बंगाल में इन्हें मुख्यमंत्री बना सकती है बीजेपी,जान लीजिए रेस में किस नेता का नाम है सबसे आगे?
पश्चिम बंगाल में अगला मुख्यमंत्री कौन होगा,ये बड़ा सवाल है.नए मुख्यमंत्री के चुनाव में बीजेपी जातिगत समीकरणों पर भी पूरा फोकस करेगी ताकि बंगाल में पहली पारी में कोई चूक न हो. बंगाल विधानसभा में नेता विपक्ष शुभेंदु अधिकारी इस रेस में सबसे आगे हैं. अभी देश के 16 राज्यों में भाजपा की सरकार में मुख्यमंत्री हैं. इसमें पांच ओबीसी और चार ब्राह्मण सीएम हैं.सवाल यह भी है कि क्या बंगाल में बीजेपी कोई डिप्टी सीएम भी बनाएगी. देश की स्वतंत्रता के बाद 75 सालों में पहली बार बंगाल में भारतीय जनता पार्टी के हाथ में कमान आई है. बंगाल विधानसभा चुनाव के पहले बिहार में भाजपा के मुख्यमंत्री के तौर पर सम्राट चौधरी ने सत्ता संभाली थी,जो कोइरी यानि कि कुशवाहा समुदाय से ताल्लुक रखते हैं. आइए जानते हैं कि उत्तर प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली, उत्तराखंड और मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र-गुजरात से ओडिशा तक अब बीजेपी के मुख्यमंत्री हैं.प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सत्ता संभालने के बाद देश में सबसे बड़ी आबादी वाले पिछड़ा वर्ग को अपने पाले में रखने में बीजेपी में कोई कसर नहीं छोड़ी है. सम्राट चौधरी समेत सबसे ज्यादा मुख्यमंत्री ओबीसी ही हैं. हालांकि भारतीय जनता पार्टी का कोर वोट बैंक समझे जाने वाले ब्राह्मण, वैश्य और क्षत्रिय समुदाय की नुमाइंदगी भी इस लिस्ट में अच्छी खासी है. 25 करोड़ की आबादी के साथ देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी राजपूत समुदाय से ताल्लुक रखते हैं.अब आइए आपको बताते है बीजेपी के मुख्यमंत्रियों में कौन किस समुदाय से आते है।-योगी आदित्यनाथ (UP) : राजपूत (सवर्ण) : ठाकुर/क्षत्रिय समुदाय से. सम्राट चौधरी (बिहार): कोइरी (ओबीसी) : बिहार में कुशवाहा समाज भजनलाल शर्मा (राजस्थान) : ब्राह्मण (सवर्ण) : ब्राह्मण चेहरामोहन यादव (MP) : यादव (ओबीसी): पिछड़ा वर्ग सेदेवेंद्र फडणवीस (महाराष्ट्र) : ब्राह्मण (सवर्ण):

बीजेपी के बड़े नेताओं में नायब सिंह सैनी (हरियाणा) : सैनी (ओबीसी) : गैर जाट ओबीसी मोहन चरण माझी(ओडिशा) : आदिवासी (ST) : संथाल जनजाति से विष्णु देव साय (छत्तीसगढ़) : आदिवासी (ST) : जनजाति समुदाय सेभूपेंद्र पटेल (गुजरात) : पाटीदार (OBC) : कड़वा पटेल पुष्कर सिंह धामी (उत्तराखंड) : राजपूत (सवर्ण): क्षत्रिय नेताडॉ.माणिक साहा(त्रिपुरा) : ब्राह्मण (सवर्ण) : बंगाली ब्राह्मण पेमा खांडू (अरुणाचल) : आदिवासी (ST) : मोनपा जनजाति युमनाम खेमचंद(मणिपुर) : मैइती (OBC): मैइती समुदाय सेरेखा गुप्ता (दिल्ली) : वैश्य (सामान्य) : बनिया समुदाय सेप्रमोद सावंत(गोवा) : मराठा (सामान्य) : मराठा समुदाय हिमंत बिस्वा सरमा (असम): ब्राह्मण : असमिया ब्राह्मण है।दरअसल में देश में अभी जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, झारखंड में भाजपा सरकार नहीं है. दक्षिण भारतीय राज्यों की बात करें तेलंगाना, कर्नाटक के बाद केरलम में कांग्रेस सरकार बनाने की ओर है. आंध्र प्रदेश में एनडीए है और तमिलनाडु में अब टीवीके की सरकार बनने जा रही है है।शुभेंदु अधिकारी ने दिसंबर 2020 में तृणमूल कांग्रेस और विधायक पद से इस्तीफा दे दिया. यह एक 20 साल पुराने रिश्ते का अंत था. 19 दिसंबर 2020 को मेदिनीपुर में अमित शाह की रैली में उन्होंने भगवा चोला ओढ़ लिया. टीएमसी के लिए यह एक बड़ा झटका था, जबकि बीजेपी के लिए यह बंगाल में सत्ता के द्वार खोलने जैसा था. टीएमसी ने उन पर ईडी और सीबीआई के डर का आरोप लगाया, जबकि शुभेंदु ने पार्टी को ‘प्राइवेट लिमिटेड कंपनी’ बताकर अपनी नाराजगी जाहिर की.ममता बनर्जी ने 2021 के चुनाव में अपनी सुरक्षित भवानीपुर सीट छोड़कर शुभेंदु के गढ़ नंदीग्राम से लड़ने का फैसला किया. यह चुनावी मुकाबला नहीं, बल्कि साख और अहंकार का युद्ध बन गया था. नंदीग्राम में शुभेंदु ने ममता बनर्जी को हराकर पूरे देश को चौंका दिया. इस जीत ने उन्हें रातों-रात बीजेपी का सबसे बड़ा चेहरा बना दिया और उन्हें ‘लीडर ऑफ अपोजिशन’ का पद मिला.आज शुभेंदु अधिकारी ममता सरकार के लिए सबसे बड़ी चुनौती हैं. उन पर कई मुकदमे दर्ज हैं (जैसे पूर्व बॉडीगार्ड की मौत का मामला और राहत चोरी के आरोप), जिन्हें वे बदले की राजनीति का हिस्सा मानते हैं.विवादों के बावजूद वो बंगाल में बीजेपी का सबसे मुखर चेहरा हैं. शुभेंदु और ममता की यह सियासी दुश्मनी इस बात का सटीक उदाहरण है कि राजनीति में न कोई पक्का दोस्त होता है और न ही कोई पक्का दुश्मन. अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि नंदीग्राम का यह नायक, जिसने लेफ्ट को गिराया और फिर ‘दीदी’ को चुनौती दी, वह आने वाले समय में बंगाल की सत्ता का समीकरण कैसे बदलेगा।
