सरकार का बड़ा फैसला!गन्ने से एथेनॉल बनाने पर रोक,सस्ती होगी चीनी?

 सरकार का बड़ा फैसला!गन्ने से एथेनॉल बनाने पर रोक,सस्ती होगी चीनी?
Sharing Is Caring:

त्योहारी सीजन से पहले चीनी की बढ़ती कीमतों पर लगाम लगाने के लिए सरकार ने बड़ा फैसला लिया है. इस बार कमजोर मानसून के कारण गन्ने की पैदावार घटने की आशंका है. ऐसे में सरकार ने 1 नवंबर 2026 से चीनी और गन्ने से बनने वाले कुछ तरह के एथेनॉल की खरीद रोकने का फैसला किया है. इसका मकसद चीनी की ज्यादा उपलब्धता बनाए रखना और कीमतों को काबू में रखना है.सरकारी तेल कंपनियों ने नए सप्लाई वर्ष 2026-27 के लिए करीब 11 अरब लीटर एथेनॉल खरीदने का टेंडर जारी किया है. इसमें गन्ने के रस, चीनी, चीनी की चाशनी और B-Heavy मोलासेस से बने एथेनॉल के लिए बोली नहीं मांगी गई है.इस टेंडर को इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम, हिंदुस्तान पेट्रोलियम, नुमालीगढ़ रिफाइनरी और मैंगलोर रिफाइनरी एंड पेट्रोकेमिकल्स ने मिलकर जारी किया है.भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा चीनी उत्पादक देश है और यहां चीनी की खपत भी काफी ज्यादा है. इस बार कमजोर मानसून के कारण गन्ने की पैदावार पिछले साल के मुकाबले कम रहने की आशंका है.

1000882634

अल नीनो का असर भी मानसून पर पड़ा है. एक दशक से ज्यादा समय में इस बार मानसून सबसे कमजोर रहा है.महाराष्ट्र और कर्नाटक में कम बारिश के कारण गन्ने की पैदावार को लेकर चिंता बढ़ी है. इसी वजह से सरकार चीनी का उत्पादन बढ़ाने और कीमतों को काबू में रखने की कोशिश कर रही है.सरकार ने चीनी से बने एथेनॉल की खरीद रोकने का फैसला किया है, लेकिन दूसरे स्रोतों से बनने वाले एथेनॉल की खरीद जारी रहेगी. कंपनियां मक्का, टूटे चावल, भारतीय खाद्य निगम (FCI) के पास मौजूद अतिरिक्त चावल, खराब अनाज और C-Heavy मोलासेस से बने एथेनॉल की सप्लाई के लिए बोली लगा सकती हैं.मक्का से बनने वाले एथेनॉल की खरीद कीमत भी घटाई गई है. टेंडर के मुताबिक, इसकी कीमत 71.86 रुपये से घटाकर 68.86 रुपये प्रति लीटर कर दी गई है. इसके लिए मिलने वाला अतिरिक्त प्रोत्साहन भी 5.79 रुपये से घटाकर 2.79 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है।सरकार ने चीनी मिलों को अक्टूबर 2026 में बनाई गई चीनी को अक्टूबर और नवंबर में बेचने की अनुमति दी है. मिलें इसे अपने नियमित मासिक बिक्री कोटे से अतिरिक्त बेच सकती हैं.उदाहरण के लिए,अगर किसी मिल ने अक्टूबर में 1,000 मीट्रिक टन चीनी बनाई है, तो वह इस पूरी मात्रा को अक्टूबर और नवंबर में नियमित कोटे के अलावा बेच सकती है. इससे बाजार में चीनी की उपलब्धता बढ़ाने में मदद मिल सकती है.भारत पेट्रोल में एथेनॉल मिलाकर कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता घटाने की कोशिश कर रहा है. सरकार ने पेट्रोल में 20% एथेनॉल मिलाने का लक्ष्य तय समय से पांच साल पहले ही 2025 में हासिल कर लिया था. इस साल E20 को देशभर में अनिवार्य भी किया गया.हालांकि, अब सरकार के सामने चीनी की सप्लाई बनाए रखने और तेल आयात घटाने, दोनों के बीच संतुलन बनाने की चुनौती है. चीनी की कमी और बढ़ती कीमतों के बीच गन्ने से एथेनॉल बनाने पर रोक भी इसी वजह से लगाया गया है. वहीं, E20 पेट्रोल से पुरानी गाड़ियों को नुकसान होने की आशंका को लेकर कुछ वाहन मालिकों ने चिंता भी जताई है।

Comments
Sharing Is Caring:

Related post