PoK में आजादी के आंदोलन ने पकड़ी रफ्तार,मुश्किल में फंसा पाकिस्तान
पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (PoK) में पाकिस्तान सरकार और सेना के खिलाफ विरोध प्रदर्शन तेज हो गए हैं. कई इलाकों में युवा, महिलाएं और बुजुर्ग बड़ी संख्या में सड़कों पर उतरकर अपने अधिकारों और आजादी की मांग कर रहे हैं. प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि सुरक्षा बलों ने विरोध को दबाने के लिए बल प्रयोग किया, जिससे हालात तनावपूर्ण हो गए. कई स्थानों पर झड़पों और गोलीबारी की भी खबरें सामने आई हैं. बढ़ते विरोध के बीच पूरे क्षेत्र में सुरक्षा कड़ी कर दी गई है. इस घटनाक्रम ने PoK में राजनीतिक असंतोष और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर नई बहस छेड़ दी है.पाकिस्तानी हुकूमत POK के लोगों को मूलभूत सुविधाएं और उनके अधिकार तक नहीं दे रही है. इससे भड़के जब लोग जब पाकिस्तान से मक्ति की मांग कर रहे हैं, तो उन्हें दिन दहाड़े मौत बांटा जा रहा है. सवाल यही है कि POK में विद्रोह की जो आग भड़की है, उसका अंतिम परिणाम क्या होगा?कहते हैं जब सैन्य बूटों की धमक बढ़ जाती है. प्रजातंत्र पर तानाशाही हावी होने लगती है तो फिर इंकलाब का जन्म होता है और अब PoK में वही हो रहा है. जनता सड़कों पर मुनीर के जुल्मों के खिलाफ खड़ी हो गई है. पाकिस्तान से आजादी का नारा बुलंद कर रही है.JAAC के नेतृत्व में PoK में बड़ा प्रदर्शन हो रहा है,

जिसे रोकने के लिए पाकिस्तानी फौज निहत्थे प्रदर्शनकारियों पर फायरिंग कर रही है. इस प्रदर्शन में अब तक 100 से ज्यादा लोगों की मौत की खबर है, वहीं 200 से ज्यादा लोग घायल बताए जा रहे हैं.लोगों का आरोप है कि सेना ने बहुत सी लाशों को गायब कर दिया है. साथ ही पूरे PoK में इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी गई हैं, ताकि लोग अपना दर्द दुनिया को न बता सकेंJAAC के सदस्य सरदार उमर नजीर का कहना है कि पिछले 52-53 दिनों में हमारे 100 के करीब लोगों की शहादतें हो चुकी हैं और लगातार जो है जेनोसाइड की जा रही है.मुनीर किस तरीके से PoK की अवाम का खून बहा रहे हैं. पाकिस्तानी सेना के जवान निहत्थों लोगों पर सीधी फायरिंग कर रही है. POK की अवाम जब अपने हक के लिए सड़कों पर उतरी, तो उन्हें हक के बदले सिर्फ और सिर्फ गोलियां मिलीं, लेकिन ये बर्बरता सिर्फ यहीं तक सीमित नहीं है. महिलाएं भी पाकिस्तानी सेना के जुल्मों का शिकार हो रही है. उन्हें पीटा भी जा रहा है.पाकिस्तान की सत्ता बेचैन हो उठी है. हालात कंट्रोल से बाहर हैं. इतिहास खुद को दोहराने पर अड़ा है, वो इतिहास जिसने पाकिस्तान का नक्शा बदल दिया था. उसके दो टुकड़े कर दिए थे और उसके जिम्मेदार हैं पाकिस्तान के फेल्ड मार्शल आसिम मुनीर. POK में पाकिस्तानी सेना अवाम की आवाज दबाने में फेल साबित हो रही है, ऐसे में अब मुनीर ने PoK के दमन के लिए आतंक वाली चाल चल दी है.दावा है कि मुनीर ने PoK में कई आतंकियों को भेजा है, जो प्रदर्शनकारियों की भीड़ में शामिल हो गए हैं. आतंकी हथियारों से लैस हैं और इसे आधार बनाकर आंदोलन को आतंकी साजिश करार देने की मुनीर की कोशिश है.जब बांग्लादेश पाकिस्तान से अलग हो रहा था तो पाकिस्तानियों को पता ही नहीं था कि क्या हो रहा है, क्योंकि पाकिस्तानी मीडिया लोगों को दिखा ही नहीं रही थी लोगों को कि चल क्या रहा है. तब बांग्लादेश में नरसंहार चल रहा था. आज वही नरसंहार POJK में चल रहा है. ये अपने मूलभूत लोकतांत्रिक अधिकारों की मांग कर रहे हैं. ये लोग बुनियादी शिक्षा, बुनियादी स्वास्थ्य सेवाएं और एक अच्छा सिस्टम मांग रहे हैं.पाकिस्तान के फेल्ड मार्शल आसिम मुनीर समझ चुके हैं कि अब PoK की जनता गोलियों से नहीं डरने वाली है. ऐसे में अब आतंक का सहारा लेकर इस आंदोलन को बदनाम करने की कोशिशों में लगे हैं ताकि दुनिया के सामने ये झूठ फैला सकें कि ये आंदोलन आंतकियों की साजिश थी, लेकिन PoK की जनता को इससे कोई फर्क नहीं पड़ने वाला है, उन्होंने तय कर लिया है कि पाकिस्तान से आर-पार की लड़ाई जारी रहेगी.मुनीर कह रहे हैैं कि PoK में लोकतंत्र चल रहा है लेकिन सवाल ये है कि अगर लोकतंत्र चलाने के लिए हर मोड़ पर बंदूक खड़ी करनी पड़े तो उस लोकतंत्र की स्वीकार्यता पर सवाल तो बनता है, क्योंकि लोकतत्रं का असली पहरेदार वहां की जनता होती है. और जब जनता की मर्जी के खिलाफ तानाशाही शासन लाने की कोशिश हो तो वहां लोकतंत्र का वजूद नहीं रह जाता और कुछ ऐसा ही मुनीर PoK में कर रहे हैं.अब सवाल ये है कि आखिर मुनीर के खिलाफ POK की जनता इतनी नाराज क्यों हैं? जो उसके पीछे की वजह मुनीर की दमनकारी नीति है.PoK पाकिस्तान का आधिकारिक प्रांत नहीं, लेकिन इसपर हुकूमत पाकिस्तान कर रहा है.PoK का अपना संविधान है, लेकिन कानून मुनीर के हिसाब से चलते हैं.PoK में अपने प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति हैं लेकिन उसे बनाने का काम मुनीर की हुकूमत करती है.यहां तक की वहां की रक्षा नीति और बजट से लेकर विकास कार्यों में पाकिस्तान का सीधा दखल है और यही दखल अब PoK की अवाम को बर्दाश्त नहीं है, वो अपनी रियासत अपने हिसाब से चलाना चाहते हैं. कहते हैं कि किसी को इतना भी ना डराओं की उसका डर ही खत्म हो जाए और अब PoK में वही हो रहा है. वहां की जनता के मन से अब गोलियों का खौफ खत्म हो चुका है. PoK की आजादी का आंदोलन अब जनक्रांति का रूप ले चुका है. ऐसे में मुनीर को अपने साम्राज्य के दहन का खतरा सताने लगा है.
