस्त में तक्सिंग के पास चीनी घुसपैठ की खबरें सामने आई थीं. फिर भी वाचा-दमाई में कोर कमांडर स्तर की बातचीत के 47 दिन बाद भी, टकराव जारी है. खड़गे ने पूछा, “क्या भारत की पेट्रोलिंग करने की पहुंच प्रभावित हुई है ? अरुणाचल प्रदेश भारत का अभिन्न अंग है. देश को अंधेरे में क्यों रखा जा रहा है ?”खड़गे ने मोदी सरकार से आर्थिक सुरक्षा को लेकर भी सवाल पूछे. उन्होंने कहा कि गलवान में भारतीय सेना के 20 बहादुर जवानों की शहादत के बाद से चीन से होने वाले आयात में 102 फीसदी की भारी वृद्धि हुई है. वहीं, चीन के साथ भारत का व्यापार घाटा 155 फीसदी से बढ़कर 112.16 अरब डॉलर तक पहुंच गया है. उन्होंने कहा कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भी माना है कि चीन भारतीय निर्यात में बाधा डालता है. इसके बावजूद, सरकार चीनी निवेश पर लगी पाबंदियों में ढील दे रही है और चीन से जुड़ी पात्र कंपनियों को पीएलआई (प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव) का लाभ देने पर विचार कर रही है. खड़गे ने पूछा कि क्या मेक इन इंडिया अब चीन से आयात में बदल गया है कांग्रेस अध्यक्ष खड़गे ने मोदी और शी जिनपिंग के बीच 23 मुलाकातों को लेकर भी हमला किया. उन्होंने कहा कि एनएसए अजीत डोभाल के साथ विशेष प्रतिनिधियों के 25 दौर की वार्ताएं हुई हैं, 36 बैठकें हुई हैं, और एससीओ तथा ब्रिक्स के लगातार शिखर सम्मेलन हुए हैं. इन सब मुलाकातों और वार्ताओं का ठोस नतीजा क्या निकला ? क्या मई 2020 से पहले भारत को हासिल गश्त (पेट्रोलिंग) के अधिकार पूरी तरह से बहाल हो गए हैं ?हमें अपने सशस्त्र बलों पर पूरा भरोसा है. लेकिन राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जवाबदेही जरूरी है, न कि केवल राजनयिक फोटो-ऑप (तस्वीरें खिंचवाने के मौके) और हगप्लोमेसी (गले मिलने वाली कूटनीति)!भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा, “भारत-चीन सीमावर्ती इलाकों में स्थिति समय-समय पर तब बिगड़ जाती है, जब चीनी सेनाएं तय गश्त के तरीकों से हट जाती हैं. दोनों पक्ष लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल पर लंबित मुद्दों को सुलझाने और किसी भी तरह की गलतफहमी या गलत आकलन से बचने के लिए, मौजूदा राजनयिक और सैन्य तंत्रों का इस्तेमाल करना जारी रखे हुए हैं.” मंत्रालय ने आगे कहा, “दोनों पक्ष बेहतर सीमा प्रबंधन के लिए कुछ खास इलाकों में एलएसी को लेकर आपसी समझ बेहतर बनाने के तरीकों पर चर्चा करने के लिए भी सहमत हुए हैं.”दरअसल, राजस्थान के अलवर में आईटीबीपी कर्मियों के लिए आयोजित वार्षिक सम्मान समारोह में बोलते हुए आईटीबीपी महानिदेशक कपूर ने कहा, “पिछले कुछ दिनों में ऐसी स्थिति बनी, जहां अरुणाचल में कई जगहों पर आमना-सामना हुआ, और यह सिलसिला अभी भी जारी है.” हालांकि, कपूर ने चीन का नाम नहीं लिया.आईटीबीपी प्रमुख ने एक दिन पहले गुरुवार को ड्रोन प्लाटून तैयार करने की बात कही थी. वे राजस्थान में एक कार्यक्रम में बोल रहे थे. उन्होंने कहा कि गलवान जैसी लड़ाइयों से बेहतर तरीके से निपटने के लिए एक नया स्ट्राइक कोर्स बनाया गया है. उन्होंने कहा था कि हमलोगों ने नई युद्धनीति के तहत सीमा पर बड़े पैमाने पर भूमिगत बुनियादी ढांचे को तैयार किया और उसका विस्तार किया जा रहा हैआईटीबीपी महानिदेशक ने अपने जवानों से कहा कि युद्ध के “पारंपरिक” तरीकों से चीन का मुकाबला करना अब पुरानी बात हो गई है. इसलिए, वे बल को आधुनिक बनाने के साथ-साथ हथियारों, वाहनों और सीमा चौकियों के आधुनिकीकरण में निवेश कर रहे हैं.1962 में गठित भारत-तिब्बत सीमा पुलिस चीन के साथ लगती 3,488 किलोमीटर लंबी वास्तविक नियंत्रण रेखा की सुरक्षा करती है.डीजी ने कहा कि हाल ही में यूक्रेन-रूस और ईरान-अमेरिका के बीच हुए युद्धों ने ड्रोन और एंटी-ड्रोन तकनीक के महत्व को उजागर किया है. इन तकनीकों की मदद से एक छोटा देश भी संघर्ष के दौरान किसी बड़े देश पर भारी पड़ सकता है.कपूर 31 अक्टूबर को सेवानिवृत्त हो रहे हैं.उन्होंने कहा कि चीन के साथ लगती सीमा हमारी “सबसे कठिन” सीमा है. चीन एक “शक्तिशाली” पड़ोसी और भारत का “सबसे बड़ा विरोधी” है, जिसका मुकाबला करने के लिए हमें अपनी क्षमताओं को और बढ़ाने की जरूरत है.उन्होंने कहा, “ड्रोन एक बड़ी चुनौती भी हैं और एक अवसर भी. पारंपरिक तरीकों से चीन का मुकाबला करना मुश्किल होगा. उन्होंने अपनी सेना का आधुनिकीकरण किया है और उसमें भारी निवेश किया है, लेकिन ड्रोन एक ऐसी तकनीक है जिसकी मदद से एक छोटा देश भी किसी बड़े देश को कड़ी टक्कर दे सकता है.”कपूर ने बताया कि यूक्रेन के साथ चल रहे युद्ध में हर महीने रूस के लगभग 10,000 से 15,000 सैनिक मारे जा रहे हैं. यह तब है जब रूस एक बड़ा देश और महाशक्ति है. उन्हें लगा था कि वे 1-2 महीने में यूक्रेन पर कब्जा कर लेंगे, लेकिन अब चौथा साल चल रहा है.उन्होंने आगे कहा कि इससे “बहुत बड़ा नुकसान” हुआ और रूस को उसी एक फैसले की वजह से भुगतना पड़ रहा है.कपूर ने ईरान-अमेरिका युद्ध का उदाहरण देते हुए बताया कि कैसे ईरान ने बिना किसी वायु सेना, नौसेना या थल सेना के, दुनिया की महाशक्ति के खिलाफ लड़ाई लड़ी.उन्होंने कहा, “ड्रोन के आने के बाद पारंपरिक सेनाओं की भूमिका बदल गई है. हमें बड़े पैमाने पर ड्रोन और एंटी-ड्रोन सिस्टम को अपनाना होगा.”कपूर ने बताया कि लगभग 95,000 जवानों वाली, पहाड़ी युद्ध में प्रशिक्षित आईटीबीपी को सरकार से 400 करोड़ रुपये मिले हैं. इसमें से 70 प्रतिशत राशि का इस्तेमाल बल की ड्रोन युद्ध क्षमताओं को बढ़ाने के लिए किया जाएगा.जून 2020 में, लद्दाख के गलवान में एलएसी पर चीनी सैनिकों ने भारतीय सैनिकों पर बर्बर हमला किया था. इस दौरान उन्होंने पत्थरों, कील लगी लाठियों, लोहे की छड़ों और डंडों का इस्तेमाल किया. इस घटना में भारत के 20 जवान शहीद हो गए, जबकि चीन ने काफी समय बाद दावा किया कि उसके केवल चार सैनिक मारे गए थे. हालांकि, कई रिपोर्टों में बताया गया कि चीन को होने वाला नुकसान कहीं ज्यादा था.

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