महिला आरक्षण-परिसीमन बिल पास कराकर मानेंगे पीएम मोदी,विपक्ष पर भारी पड़ेंगे NDA के सांसद

 महिला आरक्षण-परिसीमन बिल पास कराकर मानेंगे पीएम मोदी,विपक्ष पर भारी पड़ेंगे NDA के सांसद
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संसद के आगामी मॉनसून सत्र को लेकर सियासी पारा अभी से चढ़ने लगा है. जहां महिला आरक्षण और परिसीमन बिल को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच एक बड़े सियासी घमासान के पूरे आसार हैं.एक तरफ जहां मोदी सरकार इस ऐतिहासिक गतिरोध को तोड़ने के लिए दक्षिण भारत के सबसे मजबूत गढ़ यानी डीएमके (DMK) पर लगातार डोरे डाल रही है और उससे बड़ी उम्मीदें लगाए बैठी है, वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस भी पीछे हटने को तैयार नहीं है. विपक्षी एकजुटता को लेकर अपना अलग ही दमदार दावा ठोक रही है. सरकार और विपक्ष के बीच इस अंदरूनी शह-मात के खेल की पूरी इनसाइड स्टोरी क्या है, आइए इस पर विस्तार से चर्चा करते हैं.सूत्रों की मानें तो, सरकार के वरिष्ठ नेता DMK को मनाने के प्रयास कर रहे हैं ताकि DMK के 22 सांसद विधेयक का समर्थन करें या कम से कम अनुपस्थित रहें. इससे लोकसभा में दो-तिहाई बहुमत (लगभग 360 वोट) हासिल करने में मदद मिल सकती है.

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NDA के मौजूदा आंकड़े करीब 293 हैं, कुछ बागी सांसदों के साथ बढ़कर 319 तक पहुंच सकते हैं. इसके अलावा बहुत कुछ DMK के रुख पर भी निर्भर करेगा.हालांकि DMK ने अभी तक अपना स्टैंड स्पष्ट नहीं किया है. DMK अध्यक्ष और तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन जल्द ही अपनी पार्टी के सांसदों के साथ बैठक करने वाले हैं. जिसमें परिसीमन विधेयक का समर्थन करना है या नहीं, इस पर फैसला लिया जाएगा. पार्टी दक्षिणी राज्यों में सीटों की संख्या कम होने की आशंका से डर रही है. DMK यह भी आरोप लगा रही है कि जिस राज्य ने जनसंख्या नियंत्रण में सफलता हासिल की उसी राज्य को परिसीमन में दंडित किया जा रहा है.DMK नेता कनिमोझी ने कहा है कि, “हमने कुछ मुद्दे उठाए हैं. तमिलनाडु के हितों की रक्षा करनी होगी. हम राज्यों को जनसंख्या नियंत्रण के लिए दंडित नहीं होने देंगे.” एक वरिष्ठ DMK नेता ने उम्मीद जताई कि सरकार कोई बीच का मार्ग निकालेगी.सूत्रों के मुताबिक सरकार की रणनीति है कि वो DMK को मनाने के लिए कुछ राजनीतिक रियायतें, विधेयक में संशोधन या अन्य मुद्दों पर सहयोग का वादा कर सकती है. अगर DMK वोटिंग के दौरान अनुपस्थित भी रहता है तो सरकार के लिए बहुमत और भी आसान हो जाएगा.इधर, कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं की बैठक में पार्टी ने साफ कर दिया है कि वह परिसीमन विधेयक का विरोध करेगी. कांग्रेस महिला आरक्षण का समर्थन करती है लेकिन इसे परिसीमन से जोड़ने को गलत बता रही है. कांग्रेस की मांग है कि महिला आरक्षण को स्टैंडअलोन प्रावधान के रूप में तुरंत लागू करें. परिसीमन को भविष्य की जनगणना तक टालें या अलग रखें.कांग्रेस महासचिव के.सी. वेणुगोपाल ने कहा कि एजेंसियों के दुरुपयोग और सांसदों को लुभाने के बावजूद BJP इस संविधान संशोधन को पास नहीं करा पाएगी. कांग्रेस DMK से अपील कर रही है कि INDIA गठबंधन की एकता बनाए रखें, जैसा अप्रैल में हुआ था. कांग्रेस विपक्ष को एकजुट रखने की कोशिश कर रही है और यदि ये विधेयक आता है तो कांग्रेस संसद में बहस में परिसीमन के “उत्तर-दक्षिण विभाजन” को उजागर करेगी. साथ ही वो DMK पर भी दबाव बना रही है कि वह विरोध में खड़ा रहे.कुल मिलकर पूरा दारोमदार अब DMK के निर्णय पर टिका है और ये स्टालिन की सांसदों के साथ बैठक के बाद फैसला हो पाएगा. अगर सरकार शर्तें नहीं मानती है, तो विरोध तेज हो सकता है. कुल मिलाकर DMK अनुपस्थित रहता है या समर्थन करता हैतो विधेयक पास होने की संभावना है और अगर DMK सख्त विरोध में रहता है विपक्ष एकजुट रहेगा और विधेयक फिर फंस सकता है.सूत्रों की मानें तो ऐसी परिस्थिति में सरकार JPC गठन या आंशिक डी-लिंकिंग का प्रस्ताव रख सकती है. इससे कांग्रेस और DMK के बीच और तनाव बढ़ सकता है. हालांकि, दोनों महिला आरक्षण के तो पक्ष में है मगर फर्क सिर्फ इस बात का है कि ये कैसे पास होता है.बता दें कि 2023 में Nari Shakti Vandan Adhiniyam (106वां संशोधन) पास हुआ था. इसे जनगणना और परिसीमन के बाद लागू होना था. अप्रैल 2026 में सरकार ने 131वां संशोधन विधेयक, परिसीमन विधेयक 2026 और UT संबंधी विधेयक पेश किए थे. लोकसभा में 298 वोट मिले, 230 विरोध में. दो-तिहाई बहुमत (352 के आसपास) नहीं मिलने के कारण विधेयक वापस लिए गए. अब मानसून सत्र में सरकार फिर कोशिश कर रही है ताकि 2029 चुनावों से पहले महिला आरक्षण लागू हो सके.इस मुद्दे पर बीजेपी सांसद नरेश बंसल का कहना है कि महिला आरक्षण देश में महिलाओं को और सशक्त करने के लिए सरकार लाना चाहती है और विपक्षी पार्टियां महिला विरोधी रुख अपना रहीं है. उन्होंने कहा कि उन्हें उम्मीद ही कि इंडिया ब्लॉक की पार्टियों से अलग डीएमके इस बार सहयोग करेगा और महिला आरक्षण बिल देश में लागू किया जाएगा.

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