शारदीय नवरात्रि का आज है सातवां दिन,इस मंत्र और आरती के साथ करें मां कालरात्रि की पूजा

 शारदीय नवरात्रि का आज है सातवां दिन,इस मंत्र और आरती के साथ करें मां कालरात्रि की पूजा
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शारदीय नवरात्रि चल रहे हैं और इनका समापन 19 अक्टूबर को होगा. आज शनिवार, 17 अक्टूबर को नवरात्रि का सातवां दिन है. शारदीय या चैत्र नवरात्रि के सातवें दिन कालरात्रि माता की पूजा की जाती है.मां कालरात्रि हिंदू धर्म में देवी दुर्गा का सातवां और सबसे रौद्र स्वरूप हैं. इन्हें शुभंकरी भी कहा जाता है क्योंकि ये हमेशा अपने भक्तों का कल्याण करती हैं और उन्हें शुभ फल प्रदान करती हैं. इस दिन लोग विधि-विधान से देवी की उपासना करते हैं.

मां कालरात्रि का स्वरूप:

कालरात्रि माता का वर्ण अंधकार की तरह काला है, बाल बिखरे हुए हैं और गले में विद्युत की तरह चमकने वाली माला है. माता कालरात्रि का वाहन गधा (खर) है. ये चतुर्भुजा हैं. इनके ऊपर वाले दाहिने हाथ में वरमुद्रा और नीचे वाले हाथ में अभयमुद्रा होती है. बाईं तरफ के ऊपर वाले हाथ में लोहे का कांटा और नीचे वाले हाथ में खड़ग (कटार) होती है. इनकी साधना मुख्य रूप से सहस्रार चक्र या भानु चक्र (मध्य ललाट) में की जाती है।

प्रिय भोग: माता को गुड़, गुड़ से बनी मिठाई (जैसे मालपुआ) का भोग लगाया जाता है.
शुभ रंग: इस दिन नीला, बैंगनी या ग्रे (धूसर) रंग के वस्त्र पहनना शुभ माना जाता है.
पूजा का फल: इनकी उपासना से अकाल मृत्यु का भय, रोग, शोक, शत्रुओं और नकारात्मक शक्तियों का नाश होता है.
प्रिय फूल: इन्हें रात में खिलने वाली चमेली, रातरानी, नीले फूल या गुड़हल अर्पित किए जाते हैं।

कालरात्रि माता का मंत्र:

सामान्य मंत्र: ॐ देवी कालरात्राय नमः
बीज मंत्र: ॐ ऐं ह्रीं क्लीं कालरात्र्यै नमः
मां कालरात्रि की पूजा कैसे करें?
नवरात्रि की सप्तमी तिथि पर मां कालरात्रि की विधिपूर्वक पूजा की जाती है और उनकी पूजन विधि नीचे बताई गई है:-
सुबह या रात के समय साफ सुथरे गहरे लाल या नीले रंग के कपड़े पहनें.
मंदिर या पूजा स्थल को धोएं या फिर गंगाजल छिड़ककर पवित्र करें.
लकड़ी की चौकी पर लाल रंग का आसन बिछाकर मां कालरात्रि की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें.
मां कालरात्रि के सामने घी का दीपक और धूप बत्ती जलाएं.
मां को रोली, अक्षत, कुमकुम और चंदन का लेप लगाएं.
मां कालरात्रि को लाल फूल, गुड़हल का फूल या रातरानी का फूल अर्पित करें.
भोग में उन्हें गुड़ या गुड़ से बनी मिठाइयां अर्पित करनी चाहिए.
पूजा को दौरान दुर्गा सप्तशती, दुर्गा चालीसा का पाठ करें और मां के मंत्रों का जाप करें.
अंत में घी के दीपक या कपूर से मां कालरात्रि की आरती करें।

नवरात्रि के सातवें दिन का मंत्र:

  1. ॐ देवी कालरात्र्यै नमः॥
  2. जय त्वं देवि चामुण्डे जय भूतार्ति हारिणि।
    जय सार्वगते देवि कालरात्रि नमोऽस्तु ते॥

मां कालरात्रि माता की आरती:

कालरात्रि जय जय महाकाली
काल के मुंह से बचाने वाली
दुष्ट संहारिणी नाम तुम्हारा
महा चंडी तेरा अवतारा
पृथ्वी और आकाश पर सारा
महाकाली है तेरा पसारा
खंडा खप्पर रखने वाली
दुष्टों का लहू चखने वाली
कलकत्ता स्थान तुम्हारा
सब जगह देखूं तेरा नजारा
सभी देवता सब नर नारी
गावे स्तुति सभी तुम्हारी
रक्तदंता और अन्नपूर्णा
कृपा करे तो कोई भी दुःख ना
ना कोई चिंता रहे ना बीमारी
ना कोई गम ना संकट भारी
उस पर कभी कष्ट ना आवे
महाकाली मां जिसे बचावे
तू भी ‘भक्त’ प्रेम से कह
कालरात्रि मां तेरी जय.

नवरात्रि के सातवें दिन की व्रत कथा:

नवरात्रि के सातवें दिन की कथा देवी कालरात्रि से जुड़ी है, जिन्होंने रक्तबीज नामक राक्षस का वध किया था. माता कालरात्रि की पौराणिक कथा के अनुसार,असुरों के राजा शुंभ और निशुंभ के शक्तिशाली साथी रक्तबीज को एक वरदान प्राप्त था कि उसके रक्त की एक भी बूंद जमीन पर गिरने से उसी का एक और रूप जन्म लेगा. ऐसे में रक्त की एक बूंद भी जमीन पर गिरने से उसके जैसे कई और दैत्य पैदा हो जाते थे. जब रक्तबीज के इस अजेय रूप ने देवी-देवताओं को परेशान किया, तो उन्होंने मां दुर्गा से प्रार्थना की.तब मां दुर्गा ने क्रोधित होकर अपने तेज से देवी कालरात्रि को उत्पन्न किया, जिनकी सांस से आग निकलती थी और जिनका रूप अत्यंत भयंकर था. मां कालरात्रि ने युद्ध में रक्तबीज के शरीर से निकलने वाले रक्त को जमीन पर गिरने से पहले ही अपने मुख में भर लिया. ऐसे में रक्तबीज की एक भी बूंद जमीन पर नहीं गिरी और इस तरह सभी रक्तबीजों का अंत हो गया. इसके बाद मां कालरात्रि ने रक्तबीज के साथ-साथ चंड, मुंड और शुंभ-निशुंभ जैसे राक्षसों का भी वध किया था और तीनों लोकों में शांति की स्थापना की।

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