भारतभूषण तिवारी को लेकर बीजेपी MLA और मंत्री ने हीं सम्राट चौधरी को घेर लिया,बोले-ऐसे नहीं चलेगा बिहार

 भारतभूषण तिवारी को लेकर बीजेपी MLA और मंत्री ने हीं सम्राट चौधरी को घेर लिया,बोले-ऐसे नहीं चलेगा बिहार
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भोजपुर में भरत भूषण तिवारी की पुलिस की गोली लगाने से मौत मामले में सियासत गरमा गई है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की सरकार को अब विपक्ष के साथ सत्ता पक्ष के नेता भी घेरने लगे है। शुक्रवार को भाजपा के दो विधायकों ने बिहार पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाया है। इनमें से एक तो भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारी भी रह चुके हैं। भाजपा के इन दोनों विधायकों ने स्पष्ट कहा है कि पुलिस इसे दूसरे एंगल से भी ले सकती है। सबसे पहले पूर्व आईपीएस अधिकारी आनंद मिश्रा ने इस मामले पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि बिहार पुलिस अगर सही तरीके से इस मामले को हैंडल करती तो ऐसी स्थिति उत्पन्न नहीं होती। उन्होंने कहा कि पुलिस समय रहते अधिक व्यवहारिक और संवेदनशील तरीके से हालात को संभालती तो शायद यह घटना टाली जा सकती थी।भाजपा विधायक आनंद मिश्रा ने कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के साथ-साथ हर कार्रवाई में संतुलन और जवाबदेही भी जरूरी है। उन्होंने कहा कि सरकार न्याय, पारदर्शिता और सुशासन के लिए प्रतिबद्ध है। इसी कारण मामले की गंभीरता को देखते हुए संबंधित पुलिस अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है ताकि जांच निष्पक्ष ढंग से पूरी हो सके। इस मामले की उच्च स्तरीय जांच का निर्देश दिया गया है। जो भी दोषी होंगे, उनपर कड़ी कार्रवाई कर करनी चाहिए। इधर, कृषि मंत्री विजय सिन्हा ने भी भोजपुर की घटना को दुखद और दुर्भाग्यपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि किसी भी निर्दोष व्यक्ति को बदले की भावना या नकारात्मक मानसिकता के कारण परेशान नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि कानून के पालन की जिम्मेदारी सरकार की है और जो भी अधिकारी या कर्मचारी लापरवाही करेगा, उसे बख्शा नहीं जाएगा। उनके अनुसार प्रशासनिक जवाबदेही सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिकता है। शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने कहा कि यदि पुलिस को कार्रवाई करनी ही थी तो जान लेने की बजाय गिरफ्तार भी कर सकती थी। इससे आरोपी को जीवित पकड़कर कानून के दायरे में लाया जा सकता था। किस परिस्थिति में पुलिस ने ऐसा किया यह जांच का विषय है। इसकी जांच भी की जा रही है। जल्द ही सारी बातें स्पष्ट हो जाएगा। सरकार किसी के साथ अन्याय नहीं होने देगी।पूर्व केंद्रीय मंत्री अश्विनी चौबे ने कहा कि शर्मसार करने वाला लोमहर्षक घटना से व्यथित हूं। भोजपुर के बिलौटी, शाहपुर निवासी नवयुवक भरत भूषण तिवारी की पुलिस प्रशासन द्वारा आत्मसमर्पण के उपरांत उसकी गोली मारकर नृशंस हत्या कर दी गई जो हृदय विदारक है। लोकतंत्र में हिंसा की कोई जगह नहीं है। मैं देश के गृह मंत्री अमित शाह जी से आग्रह करता हूं कि भरत तिवारी की निर्मम हत्या पर संज्ञान लेते हुए हत्यारे बने पुलिस प्रशासन के खिलाफ तत्काल कार्रवाई कर उच्च स्तरीय जांच का आदेश दें ताकि समाज में गलत संदेश ना जाय। साथ ही मैं बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी जी से आग्रह करता हूं कि हत्यारों को तत्काल 48 घंटे के भीतर जेल भेजकर बिहार में सुशासन होने का परिचय दें।उन्होंने कहा कि युवाओं को अपराधीकरण से बचाना सरकार का परम कर्तव्य होना चाहिए। अगर भरत ने आत्मसमर्पण कर दिया था (जो उसके वीडियो से स्पष्ट है), तो उसे खूंखार अपराधियों की तरह गोली मार देना न्याय का द्योतक सरासर नहीं है। उसे हिरासत में लेकर न्यायसंगत कार्रवाई करनी चाहिए थी। किसी माँ से उसके बच्चे को इस प्रकार जानबुझ कर छीन लेना सरकार के न्याय व्यवस्था को कलंकित करता है। साथ ही यह पुलिस की कुत्सित, घृणित और विद्वेषपूर्ण मानसिकता को भी दर्शाता है जिससे सरकार की बदनामी हो रही है

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।भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय मंत्री ऋतुराज सिन्हा ने भोजपुर के शाहपुर में कहा कि भारत भूषण तिवारी की मृत्यु ने पूरे क्षेत्र को मर्माहत किया है। इस घटना को लेकर जनता के मन में जो सवाल और चिंताएं हैं, उनका निष्पक्ष उत्तर सामने आना चाहिए। उन्होंने कहा कि एनडीए सरकार द्वारा संबंधित पुलिसकर्मियों के निलंबन की त्वरित कार्रवाई स्वागतयोग्य है, लेकिन न्याय केवल प्रारंभिक कार्रवाई से पूरा नहीं होता। पूरे मामले की निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध जांच आवश्यक है, ताकि सच्चाई सामने आए और किसी भी प्रकार की आशंका की गुंजाइश न रहे। उन्होंने कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना पुलिस का दायित्व है, लेकिन किसी भी परिस्थिति में कानून से ऊपर कोई नहीं हो सकता। यदि जांच में अधिकारों के दुरुपयोग,लापरवाही अथवा निर्धारित प्रक्रिया के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो दोषियों के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि यह मामला केवल एक व्यक्ति की मृत्यु का नहीं, बल्कि जनता के कानून और न्याय व्यवस्था पर विश्वास से भी जुड़ा हुआ है। मुझे विश्वास है कि एनडीए सरकार इस मामले में निष्पक्षता और पारदर्शिता के साथ आगे बढ़ेगी। न्याय केवल होना ही नहीं चाहिए, बल्कि होता हुआ दिखाई भी देना चाहिए। मुझे पूरा भरोसा है कि सत्य सामने आएगा, दोषी चाहे कोई भी हो उसे बख्शा नहीं जाएगा और पीड़ित परिवार को न्याय मिलेगा। ऋतुराज सिन्हा ने शाहपुर एवं भोजपुर की जनता से शांति और संयम बनाए रखने की अपील करते हुए कहा कि न्याय की मांग पूरी मजबूती से होनी चाहिए, लेकिन कानून का सम्मान और सामाजिक सौहार्द भी उतना ही आवश्यक है।इस कहानी की शुरुआत सोमवार की शाम से शुरू हुई। इसमें युवक के घर पर कुछ पुलिस वाले पहुंचे हुए थे। युवक हाथ में पिस्टल लेकर उन पुलिसवालों से बात कर रहा था। उस वीडियो में युवक की मां भी दिख रही है, जो यह कह रही है कि इसका इलाज चल रहा है। पुलिस और युवक के बीच बहस हो रही है, जिसमें युवक पुलिस अधिकारी के सामने पिस्टल तान देता है। इस बीच युवक की मां बीच-बचाव करती दिखती है। पुलिस फिर वहां से चली गई, लेकिन इस वीडियो के वायरल होने के बाद बिहार सरकार के पुलिस प्रशासन की खूब किरकिरी हो रही है। इसके बाद मंगलवार की शाम में जब पुलिस उसे समझाने पहुंची, तो भरत का गुस्सा सातवें आसमानपर था। वह फेसबुक लाइव आकर पुलिस को ही ठोकने की धमकी देने लगा। बुधवार की सुबह जब पुलिस ने उसे घेरा, तब भी वह लाइव था और कह रहा था-‘गोली चलाएगा रे…। बुधवार को आत्मसमर्पण करने के बाद पुलिस ने उसका एनकाउंटर कर दिया। लेकिन अब इस एनकाउंटर पर सबसे बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। भरत के परिवार वालों ने सोशल मीडिया का हवाला देते हुए कहा कि लाइव वीडियो में स्पष्ट दिख रहा है कि पुलिस के आश्वासन के बाद भरत ने अपना हथियार पुलिस के आगे फेंककर आत्मसमर्पण कर दिया था। इसके बाद भी एसटीएफ ने गोली क्यों चलाई?

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