राजद ने कांग्रेस के खिलाफ हीं खोल दिया मोर्चा,राहुल गांधी से नहीं संभल रही खुद की पार्टी!
झारखंड प्रदेश के राज्यसभा चुनाव में परिणाम से स्पष्ट हो गया है कि कांग्रेस अपने ही सभी विधायकों का समर्थन हासिल करने में नाकाम रही। दूसरे दलों पर बिना सोचे-समझे अनर्गल आरोप लगाने से पूर्व स्वयं में झांककर मंथन और चिंतन करना चाहिए कि विगत मार्च महीने में राज्यसभा के द्विवार्षिक चुनावों में कांग्रेस के हरियाणा से 5, ओड़िशा से 2 और बिहार से 3 विधायकों ने BJP के पक्ष में खुलकर क्रॉस वोटिंग की तथा जानबुझकर अनुपस्थित रहे।राजद ने कहा कि यही नहीं उन विधायकों ने खुलकर कैमरा पर आकर कहा कि महागठबंधन का उम्मीदवार उनकी पसंद का नहीं था, उनके शीर्ष नेतृत्व ने उन्हें कोई निर्देश नहीं दिया इत्यादि इत्यादि। सबूत के तौर पर वीडियो संलग्न है। अब तक उन विधायकों के खिलाफ क्या कोई कार्रवाई की गई? बिहार में वही लोग इनके शीर्ष प्रदेश नेतृत्व के साथ बैठकर अब प्रेस वार्ता भी करते फिरते है।राष्ट्रीय जनता दल ने कहा कि अब फिर झारखंड चुनाव में इनके नेता अपनी असफलता व नाकामी छिपाने और राजद एवं सीपीआई (एमएल) की भाजपा विरोधी विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचाने का असफल प्रयास कर रहे हैं।

राजद ने सवाल पूछा कि ऐसे नेताओं की सतही, हल्की और अधीर टिप्पणी इंडिया गठबंधन की एकजुटता को नुकसान पहुंचाती है। क्या हरियाणा, ओड़िशा और बिहार में महागठबंधन के किसी भी नेता ने कांग्रेस पार्टी के विरुद्ध कभी कोई प्रतिकूल टिप्पणी की? इसलिए झारखंड के इनके शीर्ष नेताओं को बचकाने बयानों से बचना चाहिए और साथ ही पड़ोसी राज्य बिहार से लेकर अन्य राज्यों में अपने ही उम्मीदवारों के विरुद्ध मतदान करने वालों पर बयानबाजी और कार्रवाई करवानी चाहिए।राष्ट्रीय महासचिव भोला यादव ने कहा कि पार्टी प्रमुख लालू प्रसाद यादव और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के निर्देशानुसार राजद के सभी चार विधायकों ने इंडिया गठबंधन के उम्मीदवार प्रणव झा के पक्ष में मतदान किया। उन्होंने कहा कि वे चुनाव में पर्यवेक्षक के रूप में मौजूद थे और चारों विधायकों ने उन्हें अपना वोट दिखाया था। भोला यादव ने कहा कि मैंने अपनी आंखों से साफ देखा है, मेरी आंखें मुझे धोखा नहीं दे सकतीं। कांग्रेस को यह जांच करनी चाहिए कि आखिर चूक कहां हुई। मेरा मानना है कि कांग्रेस प्रभारी को आत्ममंथन करना चाहिए, इससे उनकी समस्या का समाधान हो जाएगा।
