TMC के बागी सांसदों को बड़ा तोहफा देगी मोदी सरकार,बनाए जा सकते हैं दो कैबिनेट और एक राज्य मंत्री!

 TMC के बागी सांसदों को बड़ा तोहफा देगी मोदी सरकार,बनाए जा सकते हैं दो कैबिनेट और एक राज्य मंत्री!
Sharing Is Caring:

तृणमूल कांग्रेस के बागी धड़े का मोदी सरकार को समर्थन की घोषणा ने राजग के सहयोगी दलों के समीकरण उलट पलट दिए हैं। एक ओर जहां मोदी सरकार की सहयोगी दलों पर निर्भरता कम हुई है, वहीं इस सियासी घटनाक्रम में टीडीपी प्रमुख चंद्रबाबू नायडू की जगह तृणमूल बागी गुट की अगुवाई करने वाली काकोली घोष दस्तीदार सबसे अहम किरदार बन कर उभरी हैं।निकट भविष्य में होने वाले मंत्रिमंडल विस्तार में मोदी सरकार में टीडीपी की कम होती धमक की बानगी पेश करेगी। गौरतलब है कि यह बागी गुट अब मोदी सरकार में टीडीपी को दूसरे और जदयू को तीसरे नंबर पर धकेल कर पहले नंबर पर काबिज हो गया है। बागी गुट के पास अब तक 20 सांसदों का समर्थन है जो कि टीडीपी से 4 और जदयू से आठ ज्यादा है। राज्यसभा में इस गुट के तीन सांसद हैं। उच्च सदन में यह संख्या 8 तो लोकसभा में 22 तक पहुंच सकती है। जाहिर तौर पर केंद्रीय राजनीति में आए इस बदलाव ने मोदी सरकार को बेहद मजबूत स्थिति में पहुंचा दिया है।बागी धड़े ने जल्द संभावित मंत्रिमंडल विस्तार में अपने लिए कैबिनेट के दो और राज्य मंत्री का एक पद मांगा है। वर्तमान में 16 सदस्यों वाली टीडीपी और 12 सदस्यों वाले जदयू के कैबिनेट के एक—एक और राज्य मंत्री के एक—एक पद हैं। चूंकि टीडीपी बागी धड़े के सांसदों की संख्या इन दो दलों की तुलना में बेहद ज्यादा है, ऐसे में भाजपा नेतृत्व टीएमसी की मांग को स्वीकार कर सकता है।मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल में पहली बार राजग ने तीन सौ का आंकड़ा पार किया है। बागी गुट के समर्थन के बाद अब लोकसभा में राजग के सांसदों की संख्या 312 हो गई है। स्थिति में बदलाव के बाद अब सरकार की निगाहें परिसीमन को अमली जामा पहनाने के लिए दो तिहाई समर्थन हासिल करने पर है। बीते सत्र में सरकार को 298 सांसदों का साथ मिला था। इस दृष्टि से अब यह आंकड़ा 318 पर पहुंच गया है। राज्यसभा में आरामदायक स्थिति में आने के बाद सरकार डीएमके समेत कुछ अन्य दलों को भी साधने में जुटी है।वहीं दूसरी तरफ अहम सांविधानिक संशोधन विधेयक पारित कराने के लिए संसद के दोनों सदनों में दो-तिहाई बहुमत हासिल करने की कोशिश में जुटा राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन राज्यसभा में तो अपने लक्ष्य के करीब पहुंचता दिख रहा है।

1000055334

लेकिन तृणमूल कांग्रेस में बगावत के बावजूद निचले सदन में वह 363 सदस्यों के इस जादुई आंकड़े से काफी दूर है।सूत्रों के मुताबिक, राज्यसभा में राजग के मौजूदा 148 सांसदों की संख्या में तीन और सीटें जुड़ने की उम्मीद है। यह बढ़ोतरी झारखंड और मिजोरम में हो रहे राज्यसभा चुनावों में निर्दलीय उम्मीदवारों की सीटें जीतने से हो सकती है। तृणमूल के तीन राज्यसभा सदस्यों के इस्तीफे के बाद, उपचुनावों में राजग पश्चिम बंगाल की तीनों सीटें जीत सकती है। इससे राजग के सांसदों की कुल संख्या 154 हो जाएगी, जो उच्च सदन में दो-तिहाई बहुमत से नौ कम है।विपक्षी गठबंधन इंडिया ब्लॉक के साथ अभी 64 सांसद हैं; द्रमुक के आठ सांसदों के अलग होने और आप के तीन सांसदों के गठबंधन से दूरी बना लेने के बाद यह स्थिति बनी है। वाईएसआर कांग्रेस और बीजद जैसे दल जिनके पास क्रमशः सात और छह सीटें हैं, राज्यसभा में यह संविधान संशोधन जैसा कोई मौका आने पर किसी भी तरफ जा सकते हैं। उधर लोकसभा में अगर तृणमूल कांग्रेस के बागी खेमे के 20 सांसद अलग गुट बनाकर राजग का समर्थन करते हैं तो भी कुल संख्या 312 पर पहुंचेगी, जो दो-तिहाई बहुमत से काफी पीछे है।चूंकि उच्च सदन में तृणमूल के और सांसदों के इस्तीफा देने की अटकलें जताई जा रही हैं, ऐसे में राजग 163 का आंकड़ा छू सकता है, जिससे उसे सभी सांविधानिक संशोधन विधेयक पारित करने के लिए जरूरी संख्या बल मिल जाएगा। नवंबर तक सत्ताधारी गठबंधन की ताकत कम हो सकती है, क्योंकि उत्तर प्रदेश से 10 सांसदों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है। वहीं, राज्य विधानसभा में अपनी बेहतर संख्या-बल के कारण समाजवादी पार्टी को राज्यसभा में कुछ सीटें मिल सकती हैं।

Comments
Sharing Is Caring:

Related post