ईरान पर फिर हमले की तैयारी!ट्रंप ने दी बड़ी धमकी
क्या ईरान के साथ युद्ध का अगला दौर शुरू होने वाला है? क्या अमेरिका, इजराइली चुनावों से पहले हमला करेगा? या फिर ट्रंप मध्यावधि चुनावों के बाद हमले के लिए हरी झंडी देंगे? ये ऐसे सवाल हैं जिन्होंने पूरे अरब जगत में डर का स्तर बहुत बढ़ा दिया है. ईरान के साथ युद्ध का अंतिम चरण कब शुरू होगा, और इसका नतीजा क्या होगा? आइए इसे विस्तार से जानते हैं.एक्सपर्ट्स मान रहे हैं ईरान पर अमेरिका और इजराइल नए सिरे से हमले शुरू कर सकते हैं. ये इजराइल के चुनाव से पहले भी हो सकता है और अमेरिका के मिड टर्म के बाद भी. 22 अक्टूबर की रिपोर्ट संकेत दे रही थीं कि मंगलवार तक ईरान पर हमले हो सकते हैं. लेकिन आज यानी 23 अक्टूबर को दावा है कि मिडटर्म के बाद हमले होने की संभावना है. ट्रंप अप्रत्याशित तौर पर कुछ भी कर सकते हैं.ईरान से जंग को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा, हम इसे थोड़ा और आगे ले जा सकते हैं. ट्रंप ने ईरान के खिलाफ फिर से युद्ध छेड़ने की धमकी दी.

हमले कब होंगे इसे लेकर ट्रंप पुख्ता तौर पर कुछ नहीं कह रहे. लेकिन इससे भी इनकार नहीं कर रहे कि ईरान के खिलाफ जल्द बारूदी कदम उठाया जाएगा. लेकिन इस बार युद्ध छोड़ा तो अरब के समीकरण 180 डिग्री बदल सकते हैं.माना जा रहा है कि युद्ध का ये राउंड मुज्तबा को अरब के खलीफा के तौर पर स्थापित कर सकता है. इन आशंकाओं की वजह ईरान के लक्ष्य हैं जो युद्ध के इस राउंड में बदलने वाले हैं. अरब के सभी देश इस बात से आशंकित हैं. ईरान इस बार भीषण हमले करेगा और नुकसान उन्हें झेलना होगा. क्योंकि अमेरिका ने अपने अहम उपकरण ईरान की रेंज से बाहर कर दिए हैं ऐसे में ईरान के पास अरब देशों के इंन्फ्रा को तबाह करना ही आखिरी विकल्प होगा, जिसे बरसों तक ठीक नहीं किया जा सकेगा.28 फरवरी के बाद जब-जब अमेरिका ने ईरान पर हमला किया. उसने अमेरिकी सैन्य बेस पर बारूद बरसाया और सैन्य तौर पर जबरदस्त नुकसान पहुंचाया. ऐसे में अब अमेरिका ने अगले राउंड से पहले अपने बेस खाली करवाने शुरू कर दिए हैं. ताकि सिटिंग डक जैसा आसान शिकार ईरान के लिए नहीं बचे. ऐसे में अब ईरान के पास अरब देशों के अहम इंफ्रा को दहलाने के सिवाए कोई विकल्प नहीं बचा है.रिपोर्ट्स इशारा करती हैं जंग के इस चरण में ईरान के टारगेट पर अहम अंडरवॉटर केबल होंगी. इसके अलावा ईरान अरब देशों के डेटा सेंटर भी टारगेट करेगा. AI सेंटर्स को भी नुकसान पहुंचाया जाएगा. सिर्फ इतना ही नहीं ईरान अरब देशों की अहम तेल पाइपलाइनों को भी निशाना बनाएगा. अरब देशों में मौजूद तेल रिफाइनरियां भी ईरान की हिट लिस्ट में शामिल होंगी. सिर्फ इतना ही नहीं. डर है ईरान खाड़ी देशों की ऑयल फील्ड और तेल के कुएं को ध्वस्त कर सकता है. अगर ऐसा हुआ तो इस नुकसान से उभरने में खाड़ी देशों को बरसों लग जाएंगे.अगर युद्ध शुरू होता है तो ईरान सभी खाड़ी देशों को जलाकर राख कर देगा. इसके संकेत ईरान से आती धमकी में छिपे हैं. मोहसिन रिजाई ने खाड़ी देशों, अमेरिका और इजरायल को चेतावनी देते हुए कहा, “हम अगले संघर्ष को अस्तित्व का खतरा मानते हैं. इस बार हमारी रणनीति हर सीमा रेखा तोड़ देगी. समय और स्थान हमारे लिए मायने नहीं रखेंगे. यु्द्ध हुआ तो अंडरवाटर केबल, डेटा सेंटर, AI सेंटर पहले टारगेट होंगे.”ईरान की तैयारियां कैसी हैं. इसका ट्रेलर भी IRGC ने जारी किया है. फरवरी में युद्ध शुरू होने के बाद पहली बार ईरान ने अपनी प्रोडक्शन लाइनें दिखाई हैं. दावा है ईरान में 24X7 ड्रोन निर्माण जारी है. ईरान की तैयारियों से अरब में भय है. इसीलिए अरब के देश ईरान के साथ सीक्रेट समझौते की प्लानिंग कर रहे हैं. इसके संकेत तुर्किये में हुई बैठक से मिलते हैं.इस्तांबुल में तुर्किये, मिस्र, पाकिस्तान, सऊदी अरब के विदेश मंत्रियों की बैठक हुई. जिसमें यूरोपीय देश ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी के विदेश मंत्री भी शामिल हुए. इस बैठक का एजेंडा सैन्य टकराव से बचना और कूटनीतिक विकल्प तलाशना था. रिपोर्ट्स की मानें तो बैठक में Non-Aggression Pact पर भी चर्चा हुई जिसे GCC की बैठक में कतर ने पेश किया था.खाड़ी देशों में अपने-अपने स्तर पर नॉन-एग्रेशन पैक्ट पर मंथन जारी है. इसका मकसद ईरान और खाड़ी देशों के बीच अविश्वास को खत्म कर सुरक्षा गारंटियों के लिए एक औपचारिक समझौता करना है. इस समझौते में कोई भी देश दूसरे देश की जमीन पर मिसाइल, ड्रोन या हवाई हमला नहीं करेगा. कतर ने इसी हफ्ते हुई GCC की बैठक में इसका प्रस्ताव रखा था.कतर ने GCC देशों से अपील करते हुए कहा था खाड़ी की सुरक्षा के लिए जरूरी है सभी देश इस पैक्ट पर हस्ताक्षर करें. ये प्रस्ताव भले कतर ने रखा है. लेकिन रिपोर्ट्स हैं कि सऊदी अरब ने पर्दे के पीछे से इस प्रस्ताव की नींव रखी है.प्रिंस सलमान को अब अमेरिकी सेना पर भरोसा नहीं है. यही वजह है कि वो खाड़ी और यूरोपीय सहयोगियों के साथ इस समझौते पर चर्चा कर रहा है. अरब से आती रिपोर्ट्स इशारा करती हैं कि UAE, बहरीन, कुवैत और ओमान नॉन-एग्रेशन पैक्ट के पक्ष में हैं. अगर ईरान के डर से समझौता हुआ तो तेहरान अरब की सबसे बड़ी शक्ति के तौर पर स्थापित हो जाएगा.इजराइल से आती रिपोर्ट्स भी इस तरफ इशारा करती है. इजराइली अखबार हारेत्ज की रिपोर्ट में दावा है, “युद्ध हुआ तो अरब देश ईरान के साथ समझौते के लिए मजबूर होंगे. जिसकी वजह अमेरिका में घटता भरोसा है. वो ईरान के साथ कोई सुरक्षा समझौता कर सकते हैं.”साफ है कि अमेरिका साख की जंग लड़ रहा है. खाड़ी मुल्क इससे वाकिफ हैं. अब डर है अगर अपनी सुरक्षा के लिए उन्होंने ईरान से समझौता किया तो ये डील मुज्तबा को अरब के खलीफा के तौर पर स्थापित कर सकती है, जो ट्रंप की सबसे बड़ी हार होगी.
