सांसदो और विधायकों को कितनी मिलती है सैलरी और सुविधा?देख लीजिए पूरी विवरण
तमिलनाडु में विधायकों की सुविधाओं को लेकर बड़ा ऐलान हुआ है. 19 अगस्त 2026 को मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने राज्य के सभी 234 विधायकों के लिए सरकारी वाहन और हर महीने कुल 1 लाख रुपये की सुविधा देने का ऐलान किया है. इसमें 75 हजार रुपये वाहन के रखरखाव से जुड़े खर्च के तौर पर और 25 हजार रुपये कार्यालय सहायक के लिए दी जाएगी.सरकारी दस्तावेजों के मुताबिक पहले तामिलनाडु के विधायको को 75 हजार रुपये वाहन के रखरखाव से जुड़े खर्च के तौर पर और 25 हजार रुपये कार्यालय सहायक के लिए राशि नहीं दी जाती थी. हालांकि30 हजार रुपये मासिक वेतन, 10 हजार रुपये कंपेसटरी अलावेंस, 7,500 रुपये टेलीफोन भत्ता, 25 हजार रुपये निर्वाचन क्षेत्र भत्ता, 2,500 रुपये डाक भत्ता, 5 हजार रुपये कंसोलिडेटेड अलाउंस और 25 हजार रुपये वाहन भत्ता मिलता था.इन मदों का कुल 1.05 लाख रुपये महीना बनता था.अब नई घोषणा में सरकारी कार, उसके रखरखाव के लिए 75 हजार रुपये और सहायक के लिए 25 हजार रुपये की सुविधा जोड़ी गई है. इसका मतलब है विधायकों को कुल भत्ता 2 लाख 5 हजार रुपये मिलेगा. साथ ही में नई कार भी मिलेगी.इसको लेकर विजय ने राज्य विधानसभा में कहा, विधानसभा के सभी सदस्य बिना किसी रुकावट के अपना जन-सेवा का काम कर सकें और अपने निर्वाचन क्षेत्र की जिम्मेदारियां ठीक से निभा सकें.

, इसके लिए सभी विधायकों को सरकारी गाड़ी दी जाएगी. इसके अलावा विधायकों के लिए स्वास्थ्य बीमा कवर को 5 लाख रुपये से बढ़ाकर 25 लाख रुपये कर दिया गया है.एक्सपर्ट्स का कहना है कि तमिलनाडु पर पहले से भारी-भरकम कर्ज है. दो महीने पहले ही विजय सरकार ने व्हाइट पेपर में बताया था कि तमिलनाडु पर 13.18 लाख करोड़ रुपये का कर्ज है. कर्ज बढ़ने के कारण तमिलनाडु के खजाने पर बोझ भी बढ़ रहा है.तमिलनाडु सरकार ने 2021-22 में 41,564 करोड़ रुपये का ब्याज चुकाया था. 2025-26 में यह बढ़कर 67,050 करोड़ रुपये हो गया.अब सरकार का विधायकों के भत्ता बढ़ाने के चलते इसका बोझ भी राज्य के खजाने पर पड़ेगा.भारत में MLA की सैलरी पूरे देश में एक जैसी नहीं है. संविधान के तहत सांसदों के वेतन का प्रावधान संसद करती है, जबकि विधायकों के वेतन और भत्ते संबंधित राज्य विधानसभाएं तय करती हैं. यही वजह है कि अलग-अलग राज्यों में मूल वेतन और भत्तों का ढांचा काफी अलग है.तेलंगाना-2.50 लाखदिल्ली-2.10 लाख के आसपासमध्य प्रदेश-2.10 लाखउत्तर प्रदेश-1.87 लाखबिहार-1.65 लाखमहाराष्ट्र-1.60 लाख से अधिकझारखंड ₹1.51 लाखपंजाब-1.10 लाखतमिलनाडु-1.13 लाख के आसपासगुजरात-1.27 लाखआंध्र प्रदेश-1.25 लाखहिमाचल प्रदेश-1.25 लाखछत्तीसगढ़-1.35 लाखकर्नाटक-63,500केरल-43,750राजस्थान-55,000अलग-अलग राज्य में विधायकों के भत्ते में अंतर क्यों?तेलंगाना में विधायक को मिलने वाला कुल मासिक पैकेज देश में सबसे ज्यादा में से एक है. उपलब्ध 2026 के आंकड़ों में यह करीब 2.50 लाख रुपये बताया गया है. यहां बेसिक सैलरी अपेक्षाकृत कम है, लेकिन अलग.अलग भत्तों की वजह से कुल रकम काफी बढ़ जाती है.यानी किसी विधायक की कमाई समझने के लिए सिर्फ यह देखना कि उसका वेतन कितना है, पर्याप्त नहीं है. निर्वाचन क्षेत्र, यात्रा, कार्यालय, स्टाफ, टेलीफोन, आवास और दूसरे खर्चों के लिए मिलने वाली सुविधाएं भी महत्वपूर्ण हैं. इसलिए अलग-अलग राज्य में विधायकों के भत्ते में अंतर दिखता है.सांसदों के लिए केंद्र सरकार ने अप्रैल 2023 से वेतन और भत्तों में संशोधन किया है. मौजूदा व्यवस्था के तहत सांसद को 1.24 लाख रुपये मासिक वेतन मिलता है. इसके अलावा 87 हजार रुपये निर्वाचन क्षेत्र भत्ता और कार्यालय खर्च के लिए 75 हजार रुपये मिलते हैं. इसमें 50 हजार रुपये कंप्यूटर लिटरेट व्यक्ति/सचिवीय सहायता और 25 हजार रुपये स्टेशनरी आदि के लिए हैं.अन्य मदों को जोड़ें तो रकम 2.86 लाख रुपये होती है. इसके अलावा संसद की कार्यवाही या आधिकारिक ड्यूटी के दौरान 2,500 रुपये प्रतिदिन का दैनिक भत्ता मिलता है.सांसदों को यात्रा, आवास, चिकित्सा, फोन और दूसरी संसदीय सुविधाएं भी मिलती हैं. यानी सांसद का कुल सरकारी लाभ सिर्फ 1.24 लाख रुपये की सैलरी तक सीमित नहीं है.सबसे बड़ा कारण यह है कि विधायक की सैलरी राज्य तय करता है, जबकि सांसद की सैलरी केंद्र के कानून और नियमों के तहत तय होती है. इसलिए किसी राज्य में विधायक की कुल मासिक रकम सांसद की सैलरी से ज्यादा दिख सकती है.दूसरी वजह यह है कि सैलरी और कुल पैकेज अलग चीजें हैं. उदाहरण के लिए किसी विधायक को 50 हजार रुपये मूल वेतन मिल सकता है, लेकिन निर्वाचन क्षेत्र, यात्रा, कार्यालय और दूसरे भत्ते जोड़ने के बाद कुल रकम कई गुना बढ़ सकती है.
