लोन वसूली के पूरे सिस्टम में आएगा बदलाव,आरबीआई ने नियमों में किया भारी बदलाव
जिंदगी में कभी न कभी हर आम इंसान को कर्ज लेने की जरूरत पड़ ही जाती है. चाहे घर बनाना हो, गाड़ी लेनी हो या फिर कोई मेडिकल इमरजेंसी आ जाए, लोन लेना आज हमारी जिंदगी का एक अहम हिस्सा बन चुका है. लेकिन असली परेशानी तब शुरू होती है जब किसी मजबूरी, जैसे नौकरी चले जाने या किसी गंभीर बीमारी के कारण आप समय पर अपनी ईएमआई (EMI) नहीं चुका पाते. ऐसे मुश्किल वक्त में इंसान पहले ही भारी मानसिक तनाव से गुजर रहा होता है. ऊपर से लोन रिकवरी एजेंट का डरावना बर्ताव मुश्किलें कई गुना बढ़ा देता है. गालियां देना, मोहल्ले में बेइज्जत करना, दफ्तर आकर हंगामा करना या लगातार फोन करके धमकाना, ये सब अक्सर देखने को मिलता है.लेकिन अब इस खौफ से आजादी मिलने वाली है. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने लोन रिकवरी के नियमों में एक बहुत बड़ा बदलाव किया है. 1 जनवरी 2027 से लागू होने वाले इन नए दिशा-निर्देशों ने साफ कर दिया है कि बैंक अपना पैसा वसूलने के लिए ग्राहकों को प्रताड़ित नहीं कर सकेंगे.

ये नए नियम रेस्पॉन्सिबल बिजनेस कंडक्ट डायरेक्शंस, 2025 के पुराने नियमों की जगह लेंगे और वसूली के पूरे सिस्टम को पारदर्शी बनाएंगे.अब बैंक किसी भी बाहरी रिकवरी एजेंसी को मनमाने ढंग से आपके पीछे नहीं छोड़ सकते. रिजर्व बैंक का सीधा निर्देश है कि बैंकों को अपने कर्मचारियों के साथ-साथ बाहरी रिकवरी एजेंट के लिए एक सख्त आचार संहिता (कोड ऑफ कंडक्ट) लागू करनी होगी. अगर बैंक ने वसूली का काम किसी बाहरी एजेंसी को सौंपा है, तो बैंक को ग्राहक को पहले ही इसकी जानकारी देनी होगी कि कौन सी एजेंसी या एजेंट उनसे संपर्क करेगा.भविष्य में अगर वह एजेंसी बदल जाती है या उसका कॉन्ट्रैक्ट खत्म कर दिया जाता है, तो इसकी सूचना भी ग्राहक को देना अनिवार्य होगा. इसके अलावा, रिकवरी एजेंट को ग्राहक की केवल उतनी ही निजी जानकारी दी जाएगी, जितनी वसूली के काम के लिए जरूरी है. अगर किसी एजेंट ने आपके डाटा का गलत इस्तेमाल किया, तो बैंक पर भारी जुर्माना लगेगा. इतना ही नहीं, वसूली के काम में लगे हर एजेंट को इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ बैंकिंग एंड फाइनेंस (IIBF) से बकायदा ट्रेनिंग लेनी होगी. बिना ट्रेनिंग के कोई भी उठकर वसूली करने नहीं आ सकेगा.अक्सर देखा गया है कि रिकवरी एजेंट दिन हो या रात, कभी भी फोन करके परेशान करते हैं. नए नियमों ने इस परेशानी का भी पक्का इलाज कर दिया है. अब रिकवरी एजेंट केवल सुबह 8 बजे से शाम 7 बजे के बीच ही आपको फोन कर सकते हैं या आपसे मिलने आ सकते हैं. अगर आप खुद अपनी मर्जी से उन्हें किसी और समय बुलाते हैं, केवल तभी वे तय समय के बाहर आ सकेंगे.सबसे बड़ी राहत की बात ये है कि अब रिकवरी एजेंट फोन पर जो भी बात करेगा, बैंक को उस कॉल को अनिवार्य रूप से रिकॉर्ड करना होगा. बातचीत शुरू होने से पहले ही ग्राहक को यह स्पष्ट रूप से बताना होगा कि कॉल रिकॉर्ड हो रही है. बैंक को यह रिकॉर्डिंग कम से कम छह महीने तक सुरक्षित रखनी होगी. अब कोई भी एजेंट फोन पर गाली-गलौज, धमकी या बदसलूकी नहीं कर पाएगा. ग्राहकों के रिश्तेदारों, दोस्तों या ऑफिस के सहकर्मियों को फोन करके परेशान करने पर भी पूरी तरह से पाबंदी लगा दी गई है. सोशल मीडिया पर किसी डिफॉल्टर की जानकारी, ऑडियो या वीडियो डालना भी अब सख्त मना है.आजकल लोग बड़ी आसानी से किश्तों पर महंगे स्मार्टफोन खरीद लेते हैं. लेकिन जैसे ही एक भी किश्त बाउंस होती है, फाइनेंस कंपनियां तुरंत फोन को लॉक कर देती हैं. इससे इंसान का सारा काम ठप पड़ जाता है. RBI ने इस मनमानी पर भी लगाम कस दी है. नए ड्राफ्ट के अनुसार, फाइनेंस करने वाली कंपनियां ईएमआई बाउंस होने के तुरंत बाद आपका फोन ब्लॉक नहीं कर सकतीं.जब ईएमआई को चूके हुए 30 दिन हो जाएंगे, तभी फोन में कुछ शुरुआती पाबंदियां लगाई जा सकेंगी. फोन को पूरी तरह से ब्लॉक करने का अधिकार 60 दिन बाद ही मिलेगा. लेकिन सबसे जरूरी बात यह है कि ब्लॉक होने के बावजूद इनकमिंग कॉल, मैसेज, इमरजेंसी कॉल (SOS) और कामकाज से जुड़े जरूरी फीचर्स हर हाल में चालू रखने होंगे. कोई भी रिकवरी एजेंसी आपकी मर्जी के बिना आपके फोन के कॉन्टैक्ट्स, गैलरी, कॉल लॉग या लोकेशन तक नहीं पहुंच सकती.जैसे ही आप अपना बकाया चुका देंगे, कंपनी को सिर्फ एक घंटे के भीतर फोन अनलॉक करना होगा. अगर बैंक या कंपनी की गलती से फोन अनलॉक होने में देरी होती है, तो उन्हें ग्राहक को 250 रुपये प्रति घंटे के हिसाब से हर्जाना देना होगा. यह हर्जाने की रकम आपके लोन की कुल रकम तक जा सकती है.अगर कोई रिकवरी एजेंट आपसे मिलने आपके घर या दफ्तर आता है, तो उसके लिए भी सख्त नियम तय किए गए हैं. एजेंट को हर समय अपना आईडी कार्ड पहनकर रखना होगा. उसके पास बैंक का ऑथराइजेशन लेटर (अधिकार पत्र) सहित बैंक द्वारा जारी किए गए नोटिस की कॉपी होनी चाहिए.इसके साथ ही, बैंक को अपने शिकायत निवारण अधिकारी (Grievance Redressal Officer) का नंबर भी देना होगा. अगर कोई एजेंट आपसे बदतमीजी करता है, तो आप तुरंत उस अधिकारी से शिकायत कर सकते हैं. जिन मामलों में बैंक लोन एग्रीमेंट के तहत किसी संपत्ति को कब्जे में लेता है, तो बैंक को यह सुनिश्चित करना होगा कि कब्जा लेने की शर्त कानूनी रूप से सही हो. यह शर्त लोन लेते समय ही ग्राहक को अच्छी तरह समझा दी जानी चाहिए.वित्तीय क्षेत्र के विशेषज्ञ इस कदम को एक बड़े ढांचागत सुधार के रूप में देख रहे हैं. DPDzero के सह-संस्थापक सीईओ अनंत श्रॉफ का कहना है कि RBI का यह नया फ्रेमवर्क कोई छोटा-मोटा अपडेट नहीं है, बल्कि यह पूरे सिस्टम को सुधारने का एक बड़ा कदम है. पहली बार नियामक ने वसूली की प्रक्रिया और उत्पीड़न के बीच एक साफ लकीर खींच दी है.अब यह नियम केवल कागजों तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि उन्हें रोजाना के कामकाज में उतारना होगा. सर्टिफाइड एजेंट का इस्तेमाल करना, सही समय पर कॉल करना, हर कॉल रिकॉर्ड करना, घर जाने से पहले नोटिस देना आदि अब बुनियादी जरूरत बन गए हैं. श्रॉफ का मानना है कि लाखों ग्राहकों के साथ इन नियमों का पालन सुनिश्चित करने में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) बड़ी भूमिका निभाएगा. एआई से यह ट्रैक किया जा सकेगा कि कॉल तय समय पर हो रही है या नहीं.
