मंगल पांडे को नई सरकार में मिलेगी बड़ी जिम्मेदारी,विजय सिन्हा होंगे बड़े मंत्रालय के दावेदार

 मंगल पांडे को नई सरकार में मिलेगी बड़ी जिम्मेदारी,विजय सिन्हा होंगे बड़े मंत्रालय के दावेदार
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एनडीए की तरफ से बिहार में सत्ता हस्तांतरण की तैयारी अंतिम दौर में है. अंतिम कैबिनेट करने के बाद नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने का मन बना लिया है. बीजेपी और जेडीयू के बीच समझौता का रोड मैप तैयार हो रहा है. नई सरकार में कई नेताओं की भूमिका भी बदलने वाली है. सम्राट चौधरी और निशांत कुमार ताकतवर होकर उभर सकते हैं.भीषण गर्मी के तपिश के बीच बिहार बड़े बदलाव की ओर है. सत्ता और शासन का केंद्र भी बदलने जा रहा है. नीतीश कुमार ने राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ ले ली है और अब वह मुख्यमंत्री पद छोड़ने की तैयारी में है. नीतीश कुमार ने केंद्र की राजनीति में जाने का मन बना लिया है. बिहार में भी ताज बदलने की तैयारी है. भाजपा और जदयू में इस बात को लेकर कसमकश है कि बिहार का ताज किसके सिर बंधेगा?भले ही मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पद त्याग करने जा रहे हैं लेकिन बिहार की सियासत में उनका दखल काम नहीं होने वाला है. नीतीश कुमार की पार्टी जनता दिल्ली यूनाइटेड के 85 विधायक, 12 सांसद, 5 राज्यसभा सदस्य और 19 विधान पार्षद हैं. आज की तारीख में नीतीश कुमार एक ताकतवर नेता है और जनता दल यूनाइटेड के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं. ऐसे में सरकार जो भी चलाए प्रभाव तो नीतीश कुमार का ही रहेगा.मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्‍यसभा जाने और नई सरकार के गठन की प्रक्रिया तेज होने के साथ ही कई बड़े नेताओं की भूमिका बदलने वाली है और नेताओं के माथे पर चिंता की लकीरें साफ दिख रही है. नेताओं की चिंता इस बात को लेकर है कि वर्तमान में जिस पद पर वह आसीन हैं, वह पद कायम रहेगा या नहीं।ऐसा इसलिए भी कहा जा रहा है, क्योंकि बिहार के अंदर राजनीतिक समीकरण बदल रहे हैं. मुख्यमंत्री बदलने के साथ ही सरकार के अंदर भारतीय जनता पार्टी अब जनता दल यूनाइटेड वाली भूमिका में आ जाएगी और बीजेपी की मौजूदा वाली स्थिति में जेडीयू चला जाएगा. यानी बड़े भाई और छोटे भाई की भूमिका बदल जाएगी.सबसे बड़ी चर्चा मुख्यमंत्री पद को लेकर है. पहले बीजेपी विधायक दल की बैठक होगी और उसके बाद एनडीए विधायक दल के बैठक में मुख्यमंत्री का चेहरा तय होना है. मौजूदा डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी रेस में सबसे आगे दिख रहे हैं. राजनीतिक रोड मैप को अंतिम रूप देने के लिए केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान भी बतौर पर्यवेक्षक बिहार पहुंच चुके हैं. मंगलवार को भाजपा विधायक दल की बैठक होने वाली है।मिल रही जानकारी के मुताबिक 14 अप्रैल को देर शाम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी बिहार पहुंच रहे हैं. पीएम पटना स्थित लोकभवन में रात्रि विश्राम करेंगे और फिर उसके बाद शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होंगे. प्रधानमंत्री के आगमन को लेकर प्रशासनिक तैयारी शुरू हो चुकी है. शपथ ग्रहण समारोह बड़े ही सादगी के साथ आयोजित करने की तैयारी है.सबसे अधिक चर्चा सम्राट चौधरी की है. वर्तमान में सम्राट चौधरी विधानमंडल दल के नेता हैं और सरकार में उपमुख्यमंत्री भी हैं. अगर भाजपा पहली बार बिहार में अपने नेतृत्व में सरकार बनाती है तो सम्राट चौधरी की भूमिका डिप्टी सीएम से बढ़कर मुख्यमंत्री की हो सकती है. सम्राट चौधरी के सरकारी आवास पर राजनीतिक गतिविधि बढ़ी हुई है. ललन सिंह और संजय झा सम्राट चौधरी के आवास पर जाकर मुलाकात कर चुके हैं तो लोक भवन के अधिकारियों का मूवमेंट भी सम्राट चौधरी के आवास की ओर हो रहा है.

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बिहार में दूसरे उपमुख्यमंत्री के रूप में विजय सिन्हा काम कर रहे हैं. अब उनकी भूमिका बदल सकती है. ऐसा इसलिए, क्योंकि जब जेडीयू की सरकार थी तो बीजेपी कोटे के दो नेता उपमुख्यमंत्री थे लेकिन अब बीजेपी का मुख्यमंत्री होने जा रहा है. ऐसी स्थिति में माना जा रहा है कि दोनों डिप्टी सीएम इस बार जेडीयू कोटे से होगा. विजय सिन्हा को सरकार और संगठन के बीच समन्वय की बड़ी जिम्मेदारी मिल सकती है.प्रेम कुमार भाजपा के वरिष्ठ नेता हैं और अति पिछड़ा समाज से आते हैं. अभी वह विधानसभा के अध्यक्ष हैं लेकिन जो राजनीतिक समीकरण बनने जा रहे हैं, उस हिसाब से जनता दल यूनाइटेड ने विधानसभा अध्यक्ष पद पर दावा किया हुआ है. इस पद को लेकर भाजपा और जेडीयू के बीच जबर्दस्त खींचतान है. अगर विधानसभा अध्यक्ष पद जदयू के खाते में जाता है तो प्रेम कुमार की भूमिका बदल सकती है।वर्तमान में विधानसभा और विधान परिषद दोनों जगह पर भाजपा के नेता काबिज हैं. विधानसभा में प्रेम कुमार जहां विधानसभा अध्यक्ष हैं, वहीं विधान परिषद में अवधेश नारायण सिंह सभापति हैं. सवाल यह उठता है कि जदयू की भूमिका बदलती है तो क्या अवधेश नारायण सिंह सभापति बने रहेंगे या फिर जदयू अपने दल के किसी नेता को उस कुर्सी तक पहुंचाना चाहेगा?मंगल पांडे बिहार भाजपा के ताकतवर नेता है और फिलहाल को स्वास्थ्य मंत्रालय का जिम्मा संभाल रहे हैं. वर्तमान समीकरण के हिसाब से स्वास्थ्य मंत्रालय जेडीयू कोटे में जाने के आसार हैं. अगर स्वास्थ्य मंत्रालय पर जदयू दावा करती है तो वैसे स्थिति में मंगल पांडे को शिक्षा या फिर ग्रामीण विकास विभाग की जिम्मेदारी दी जा सकती है.बात अगर निशांत कुमार की कर ले तो निशांत कुमार की एंट्री सरकार में होने जा रही है. निशांत कुमार उपमुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ले सकते हैं और जदयू का दवा गृह विभाग पर है. नीतीश कुमार जब मुख्यमंत्री थे तो भाजपा ने गृह विभाग पर दावा ठोका था और सम्राट चौधरी गृह मंत्री बने थे. निशांत कुमार को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी देने की तैयारी है।नीतीश के करीबी विजय चौधरी जनता दल यूनाइटेड के कद्दावर नेता हैं. वर्तमान में वह संसदीय कार्य मंत्री हैं. सूत्रों से मिल रही जानकारी के मुताबिक अगर जनता दल यूनाइटेड के पक्ष में विधानसभा अध्यक्ष का पड़ जाता है तो वैसे स्थिति में विजय चौधरी को विधानसभा अध्यक्ष बनाया जा सकता है.नालंदा से आने वाले श्रवण कुमार जदयू के मजबूत कड़ी हैं और नीतीश कुमार के पास एक ताकतवर नेता माने जाते हैं. श्रवण कुमार 2005 से ग्रामीण विकास विभाग देख रहे हैं. इस बार यह विभाग भाजपा कोटा में जाने के आसार हैं. अगर ऐसा होता है तो श्रवण कुमार को कोई और विभाग दिया जा सकता है.विजेंद्र यादव जदयू के सबसे वरिष्ठ नेता हैं और लंबे समय से विधायक हैं. जब से बिहार में एनडीए की सरकार है, तब से विजेंद्र यादव ऊर्जा मंत्री का कार्यभार संभाल रहे हैं. समीकरण बदलने की स्थिति में ऊर्जा विभाग भाजपा कोटा में जा सकता है और ऐसा होता है तो विजेंद्र यादव को कोई दूसरा विभाग मिलना तय माना जा रहा है।

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