MLC चुनाव से पहले बिहार में होगी बड़ी उलटफेर,’ऑपरेशन कमल’ की दिखने लगी आहट

 MLC चुनाव से पहले बिहार में होगी बड़ी उलटफेर,’ऑपरेशन कमल’ की दिखने लगी आहट
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राज्यसभा चुनाव में बिहार में ‘खेल’ हुआ और एनडीए को सभी पांचों सीट पर जीत मिल गई. विपक्ष के पास 41 विधायक होने के बावजूद आरजेडी कैंडिडेट हार गए. अब राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि एमएलसी चुनाव से पहले विपक्ष में बड़ी भगदड़ मचने वाली है. इसके संकेत मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने मीडिया के साथ बातचीत के दौरान भी दिए थे. लालू यादव के बड़े बेटे तेजप्रताप यादव भी आरजेडी में टूट की बात कर रहे हैं. वहीं, एनडीए का दावा है कि विपक्ष में नामलेवा भी नहीं बचेगा.बिहार में अगले महीने एक दर्जन सीटों पर विधान परिषद का चुनाव होना है. एमएलसी की चार सीट अभी खाली है. जून में 7 और खाली हो जाएगी. मंगल पांडे के विधायक बनने के बाद जो सीट खाली हुई है, उस पर चुनाव आयोग ने चुनाव की तिथि भी घोषित कर दी है. भोजपुर-बक्सर लोकल बॉडी विधान परिषद सीट के चुनाव की घोषणा भी चुनाव आयोग ने कर दी है. जल्द 10 और सीटों पर चुनाव की घोषणा होगी और सभी विधानसभा के माध्यम से भरे जाएंगे।पिछले दिनों जिस तरह से सीएम सम्राट चौधरी ने विपक्ष में टूट के संकेत दिए हैं, उससे साफ है कि एमएलसी चुनाव से पहले ही यानी अगले कुछ दिनों में नतीजे देखने को मिल सकते हैं. इस पर निशाने पर कांग्रेस के साथ-साथ आरजेडी भी है. हालांकि बीजेपी का कहना है कि आरजेडी विधायकों को अपने नेता तेजस्वी यादव पर भरोसा नहीं है, इसलिए वे लोग पाला बदलना चाहते हैं. प्रवक्ता सुमित सुशांत का दावा है कि सभी विधायक हमारे नेताओं के संपर्क में हैं.जेडीयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव रंजन का कहना है कि विपक्ष में टूट स्वाभाविक है. इसके लिए सत्ता पक्ष को कोशिश करने की भी जरूरत नहीं है. वे कहते हैं कि एक तरफ राहुल गांधी की अगुवाई में कांग्रेस पूरे देश में बिखर चुकी है, वहीं दूसरी तरफ तेजस्वी यादव के कारण आरजेडी लगातार कमजोर होता जा रहा है. अगर आने वाले वक्त में राष्ट्रीय जनता दल खत्म भी हो जाए तो आश्चर्य नहीं होना चाहिए.हालांकि पूर्व विधानसभा अध्यक्ष और आरजेडी नेता उदय नारायण चौधरी का कहना है कि विधायकों को खरीदने की कोशिश हो रही है. लगातार तोड़-फोड़ की कोशिश हो रही है लेकिन विपक्ष के विधायक कमजोर नहीं है. हम लोगों को अपने विधायकों पर पूरा भरोसा है. उन्होंने एमएलसी चुनाव में जीत का दावा भी किया.सत्ता पक्ष की तरफ से जिस प्रकार से दावे हो रहे हैं, वैसे में अगर वाकई विपक्ष में बड़ी टूट होती है तो विधानसभा में पूरा नजारा बदल सकता है. आरजेडी को विधानसभा चुनाव में केवल 25 सीट पर जीत मिली है. ऐसे में एक भी विधायक अलग हुए तो तेजस्वी यादव को नेता प्रतिपक्ष का पद गंवाना पड़ सकता है.वैसे राज्यसभा चुनाव के दौरान आरजेडी विधायक फैसल रहमान ने वोटिंग में भाग नहीं लिया था. जिस वजह से राज्यसभा चुनाव में हार का सामना करना पड़ा लेकिन उसके बावजूद नेता प्रतिपक्ष की कुर्सी ना चला जाए, इसी डर से पार्टी ने अपने ‘बागी’ विधायक पर कोई कार्रवाई नहीं की.हालांकि राजनीतिक विशेषज्ञ अरुण पांडे कहते हैं कि नेता प्रतिपक्ष की कुर्सी विधायकों की संख्या कम होने के बाद भी मिल सकता है. 2010 चुनाव में अब्दुल बारी सिद्दीकी को नेता प्रतिपक्ष बनाया गया था. उस समय आरजेडी को केवल 22 सीट ही मिली थी.

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यह पूरी तरह से विधानसभा अध्यक्ष पर निर्भर करता है कि वह नेता प्रतिपक्ष की कुर्सी तय संख्या बल से कम होने पर भी सबसे बड़े दल के नेता को सौंप सकते हैं.एनडीए में बीजेपी के पास फिलहाल 88 विधायक हैं. जेडीयू के पास 85 विधायक, लोजपा रामविलास के पास 19 विधायक, हम के पास पांच विधायक और राष्ट्रीय लोक मोर्चा के पास चार विधायक हैं. नितिन नबीन के राज्यसभा सांसद बनने के बाद बांकीपुर की सीट खाली है. दूसरी तरफ विपक्ष में आरजेडी सबसे बड़ी पार्टी है और उसके 25 विधायक हैं. कांग्रेस में 6 विधायक हैं, जिसमें से तीन विधायकों ने राज्यसभा चुनाव में बागी तेवर दिखाया था. वामदलों के पास तीन विधायक है. आईआईपी के एक विधायक है और बसपा के भी एक विधायक है. वहीं ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम के पांच विधायक हैं.एनडीए की नजर पहले से कांग्रेस, एआईएमआईएम और बहुजन समाज पार्टी पर है. एनडीए नेताओं की मानें तो कांग्रेस-आरजेडी के विधायक तैयार बैठे हैं. हालांकि कांग्रेस के विधायक अभी कुछ भी बोलने से बच रहे हैं. आईआईपी के एक मात्र विधायक इंद्रजीत गुप्ता पहले ही बयान दे चुके हैं कि अगर उनकी मांग मान ली जाती है तो सरकार के साथ हैं. जहां तक बसपा का सवाल है तो पहले भी उसके विधायक पाला बदलते रहे हैं.ऐसे में अब सब की नजर आरजेडी पर लगी है, क्योंकि बिहार में अभी मंत्रिमंडल का विस्तार होना है. 33 मंत्री और बनाए जाने हैं और फिर एमएलसी चुनाव भी है. ऐसे में मई का महीना बिहार में राजनीतिक उथल-पुथल को लेकर महत्वपूर्ण होने वाला है।16 मार्च को बिहार में राज्यसभा की 5 सीटों पर चुनाव हुए थे. एक सीट पर जीत के लिए 41 विधायकों का समर्थन जरूरी थी. महागठबंधन के 35 विधायकों के साथ-साथ एआईएमआईएम के 5 और बीएसपी के एक विधायक के सपोर्ट से जीत तय थी लेकिन आरजेडी के एक और कांग्रेस की तीन विधायकों ने वोटिंग में हिस्सा नहीं लिया. वोट नहीं देने वालों में आरजेडी विधायक फैसल रहमान (ढाका), कांग्रेस के सुरेंद्र मेहता (वाल्मिकी नगर), मनोहर प्रसाद सिंह (मनिहारी) और मनोज विश्वास (फारबिसगंज) शामिल थे।

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