दलितों की बात करने वाले राहुल गांधी की बढ़ी मुश्किलें,अनुसूचित जाति के खिलाफ कर दी टिप्पणी!

 दलितों की बात करने वाले राहुल गांधी की बढ़ी मुश्किलें,अनुसूचित जाति के खिलाफ कर दी टिप्पणी!
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उत्तराखंड के हल्द्वानी के रामलीला मैदान में हुए शुद्धिकरण मामले में अब नया मोड़ आ गया है. श्रीराम सेना धर्मार्थ सेवा न्यास की ओर से राहुल गांधी के खिलाफ दी गई तहरीर पर पुलिस ने केस दर्ज कर लिया है. तहरीर देने वालों में विनोद आर्य और अमित कुमार शामिल हैं. दोनों ही रामलीला मैदान में शुद्धिकरण करने वाले न्यास के सदस्य बताए जा रहे हैं.शुद्धिकरण कार्यक्रम करने वाले श्री राम सेना धर्मार्थ सेवा न्यास के सदस्य विनोद आर्य ने कहा, “तहरीर ये दी है कि राहुल गांधी जो आरोप लगा रहे हैं कि किसी व्यक्ति विशेष को लेकर हमने शुद्धिकरण किया लेकिन ऐसा नहीं है. वह भगवान राम का दरबार है और हमने केवल साफ-सफाई की. इसे राहुल गांधी क्या एंगल दे रहे हैं, ये तो वे ही बता सकते हैं.”विनोद आर्य ने कहा, “राहुल गांधी मांग कर रहे हैं कि हम पर मुकदमा किया जाए, FIR की जाए तो हम यही बताने आए हैं कि हम खुद दलित परिवार से हैं और हमने किसी का दिल दुखाने की दिशा में कोई काम नहीं किया. हमने अपने शिकायती पत्र में कहा है कि हमारे द्वारा किसी जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल नहीं किया.

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अगर राहुल गांधी ऐसा कह रहे हैं तो ये गलत है.”तहरीर में अनुसूचित जाति के खिलाफ जातिसूचक शब्दों के इस्तेमाल का आरोप लगाया गया है. शिकायतकर्ताओं ने पुलिस से मामले की जांच कर राहुल गांधी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की है. अब इस मामले में पुलिस की कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं.उत्तराखंड के हल्द्वानी सिटी कोतवाली में लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के खिलाफ FIR दर्ज की गई है. यह FIR BNSS की धारा 196 और 299 के साथ-साथ SC/ST एक्ट, 1989 की धारा 3(1) के तहत दर्ज की गई है. यह मामला अनुसूचित जाति समुदाय के सदस्य अमित कुमार की शिकायत पर दर्ज किया गया, जिन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी की टिप्पणियों से अनुसूचित जाति समुदाय की भावनाएं आहत हुई हैं.हल्द्वानी रामलीला मैदान में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की सभा के बाद हुए कथित शुद्धिकरण को लेकर हल्द्वानी में राजनीतिक घमासान थमने का नाम नहीं ले रहा है. रविवार की शाम कांग्रेस ने इसी मैदान में मौन प्रदर्शन कर विरोध दर्ज कराया. बारिश के बावजूद कांग्रेस नेता और कार्यकर्ता प्रदर्शन स्थल पर डटे रहे और घटना के जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग उठाई.मौन प्रदर्शन के जरिए कांग्रेस ने यह संदेश देने का प्रयास किया कि वह मामले को लेकर पीछे हटने वाली नहीं है. कांग्रेस के मौन प्रदर्शन के बाद आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक टकराव और तेज होने के आसार हैं.जबकि कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के साथ उत्तराखंड के हल्द्वानी में हुई कथित ‘शुद्धिकरण’ की घटना को लेकर राहुल गांधी समेत कांग्रेस नेता भाजपा पर लगातार राजनीतिक हमले कर रहे हैं। इतना ही नहीं इस मामले का जिक्र अभी हाल ही में मोदी सरकार में मंत्री चिराग पासवान भी कर चुके हैं। जब उन्होंने आरक्षण को लेकर बयान दिया था।राहुल गांधी ने कहा था कि राजस्थान में हमारे CLP नेता एक मंदिर जाते हैं, और BJP नेता ‘शुद्धिकरण’ करते हैं।राहुल ने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष खड़गे जी, जिन्होंने अपना पूरा जीवन देश और संविधान को समर्पित कर दिया है, वे हल्द्वानी के रामलीला मैदान में भाषण देने जाते हैं, और उनके जाने के बाद वहां भी शुद्धिकरण हवन किया जाता है। ऐसा कौन करता है?उन्होंने कहा था कि BJP और RSS के लोग हैं। सिर्फ BJP और RSS के सदस्य ही ऐसा करते हैं, और यह एक अपराध है। भारत के संविधान के तहत यह एक अपराध है, एक आपराधिक गतिविधि है। ‘शुद्धिकरण’ असल में छुआछूत का ही दूसरा नाम है। छुआछूत को गैर-कानूनी घोषित किया गया था, फिर भी BJP के सदस्य खुलेआम इसे मानते हैं। जब वे यह शुद्धिकरण करते हैं, तो वे असल में यह कह रहे होते हैं कि दलितों को छूना नहीं चाहिए, दलित अशुद्ध हैं, और भारतीय संविधान के तहत यह एक अपराध है।वहीं, अब इस पूरे मामले पर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का भी बयान सामने आया है। शुद्धिकरण विवाद पर राहुल गांधी के बयान पर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि शुद्धिकरण करने वालों में कोई भी भाजपा कार्यकर्ता नहीं था, लेकिन क्या उत्तराखंड में कोई जानता है कि मल्लिकार्जुन खड़गे की जाति क्या है?धामी ने कहा कि वहां धार्मिक उन्माद के नारे लगाए गए और एक विशेष धर्म के लोगों ने ऐसा किया। इसके जवाब में कुछ धार्मिक संगठनों ने वहां शुद्धिकरण कार्यक्रम आयोजित किया। मुझे लगता है कि कांग्रेस पार्टी के पास कोई मुद्दा नहीं बचा है, इसलिए वे अनावश्यक मुद्दों को आगे बढ़ा रहे हैं। उत्तराखंड में कौन विश्वास करेगा कि यहां जातिगत भेदभाव है? प्रधानमंत्री के नेतृत्व में ‘सबका साथ-सबका विकास-सबका विश्वास’ के मंत्र के साथ काम किया जा रहा है।

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