2026 में शीर्ष पर पहुंची भाजपा,बिहार में सबसे अधिक मजबूत हुआ संगठन
भारतीय जनता पार्टी को बिहार में विस्तार और मजबूती की कई सालों की तपस्या का फल आखिरकार मिल ही गया. पिछले 20 सालों के राजनीतिक मानचित्र पर नजर डालें, तो ‘S’ फैक्टर पार्टी के लिए ‘गेमचेंजर’ और ‘सत्ता की वाहक’ साबित हुई है. पार्टी के लिए यह एक अनूठा और सुखद संयोग है कि बिहार में बीजेपी का सांगठनिक उत्कर्ष और सत्ता में भागीदारी का ग्राफ हमेशा ‘S’ नाम वाले नेतृत्व के इर्द-गिर्द घूमता रहा है.भारतीय जनता पार्टी ने दो दशक के संघर्ष के बाद बिहार में सत्ता हासिल की है. पहली बार पार्टी का कोई नेता मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुंचा है. लंबी यात्रा के दौरान एक सुखद संयोग यह रहा कि भाजपा ने जब-जब ‘S’ नाम के नेता को कमान सौंपी, तब-तब पार्टी सरकार और संगठन के लेवल पर मजबूत हुई.बिहार की सियासत में भारतीय जनता पार्टी का सफर लंबा और संघर्षपूर्ण रहा है. तकरीबन दो दशकों की मेहनत के बाद पार्टी सत्ता के शीर्ष पर पहुंची है. पूरे राजनीतिक सफर में एक दिलचस्प पैटर्न सामने आता है.’एस फैक्टर’ भाजपा के लिये गेम चेजर साबित हुई है. यानी जब-जब प्रदेश बीजेपी की कमान ऐसे नेताओं के हाथ में रही, जिनका नाम ‘S’ से शुरू होता है, तब-तब पार्टी ने सत्ता में मजबूत हिस्सेदारी हासिल हुई.सुशील मोदी बिहार भाजपा के कद्दावर नेताओं में शुमार थे. 2005 में जब सुशील मोदी भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष थे, तब पार्टी को और अप्रत्याशित सफलता मिली और पहली बार बिहार में एनडीए की सरकार बनी. भाजपा 2005 के चुनाव में मजबूती से उभर कर सामने आई.बिहार में बीजेपी की सत्ता में मजबूत एंट्री साल 2005 में हुई, जब एनडीए की सरकार बनी. पहली बार सुशील मोदी उपमुख्यमंत्री बने. भारतीय जनता पार्टी को अक्टूबर के विधानसभा चुनाव में 55 सीटों पर जीत हासिल हुई थी।भारतीय जनता पार्टी ने राष्ट्रीय जनता दल से भाजपा में आए संजय जायसवाल को भी बड़ी जिम्मेदारी दी. संजय जायसवाल को पार्टी ने 2020 में प्रदेश अध्यक्ष बनाया. संजय जायसवाल के नेतृत्व में पार्टी बड़ी पार्टी बनी.बीजेपी ‘बड़ी पार्टी बनी. साल 2020 के विधानसभा चुनाव में संजय जायसवाल के नेतृत्व में बीजेपी ने ऐतिहासिक प्रदर्शन किया. पार्टी ने 74 सीटें जीतकर एनडीए में खुद को सबसे बड़ी पार्टी के रूप में स्थापित किया. यह वह दौर था जब बीजेपी ने गठबंधन में ‘बिग ब्रदर’ की भूमिका हासिल की. पार्टी को दो उपमुख्यमंत्री पद हासिल हुए तार किशोर प्रसाद और रेणु देवी को उपमुख्यमंत्री बनाया गया था.साल 2023 में भारतीय जनता पार्टी ने सम्राट चौधरी को भाजपा का प्रदेश अध्यक्ष बनाया.आक्रामक राजनीति के चलते सम्राट चौधरी को पार्टी ने मौका दिया और इसके बाद सम्राट चौधरी के नेतृत्व में बीजेपी ने और आक्रामक रणनीति अपनाई. संगठन विस्तार, सामाजिक समीकरण के जरिये राजनीतिक आक्रामकता के साथ पार्टी ने सत्ता में अपनी भूमिका को और भी मजबूत किया.

सम्राट चौधरी ने संगठन में मंडल- बूथ स्तर से लेकर प्रदेश स्तर तक पिछड़ों अति पिछड़ों और दलितों को जगह दी. इस दौर में बीजेपी पहली बार पूरी तरह लीडिंग पोजिशन में नजर आई. भारतीय जनता पार्टी सम्राट चौधरी के नेतृत्व में सरकार में आई और सम्राट चौधरी के साथ-साथ विजय सिन्हा उपमुख्यमंत्री बने. आपको बता दें कि 2025 के चुनाव में बिहार में भाजपा को अप्रत्याशित सफलता मिली और बीजेपी बिहार में सबसे बड़ी पार्टी बनी. भाजपा के कुल 89 विधायक चुनाव जीते.भारतीय जनता पार्टी ने 2025 में संजय सरावगी को प्रदेश अध्यक्ष बनाया. संजय सरावगी के कार्यकाल में पार्टी ने संगठनात्मक मजबूती पर जोर दिया. बूथ स्तर तक नेटवर्क को मजबूत करने और कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने की मुहिम चलाई गई. भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व में पहली बार 2026 में सरकार बनी और सम्राट चौधरी मुख्यमंत्री बने. नीतीश कुमार ने सम्राट चौधरी के पक्ष में कुर्सी छोड़ी।कुल मिलाकर देखा जाए तो बिहार बीजेपी के इतिहास में ‘S’ नाम वाले नेतृत्व का सिलसिला महज एक इत्तेफाक नहीं है, बल्कि सही समय पर सही नेतृत्व का चयन की रणनीति का परिणाम भी है. सुशील मोदी से शुरू हुआ सफर, जिसने भाजपा को राजद के वर्चस्व के खिलाफ खड़ा किया, आज सम्राट चौधरी के दौर में पार्टी को बड़े भाई की भूमिका में लेकर आ गई है. आंकड़े गवाही दे रहे हैं कि जब-जब इन नेताओं ने कमान संभाली, बीजेपी का स्ट्राइक रेट बेहतर हुआ है।
