इंडिया ने अरुणाचल पर चीन के द्वारा किए गए दावों को किया खारिज,मनगढ़ंत कहानियों से बढ़ेगा तनाव
भारत ने साफ-साफ शब्दों में कहा है कि चीन द्वारा भारतीय क्षेत्र को ‘काल्पनिक नाम’ देना और ‘निराधार विमर्श’ गढ़ना वास्तविकता को नहीं बदल सकता, लेकिन इससे द्विपक्षीय संबंधों को सामान्य बनाने के प्रयासों पर असर जरूर पड़ सकता है. नई दिल्ली की तीखी प्रतिक्रिया बीजिंग द्वारा अक्साई चिन में एक तीसरे नए काउंटी (प्रशासनिक इकाई) की स्थापना की पृष्ठभूमि में आई है. भारत अक्साई चिन को अपना संप्रभु क्षेत्र मानता है. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, “भारत, चीन द्वारा भारत की भूमि के अंतर्गत आने वाले स्थानों को मनगढ़ंत नाम देने के किसी भी शरारती प्रयास को स्पष्ट रूप से खारिज करता है।उन्होंने कहा, “चीन द्वारा झूठे दावे पेश करने और निराधार विमर्श गढ़ने के ऐसे प्रयास इस निर्विवाद वास्तविकता को नहीं बदल सकते कि अरुणाचल प्रदेश सहित ये स्थान और क्षेत्र भारत का अभिन्न एवं अविभाज्य हिस्सा थे, हैं और हमेशा रहेंगे.” जायसवाल ने कहा कि चीनी पक्ष के ऐसे प्रयास “भारत-चीन द्विपक्षीय संबंधों को स्थिर और सामान्य बनाने की कवायद से ध्यान भटकाती हैं”. उन्होंने कहा, “चीन को ऐसे कार्यों से बचना चाहिए, जो संबंधों में नकारात्मकता पैदा करते हैं और बेहतर समझ बनाने के प्रयासों को कमजोर करते हैं.”जायसवाल ने हालांकि मीडिया के एक सवाल का जवाब देते हुए उन क्षेत्रों का नाम स्पष्ट नहीं किया, लेकिन यह पता चला है कि नयी दिल्ली की टिप्पणियां बीजिंग द्वारा नए काउंटी के गठन की प्रतिक्रिया में थीं. चीन के शिनजियांग उइगर स्वायत्त क्षेत्र ने 26 मार्च को सेनलिंग काउंटी के निर्माण की घोषणा की, जो पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) और अफगानिस्तान के निकट स्थित एक रणनीतिक क्षेत्र है. यह कथित तौर पर भारत के साथ वास्तविक नियंत्रण रेखा के पश्चिमी क्षेत्र के भी करीब है.काराकोरम पर्वत शृंखला के निकट स्थित सेनलिंग, शिनजियांग में चीन द्वारा स्थापित तीसरी नई काउंटी है, जो मुख्य रूप से मुस्लिम उइगर बहुल क्षेत्र है. भारत ने पिछले साल हेआन और हेकांग काउंटी के निर्माण को लेकर चीन के साथ विरोध दर्ज कराया था, जिसमें कहा गया था कि उनके अधिकार क्षेत्र का कुछ हिस्सा उसके केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख के अंतर्गत आता है.

पूर्वी लद्दाख सीमा विवाद के बाद 2020 में दोनों देशों के संबंधों में भारी गिरावट आई. पिछले डेढ़ वर्षों में, दोनों पक्षों ने संबंधों को फिर से मजबूत करने के लिए कई कदम उठाए हैं.भारत ने इससे पहले भी अरुणाचल प्रदेश में कुछ स्थानों का चीन द्वारा नाम बदलने पर आपत्ति जताई थी, जिसमें पिछले साल मई और अप्रैल 2024 में किए गए बदलाव शामिल हैं. चीनी नागरिक मामलों के मंत्रालय ने 2017 में ज़ांगनान में छह स्थानों के मानकीकृत नामों की पहली सूची जारी की, जबकि 15 स्थानों की दूसरी सूची 2021 में जारी की गई, जिसके बाद 2023 में 11 स्थानों के नामों वाली एक और सूची जारी की गई. जांगनान अरुणाचल प्रदेश का चीनी नाम है. चीन, अरुणाचल प्रदेश को दक्षिणी तिब्बत का हिस्सा होने का दावा करता है।बता दें कि विदेश मंत्रालय का यह बयान चीन की उस रिपोर्ट के बाद आया है जिसमें उसने अरुणाचल प्रदेश के कुछ इलाकों के नए नाम जारी करने की कोशिश की थी। ऐसे में भारत ने इसे एक बार फिर राजनीतिक और भड़काऊ कदम बताया है और ऐसे सभी दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया है।चीन ने शातिराना चाल चलते हुए दिसंबर 2021 में भारत के 21 स्थानो के नाम बदलने का प्रयास किया। चीन इतना शातिर निकला कि अरुणाचल के 11 जिलों जिसमें तवांग से लेकर अंजों के स्टैंडर्ड नाम चीनी, तिब्बती और रोमन मे जारी कर दिया था। भारत ने तब चीन के इस कदम को अस्वीकार्य बताया और कहा था कि नए नाम रख देने से जमीनी सच्चाई नही बदल जाती। भारत ने कहा कि अरुणाचल प्रदेश भारत का अभिन्न अंग है और हमेशा रहेगा।इससे पहले 9 अप्रैल 2026 को अरुणाचल प्रदेश के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल केटी परनाइक (सेवानिवृत्त) ने गुरुवार को तवांग जिले में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के पास ‘खेन्जेमाने’ का दौरा किया था। वहां उन्होंने सैनिकों का मनोबल ऊंचा बनाए रखने और हर समय मानसिक रूप से सतर्क रहने के लिए प्रोत्साहित किया।लोक भवन के एक अधिकारी ने बताया कि दुर्गम इलाकों और कठोर मौसम के बीच स्थित यह सीमा चौकी भारत की सतर्कता और जुझारूपन का प्रतीक है। राज्यपाल की इस यात्रा को देश की सीमाओं की रक्षा करने वाले बलों के प्रति एकजुटता के एक सशक्त संकेत के रूप में देखा गया।
