बीजेपी-RSS पर तेजस्वी के तंज का समझिए असली मायने,बीते दिन के बयान से गरमाई सियासत

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बिहार विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने संसद में महिला आरक्षण बिल के वर्तमान स्वरूप को लेकर केंद्र सरकार और सत्ता पक्ष पर जमकर निशाना साधा है. तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया कि सरकार इस बिल को किसी नेक मंशा से नहीं, बल्कि एक सोची-समझी साजिश के तहत लेकर आई थी. उन्होंने साफ किया कि विपक्ष की मजबूती के कारण ही सरकार अपनी मंशा में सफल नहीं हो सकी. तेजस्वी ने तंज कसते हुए कहा कि हम लोग हमेशा महिलाओं के हित में खड़े रहे हैं, लेकिन सत्ता पक्ष का दोहरा चरित्र इस बात से झलकता है कि वे एक तरफ बिल की बात करते हैं और दूसरी तरफ महिलाओं से पैर धुलवाते हैं.नेता प्रतिपक्ष ने सीधे तौर पर केंद्र सरकार की टाइमिंग पर सवाल उठाते हुए कहा कि 5 राज्यों के आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए आनन-फानन में इस बिल को पेश किया गया था. तेजस्वी यादव के अनुसार, सरकार को भली-भांति यह पता था कि उनके पास 2/3 बहुमत नहीं है और यह बिल पास नहीं हो पाएगा. उनकी मंशा बिल पास कराने की थी ही नहीं, बल्कि वे चाहते थे कि यह बिल गिर जाए. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने जानबूझकर ऐसी परिस्थितियां पैदा कीं ताकि विपक्ष पर ठीकरा फोड़ा जा सके.संविधान और अधिकारों का जिक्र करते हुए तेजस्वी यादव ने कहा कि जनता की नजरों में धूल झोंकने के लिए ही इस तरह के पैंतरे अपनाए जा रहे हैं. उन्होंने आशंका जताई कि सत्ता पक्ष बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर के बनाए संविधान को बदलने की फिराक में रहता है, जिसे विपक्ष किसी भी कीमत पर सफल नहीं होने देगा. उन्होंने सवाल उठाया कि अगर सरकार को वास्तव में महिलाओं की चिंता है, तो वे पिछड़ा वर्ग (OBC) की महिलाओं की हकमारी क्यों कर रहे हैं?तेजस्वी यादव ने महिला आरक्षण बिल में सबसे बड़ी खामी को उजागर करते हुए ‘कोटे के अंदर कोटे’ (OBC आरक्षण) की मांग को दोहराया. उन्होंने सवाल किया, “इस बिल में कोटे के अंदर कोटे की व्यवस्था क्यों नहीं की गई? अगर आपकी नीयत साफ थी, तो ओबीसी महिलाओं को इसमें जगह क्यों नहीं मिली?” उन्होंने अंत में कहा कि पांच राज्यों के चुनाव के कारण विपक्ष को बदनाम करने की यह सरकारी साजिश अब जनता के सामने पूरी तरह बेनकाब हो चुकी है।शुक्रवार को संसद के निचले सदन में वर्ष 2029 के लोकसभा चुनाव से महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण लागू करने के उद्देश्य से विधेयक पेश किया गया था. हालांकि, संविधान संशोधन की अनिवार्य शर्तों को पूरा न कर पाने के कारण यह बिल पास नहीं हो सका.

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सदन में वोटिंग के दौरान संविधान (131वां) संशोधन विधेयक 2026 के पक्ष में 298 मत पड़े, जबकि इसके विरोध में 230 वोट दर्ज किए गए. नियमतः किसी भी संविधान संशोधन विधेयक को पारित करने के लिए सदन के दो तिहाई (2/3) सदस्यों का समर्थन अनिवार्य होता है.दूसरी ओर, बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी द्वारा दिए गए उस बयान पर भी विवाद खड़ा हो गया है जिसमें उन्होंने कहा था कि ‘अधूरे काम को बिहार में तेज़ी से आगे बढ़ाना है.’ इस पर पलटवार करते हुए तेजस्वी यादव ने कहा कि यह बात सार्वजनिक रूप से कहने की ज़रूरत ही क्यों पड़ रही है? तेजस्वी ने सवालिया लहजे में पूछा, “मुख्यमंत्री को तो काम करके दिखाना चाहिए, उसके लिए बोलने की क्या आवश्यकता है? चाहे शराबबंदी का मामला हो या अन्य विकास कार्य, क्या इनके लिए कोई नया कैबिनेट फैसला लिया गया है?”तेजस्वी यादव ने मुख्यमंत्री को उनके पुराने वादों की याद दिलाते हुए कहा कि सरकार पहले उन वादों को पूरा करे जो उसने जनता से किए थे. उन्होंने कहा कि एक करोड़ युवाओं को रोजगार देने और राज्य के सभी जिलों में फैक्ट्रियां लगाने का वादा अभी तक अधूरा है. तेजस्वी ने राज्य की आर्थिक स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा, “बिहार का खजाना वर्तमान में खाली है, सरकार को इस पर ध्यान देना चाहिए कि उसे कैसे भरा जाए. नीति आयोग की रिपोर्ट में बिहार आज भी 30वें नंबर पर है. मुख्यमंत्री को यह बताना चाहिए कि वे इसे विकास के मामले में शीर्ष पांच राज्यों में कैसे लाएंगे?हमला जारी रखते हुए नेता प्रतिपक्ष ने सम्राट चौधरी को ‘सिलेक्टेड मुख्यमंत्री’ करार दिया. उन्होंने कहा कि उनके कहने मात्र से ज़मीनी हकीकत नहीं बदलने वाली है. तेजस्वी के अनुसार, सरकार के पास राज्य को पिछड़ापन से उबारने का कोई ठोस रोडमैप नहीं है और वे केवल बयानबाजी के जरिए जनता का ध्यान भटकाने की कोशिश कर रहे हैं. विपक्ष ने साफ कर दिया है कि जब तक सरकार आम लोगों और युवाओं के हितों के लिए ठोस कदम नहीं उठाती, तब तक सदन से सड़क तक संघर्ष जारी रहेगा।

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