इस मंत्र और आरती के साथ आज करें मां सिद्धिदात्री की पूजा,जानें हवन मंत्र और विधि

 इस मंत्र और आरती के साथ आज करें मां सिद्धिदात्री की पूजा,जानें हवन मंत्र और विधि
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आज (सोमवार, 19 अक्टूबर) नवरात्रि के नौवें दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा करें। माना जाता है कि सिद्धिदात्री भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करती हैं। देवी पुराण के अनुसार भगवान शिव को सिद्धिदात्री ने ही सभी सिद्धियां दी थीं। देवी लाल वस्त्र धारण करती हैं, इसलिए इनकी पूजा में लाल कपड़े पहनना चाहिए। सुबह स्नान के बाद घर के मंदिर में देवी की पूजा और व्रत करने का संकल्प लें। देवी को खीर-पूरी, हलवा, चना और मौसमी फलों का भोग लगाना चाहिए। पूजा के बाद दिनभर व्रत रखें। देवी के मंत्रों का जप करें। आज छोटी कन्याओं का भी पूजन करना चाहिए और उन्हें खाना खिलाने के बाद दक्षिणा भी देनी चाहिए।

मां सिद्धिदात्री का ध्यान मंत्र:

वन्दे वाञ्छित मनोरथार्थ चन्द्रार्धकृतशेखराम्।
कमलस्थिताम् चतुर्भुजा सिद्धीदात्री यशस्विनीम्॥
स्वर्णवर्णा निर्वाणचक्र स्थिताम् नवम् दुर्गा त्रिनेत्राम् ।
शङ्ख, चक्र, गदा, पद्मधरां सिद्धीदात्री भजेम्॥
पटाम्बर परिधानां मृदुहास्या नानालङ्कार भूषिताम्।
मञ्जीर, हार, केयूर, किङ्किणि रत्नकुण्डल मण्डिताम्।।
प्रफुल्ल वन्दना पल्लवाधरां कान्त कपोला पीन पयोधराम्।
कमनीयां लावण्यां श्रीणकटिं निम्ननाभि नितम्बनीम् ॥
सिद्धगंधर्वयक्षाद्यैरसुरैरमरैरपि।
सेव्यमाना यदा भूयात् सिद्धिदा सिद्धिदायनी॥
या देवी सर्वभूतेषु माँ सिद्धिदात्री रूपेण संस्थिता, नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:
ॐ देवी महागौर्यै नमः
ह्रीं क्लीं ऐं सिद्धये नम:

सिद्धिदात्री माता की कथा:

धार्मिक मान्यता है कि असुरों के अत्याचारों से परेशान होकर जब सभी देवता भगवान शिव और भगवान विष्णु के पास पहुंचे, तब तीनों देवताओं के तेज से एक दिव्य शक्ति की उत्पत्ति हुई, जिसे माता सिद्धिदात्री के रूप में जाना गया. पौराणिक कथा के अनुसार, भगवान शिव ने भी मां सिद्धिदात्री की कठोर तपस्या की और उनकी कृपा से ही उन्हें सभी प्रकार की सिद्धियां प्राप्त हुईं.ऐसा माना जाता है कि माता सिद्धिदात्री की कृपा से ही भगवान शिव का आधा शरीर देवी का हो गया और वे ‘अर्धनारीश्वर’ कहलाए. मां सिद्धिदात्री को सिद्धियों की दाता कहा जाता है. माता सिद्धिदात्री अपने भक्तों को ‘अणिमा, महिमा, गरिमा, लघिमा, प्राप्ति, प्रकाम्य, ईशित्व और वशित्व’ जैसी आठ प्रकार की सिद्धियां प्रदान करती हैं. नवरात्रि के नौवें दिन (महानवमी) पर माता सिद्धिदात्री की पूजा के साथ नवरात्रि व्रत का पूर्ण फल मिलता है।माता सिद्धिदात्री चार भुजाओं वाली हैं, वे कमल पुष्प पर आसीन होती हैं और उनका वाहन सिंह है. धार्मिक मान्यता है कि मां सिद्धिदात्री की पूजा से भक्तों को लौकिक और पारलौकिक मनोकामनाओं की पूर्ति होती है और व्यक्ति संसार से निर्लिप्त रहकर मोक्ष प्राप्त कर सकते हैं. इनकी पूजा करने से भक्तों को ब्रह्मांड पर जीत हासिल करने का साहस मिलता है और वे सांसारिक दुखों से मुक्त होकर मोक्ष को प्राप्त करते हैं।

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सिद्धिदात्री माता की आरती:

जय सिद्धिदात्री तू सिद्धि की दाता
तू भक्तों की रक्षक तू दासों की माता,
तेरा नाम लेते ही मिलती है सिद्धि
तेरे नाम से मन की होती है शुद्धि
कठिन काम सिद्ध कराती हो तुम
हाथ सेवक के सर धरती हो तुम,
तेरी पूजा में न कोई विधि है
तू जगदंबे दाती तू सर्वसिद्धि है
रविवार को तेरा सुमरिन करे जो
तेरी मूर्ति को ही मन में धरे जो,
तू सब काज उसके कराती हो पूरे
कभी काम उस के रहे न अधूरे
तुम्हारी दया और तुम्हारी यह माया
रखे जिसके सर पैर मैया अपनी छाया,
सर्व सिद्धि दाती वो है भाग्यशाली
जो है तेरे दर का ही अम्बे सवाली
हिमाचल है पर्वत जहां वास तेरा
महानंदा मंदिर में है वास तेरा,
मुझे आसरा है तुम्हारा ही माता
वंदना है सवाली तू जिसकी दाता..

हवन के लिए पहले सभी सामग्री तैयार कर लें। इसके बाद संकल्प लेकर अग्नि प्रज्वलित करें और नीचे दिए गए मंत्रों के साथ आहुति दें।हवन कुंड, आम की लकड़ी, कपूर, घी, हवन सामग्री, जौ, काले तिल, अक्षत, चंदन, लौंग, इलायची, गुग्गुल, कमल गट्टा, लाल फूल, नारियल और पूर्णाहुति के लिए सामग्री रखें। पूजा के लिए जल, रोली, मौली, धूप, दीपक, फल और मिठाई भी रख लें।सबसे पहले स्नान करके साफ कपड़े पहनें। पूजा स्थल पर मां दुर्गा की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें। दीपक जलाएं और हाथ में जल, अक्षत तथा फूल लेकर संकल्प करें। अगर एक ही व्यक्ति हवन कर रहा है तो हवन सामग्री में घी मिलाकर आहुति दें। वरना एक आदमी घी अर्पित करे और बाकी सभी हवन सामग्री डालते रहें।इसके बाद कुश के आसन पर बैठें. फिर हवन कुंड में बेल, चंदन, आम, पीपल और नीम की सूखी लकड़ियों को कपूर और उप्पलों की मदद से जलाएं. हवन की अग्नि प्रज्वलित होने के बाद मंत्र पढ़ते हुए हवन सामग्री से आहुति देना शुरू करें.हवन के समापन के समय सूखे नारियल में कलावा लपेट दें. उसके ऊपर वाले हिस्से पर पूड़ी, खीर, पान का पत्ता, फल, सुपरी, लौंग, मिठाई आदि रख दें. उसे हवन कुंड के बीचोबीच स्थापित करें. फिर मां दुर्गा की आरती करें. आरती के दीपक को पूरे घर में लेकर जाएं. फिर उस दीपक को शांत करके एक स्थान पर रख दें. कोशिश करें की पूरी हवन सामग्री सही से जल जाए।

संकल्प मंत्र


ॐ विष्णुर्विष्णुर्विष्णुः।

इसके बाद मां दुर्गा का ध्यान करें और कहें कि आप परिवार की सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य, शांति और कल्याण की कामना से हवन कर रहे हैं। हाथ में लिया हुआ जल जमीन पर छोड़ दें।

  1. अग्नि प्रज्वलित करें और शुरुआती आहुतियां दें
    हवन कुंड में लकड़ियां रखें और कपूर की मदद से अग्नि प्रज्वलित करें। इसके बाद अग्नि देव का ध्यान करके घी अर्पित करें।

अग्नि मंत्र


ॐ अग्नये नमः।

ॐ अग्निं दूतं पुरोदधे हव्यवाहमुपब्रुवे।

देवाँ आ सादयादिह॥

अब नीचे दिए गए मंत्रों से आहुति दें।

ॐ प्रजापतये स्वाहा।

ॐ इन्द्राय स्वाहा।

ॐ अग्नये स्वाहा।

ॐ सोमाय स्वाहा।

ॐ भूः स्वाहा।

ॐ भुवः स्वाहा।

ॐ स्वः स्वाहा।

हर मंत्र के अंत में थोड़ी हवन सामग्री या घी अग्नि में अर्पित करें।

  1. गणेश जी को आहुति दें
    हवन में सबसे पहले भगवान गणेश का स्मरण करें। घी या हवन सामग्री अर्पित करते हुए मंत्र बोलें।

गणेश मंत्र
ॐ गं गणपतये नमः स्वाहा॥

  1. नवग्रहों के मंत्रों से आहुति दें
    अब सूर्य, चंद्रमा, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु और केतु का स्मरण करें। हर मंत्र के बाद आहुति दें।

ॐ सूर्याय स्वाहा।

ॐ सोमाय स्वाहा।

ॐ मंगलाय स्वाहा।

ॐ बुधाय स्वाहा।

ॐ बृहस्पतये स्वाहा।

ॐ शुक्राय स्वाहा।

ॐ शनैश्चराय स्वाहा।

ॐ राहवे स्वाहा।

ॐ केतवे स्वाहा।

  1. नवदुर्गा के मंत्रों से आहुति दें
    अब मां दुर्गा के नौ स्वरूपों का ध्यान करें। हर मंत्र के साथ हवन सामग्री अर्पित करें।

ॐ देवी शैलपुत्र्यै स्वाहा॥

ॐ देवी ब्रह्मचारिण्यै स्वाहा॥

ॐ देवी चन्द्रघण्टायै स्वाहा॥

ॐ देवी कूष्माण्डायै स्वाहा॥

ॐ देवी स्कन्दमातायै स्वाहा॥

ॐ देवी कात्यायन्यै स्वाहा॥

ॐ देवी कालरात्र्यै स्वाहा॥

ॐ देवी महागौर्यै स्वाहा॥

ॐ देवी सिद्धिदात्र्यै स्वाहा॥

  1. मां दुर्गा के नवार्ण मंत्र से 108 आहुति दें
    अब मां दुर्गा के नवार्ण मंत्र से 108 बार आहुति दें। हर बार मंत्र बोलकर हवन सामग्री और थोड़ा घी अग्नि में अर्पित करें।

नवार्ण मंत्र
ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे स्वाहा॥

  1. दुर्गा गायत्री मंत्र से आहुति दें
    अब दुर्गा गायत्री मंत्र का जाप करें। हर बार मंत्र के अंत में स्वाहा बोलकर आहुति दें।

दुर्गा गायत्री मंत्र
ॐ कात्यायनाय विद्महे कन्यकुमारि धीमहि।

तन्नो दुर्गिः प्रचोदयात् स्वाहा॥

  1. मां दुर्गा की स्तुति के मंत्र
    अब मां दुर्गा की स्तुति करें। नीचे दिए गए मंत्रों का पाठ करते हुए हवन सामग्री अर्पित करें।

सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके।

शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते॥

शरणागत मंत्र
शरणागतदीनार्तपरित्राणपरायणे।

सर्वस्यार्तिहरे देवि नारायणि नमोऽस्तु ते॥

सृष्टि और पालन की स्तुति
सृष्टिस्थितिविनाशानां शक्तिभूते सनातनि।

गुणाश्रये गुणमये नारायणि नमोऽस्तु ते॥

रोग और बाधा से रक्षा की प्रार्थना
रोगानशेषानपहंसि तुष्टा

रुष्टा तु कामान् सकलानभीष्टान्।

त्वामाश्रितानां न विपन्नराणां

त्वामाश्रिता ह्याश्रयतां प्रयान्ति॥

  1. इन मंत्रों से भी दें आहुति
    अब दुर्गा सप्तशती में वर्णित ‘या देवी सर्वभूतेषु’ स्तुति का पाठ करें।

या देवी सर्वभूतेषु विष्णुमायेति शब्दिता।

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

या देवी सर्वभूतेषु चेतनेत्यभिधीयते।

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

या देवी सर्वभूतेषु बुद्धिरूपेण संस्थिता।

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

या देवी सर्वभूतेषु निद्रारूपेण संस्थिता।

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

या देवी सर्वभूतेषु क्षुधारूपेण संस्थिता।

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

या देवी सर्वभूतेषु छायारूपेण संस्थिता।

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता।

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

या देवी सर्वभूतेषु तृष्णारूपेण संस्थिता।

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

या देवी सर्वभूतेषु क्षान्तिरूपेण संस्थिता।

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

या देवी सर्वभूतेषु जातिरूपेण संस्थिता।

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

या देवी सर्वभूतेषु लज्जारूपेण संस्थिता।

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

या देवी सर्वभूतेषु शान्तिरूपेण संस्थिता।

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

या देवी सर्वभूतेषु श्रद्धारूपेण संस्थिता।

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

या देवी सर्वभूतेषु कान्तिरूपेण संस्थिता।

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

या देवी सर्वभूतेषु लक्ष्मीरूपेण संस्थिता।

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

या देवी सर्वभूतेषु वृत्तिरूपेण संस्थिता।

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

या देवी सर्वभूतेषु स्मृतिरूपेण संस्थिता।

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

या देवी सर्वभूतेषु दयारूपेण संस्थिता।

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

या देवी सर्वभूतेषु तुष्टिरूपेण संस्थिता।

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

या देवी सर्वभूतेषु मातृरूपेण संस्थिता।

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

या देवी सर्वभूतेषु भ्रान्तिरूपेण संस्थिता।

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

इन्द्रियाणामधिष्ठात्री भूतानां चाखिलेषु या।

भूतेषु सततं तस्यै व्याप्तिदेव्यै नमो नमः॥

चितिरूपेण या कृत्स्नमेतद्व्याप्य स्थिता जगत्।

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

  1. महामृत्युंजय मंत्र से 11 आहुति दें
    अब भगवान शिव का ध्यान करें और महामृत्युंजय मंत्र से 11 बार आहुति दें।

ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।

उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात् स्वाहा॥

  1. गुरु वंदना करें
    अब अपने गुरु और इष्ट देव का स्मरण करें। गुरु वंदना के लिए यह मंत्र बोलें।

गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्वरः।

गुरुः साक्षात् परब्रह्म तस्मै श्रीगुरवे नमः॥

अब 21 बार गायत्री मंत्र का जाप करते हुए आहुति दें। गायत्री मंत्र इस प्रकार है-

ॐ भूर्भुव: स्व: तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो न: प्रचोदयात्। स्वाहा (21 बार)

शारदीय नवरात्रि हवन मंत्र-

ओम आग्नेय नम: स्वाहा, ओम गणेशाय नम: स्वाहा, ओम गौरियाय नम: स्वाहा, ओम नवग्रहाय नम: स्वाहा, ओम दुर्गाय नम: स्वाहा, ओम महाकालिकाय नम: स्वाहा, ओम हनुमते नम: स्वाहा, ओम भैरवाय नम: स्वाहा, ओम कुल देवताय नम: स्वाहा, ओम स्थान देवताय नम: स्वाहा, ओम ब्रह्माय नम: स्वाहा, ओम विष्णुवे नम: स्वाहा, ओम शिवाय नम: स्वाहा.

ओम जयंती मंगलाकाली, भद्रकाली कपालिनी दुर्गा क्षमा शिवाधात्री स्वाहा स्वधा नमस्तुति स्वाहा.ओम ब्रह्मा मुरारी त्रिपुरांतकारी भानु: शशि भूमि सुतो बुधश्च: गुरुश्च शुक्र शनि राहु केतव सर्वे ग्रहा शांति करा भवंतु स्वाहा.ओम गुरुर्ब्रह्मा, गुरुर्विष्णु, गुरुर्देवा महेश्वर: गुरु साक्षात् परब्रह्मा तस्मै श्री गुरुवे नम: स्वाहा.ओम शरणागत दीनार्त परित्राण परायणे, सर्व स्थार्ति हरे देवि नारायणी नमस्तुते.ओम पूर्णमद: पूर्णमिदम् पुर्णात पूण्य मुदच्यते, पुणस्य पूर्णमादाय पूर्णमेल विसिस्यते स्वाहा.

  1. पूर्णाहुति मंत्र और विधि
    अब घी, हवन सामग्री, जौ, तिल और नारियल को पूर्णाहुति की सामग्री के रूप में एक साथ लें। मां दुर्गा का ध्यान करते हुए पूर्णाहुति अर्पित करें।

पूर्णाहुति मंत्र


ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात् पूर्णमुदच्यते।

पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते॥

ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः॥

पूर्णाहुति के बाद मां दुर्गा की आरती करें। हाथ जोड़कर पूजा में हुई भूलों के लिए क्षमा मांगें और परिवार की सुख-शांति की प्रार्थना करें। इसके बाद प्रसाद बांटें। हवन में घी और सामग्री थोड़ी-थोड़ी मात्रा में डालें। बच्चों को अग्नि से दूर रखें और हवन कुंड को सुरक्षित स्थान पर रखें। अग्नि पूरी तरह बुझने तक उसे अकेला न छोड़ें।

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