ईरान-अमेरिका में फिर तनाव!क्या छिड़ेगी एक और जंग?

 ईरान-अमेरिका में फिर तनाव!क्या छिड़ेगी एक और जंग?
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ईरान को लेकर धमकी के बाद दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ गया है. ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने ट्रंप को जवाब देते हुए कहा कि पिछली बार अमेरिका ने ईरान के खिलाफ कार्रवाई की थी, लेकिन ईरान पहले से ज्यादा मजबूत होकर उभरा. उन्होंने अमेरिका को दोबारा सैन्य टकराव की चुनौती दी और कहा कि ईरान के भी कुछ अधूरे काम बाकी हैं.अराघची ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, पिछली बार जब आपने काम खत्म करने की कोशिश की थी, तब ईरान और मजबूत होकर उभरा था. क्या आप दोबारा अपनी किस्मत आजमाना चाहते हैं? आपका स्वागत है. लेकिन सावधान रहिए, हमारे भी कुछ अधूरे काम हैं.ईरानी विदेश मंत्री ने इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू पर भी आरोप लगाए. उन्होंने कहा कि नेतन्याहू अपने खिलाफ इजराइल में कानूनी कार्रवाई से बचने के लिए अमेरिका को एक और युद्ध में धकेल रहे हैं. अराघची ने चेतावनी दी कि इसके गंभीर नतीजे इजराइल के साथ-साथ ट्रंप को भी भुगतने पड़ सकते हैं.

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अराघची का यह बयान ट्रंप के उस संदेश के बाद आया, जिसमें उन्होंने 27 अक्टूबर को होने वाले इजराइल के संसदीय चुनाव से पहले नेतन्याहू का खुलकर समर्थन किया था. ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर इजराइल के लोगों को संबोधित किया. उन्होंने नेतन्याहू को महान योद्धा प्रधानमंत्री और शांति के लिए बड़ा सहयोगी बताया.ट्रंप ने ईरान पर कई दशकों से इजराइल और अमेरिका को धमकाने का आरोप लगाया. उन्होंने ईरान के नारों इजराइल की मौत और अमेरिका की मौत का जिक्र करते हुए कहा कि तेहरान भविष्य में इन धमकियों को सच कर सकता है. ट्रंप ने दावा किया कि ईरान की सैन्य ताकत और आर्थिक स्थिति को काफी कमजोर कर दिया गया है. उन्होंने चेतावनी दी कि अगर ईरान ने जल्द अपना रुख नहीं बदला, तो अमेरिका जल्द ही अपना काम पूरा कर देगा.ट्रंप ने इजराइल के मतदाताओं से नेतन्याहू के अलावा किसी दूसरे नेता को नहीं चुनने की अपील की. उन्होंने कहा कि अगर इजराइल ने गलत नेता चुना, तो अमेरिका को खुद यह काम करना पड़ेगा. हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि वह ऐसा नहीं करना चाहते. ट्रंप ने नेतन्याहू के दोबारा प्रधानमंत्री बनने का पूरा समर्थन किया.इस बयानबाजी से अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव फिर सामने आया है. अराघची ने ट्रंप की धमकी को एक और युद्ध की आशंका से जोड़ा और कहा कि ईरान सैन्य कार्रवाई की नई धमकियों से डरने वाला नहीं है।इजराइल के कुछ एक्सपर्ट्स का मानना है कि अमेरिका की डेमोक्रेटिक पार्टी में इजराइल के लिए समर्थन घटने की एक वजह नेतन्याहू के पुराने फैसले हैं. पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा और जो बाइडेन के साथ उनके संबंध तनावपूर्ण रहे. एक्सपर्ट्स के मुताबिक, नेतन्याहू ने अमेरिकी राष्ट्रपतियों के सामने मजबूती दिखाने को अपनी चुनावी रणनीति का हिस्सा बनाया.चुनाव में उनके प्रमुख प्रतिद्वंद्वी गादी आइजेनकोट ने सुरक्षा नीति को चुनाव से पहले की राजनीतिक कवायद बताया. पूर्व सैन्य प्रमुख ने कहा कि इजराइल की सबसे बड़ी नाकामी और त्रासदी के तीन साल बाद भी युद्ध के सभी मोर्चे खुले हैं. इसके बावजूद नेतन्याहू ने सिर्फ दो पन्नों का दस्तावेज पेश किया, जिसमें नारे हैं, लेकिन सुरक्षा से जुड़े असली सवालों के जवाब नहीं हैं. आइजेनकोट ने आरोप लगाया कि नेतन्याहू चुनाव से पहले लोगों को डरा रहे हैं और अपने अभियान से जुड़े विवादों से ध्यान हटाने की कोशिश कर रहे हैं. नेतन्याहू इजराइल के सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री रहने वाले नेता हैं।

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