राम मंदिर के लिए नए तरीके से गठित की जाएगी ट्रस्ट,SIT को जांच में मिली कई साक्ष्य,निशाने पर हैं कई लोग
अयोध्या में चढ़ावे में गबन की जांच करने वाले एसआईटी को सीसीटीवी फुटेज से कुछ अहम सुराग मिले हैं। इसमें कुछ संदिग्ध रकम चोरी करते हुए नजर आ रहे हैं। इस मामले को उजागर करने में ये फुटेज बेहद अहम साबित हो सकते हैं। इसके अलावा, एसआईटी को राम मंदिर ट्रस्ट के कुछ पदाधिकारियों की भूमिका भी संदिग्ध मिली है। वह नए सिरे से ट्रस्ट का गठन करने और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए श्री काशी विश्वनाथ मंदिर की तर्ज पर एक कार्यपालक अधिकारी को नियुक्त करने की सिफारिश कर सकती है। सूत्रों के अनुसार, एसआईटी को अपनी छह दिनों की जांच पड़ताल में सीसीटीवी फुटेज मिटाए जाने के भी संकेत मिले हैं। इस तथ्य को एसआईटी ने जांच में प्रमुखता से दर्ज किया है।

इसमें लापरवाही और साजिश दोनों के पहलुओं की जांच की गई है। जिन लोगों ने निगरानी में चूक की, उन्हें लापरवाही का जिम्मेदार माना गया है, जबकि सीसीटीवी से छेड़छाड़ करने वालों की भूमिका को साजिश के तौर पर देखा गया है। कुछ ऐसे लोग भी सामने आए हैं जिन्होंने मंदिर निर्माण और अन्य मामलों में ट्रस्ट के पदाधिकारियों पर कमीशनखोरी के आरोप लगाए हैं। इसमें सबसे अधिक आरोप अनिल मिश्र पर लगे हैं। सूत्रों का कहना है कि गवाहों ने एसआईटी को इससे जुड़े कुछ साक्ष्य भी सौंपे हैं, जिनमें 40 फीसदी तक कमीशन लेने की बात सामने आई है। उल्लेखनीय है कि चढ़ावा प्रकरण की जांच कर रही एसआईटी इन पदाधिकारियों से पूछताछ कर चुकी है। चर्चाओं को उस समय और बल मिला जब शुक्रवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अयोध्या दौरे पर पहुंचे। राम मंदिर में दर्शन-पूजन के दौरान मुख्यमंत्री और चंपत राय के बीच सार्वजनिक रूप से कोई विशेष संवाद या संयुक्त उपस्थिति देखने को नहीं मिली। इसके बाद राजनीतिक और सामाजिक हलकों में यह सवाल उठने लगा कि क्या ध्वजारोहण समारोह में शामिल होने वाले दोनों उपमुख्यमंत्री भी जांच के दायरे में आए ट्रस्ट पदाधिकारियों से सार्वजनिक दूरी बनाए रखेंगे। हालांकि, ट्रस्ट या प्रशासन की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की गई है। आयोजन से जुड़े लोग इसे पूरी तरह धार्मिक कार्यक्रम बताते हुए तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुटे हैं।
