चैत्र नवरात्रि में आज भी किया जाएगा कन्या पूजा?जानें तारीख,मुहूर्त,नियम और महत्व

 चैत्र नवरात्रि में आज भी किया जाएगा कन्या पूजा?जानें तारीख,मुहूर्त,नियम और महत्व
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चैत्र नवरात्रि के 9 दिनों में मां दुर्गा के 9 स्वरूपों की पूजा करते हैं. इसमें दुर्गा अष्टमी और महानवमी के दिन कन्या पूजा का विधान है. कन्याओं को देवी का स्वरूप माना जाता है, इस वजह से आज भी नवरात्रि में कन्या पूजा करते हैं. वैसे तो अष्टमी और नवमी को कन्या पूजा का ज्यादा प्रचलन है, लेकिन आप चाहें तो नवरात्रि के 9 दिन कन्या पूजा कर सकते हैं. आइए जानते हैं कि इस साल चैत्र नवरात्रि में कन्या पूजा कब है? कन्या पूजा का मुहूर्त और नियम क्या हैं?

दुर्गा अष्टमी कन्या पूजा: 26 मार्च, गुरुवार
महानमी कन्या पूजा: 27 मार्च, शुक्रवार

चैत्र नवरात्रि 2026 कन्या पूजा मुहूर्त:

26 मार्च को शोभन योग में कन्या पूजा होगी. शुभ-उत्तम मुहूर्त 06:18 ए एम से 07:50 ए एम तक है, उसके बाद चर-सामान्य मुहूर्त 10:55 ए एम से 12:27 पी एम, लाभ-उन्नति मुहूर्त 12:27 पी एम से 01:59 पी एम तक है.
27 मार्च को कन्या पूजा सर्वार्थ सिद्धि योग, रवि योग और पुनर्वसु नक्षत्र में होगी. उस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग 06:17 ए एम से 03:24 पी एम तक और रवि योग पूरे दिन है. वहीं अभिजीत मुहूर्त 12:02 पी एम से 12:51 पी एम तक है. उस दिन लाभ-उन्नति मुहूर्त 07:50 ए एम से 09:22 ए एम तक है. इस समय में आप कन्या पूजा कर सकते हैं।

कन्या पूजा के नियम:

कन्या पूजा में 2 से लेकर 9 की संख्या तक बालिका और 1 बालक को रखना चाहिए.
कन्याओं और बालक को उत्तर या पूर्व दिशा की ओर मुख करके बैठाना चाहिए.
व्रती उनका स्वागत करें. उनको बैठने के लिए आसन दें.
उनका पूजन करें और फिर उनको खीर, पूड़ी, हलवा, चना, मिठाई आदि परोसें.
जब वे भोजन कर लें, तो उनको उपहार और दक्षिणा देकर विदा करें.
उस समय उनको फिर अगले वर्ष आने का निवेदन करना चाहिए.
कन्या पूजा में 2 साल से 10 साल तक की बालिका को आमंत्रित करना चाहिए।

कन्या पूजा का महत्व:

नवरात्रि में कन्या पूजा करने से सुख, समृद्धि, सफलता, आरोग्य आदि की प्राप्ति होती है. एक कन्या की पूजा से ऐश्वर्य मिलता है, 2 कन्या की पूजा से भोग प्राप्त होगा, 3 कन्याओं की पूजा करने से पुरुषार्थ बढ़ता है, 4 से 5 कन्याओं की पूजा करने से ज्ञान, बुद्धि और विद्या में बढ़ोत्तरी होती है. 6 कन्याओं की पूजा करने पर सफलता मिलती है. वहीं 7 कन्याओं की पूजा करने से परमपद मिलता है, जबकि 8 कन्याओं की पूजा करने से अष्टलक्ष्मी की प्राप्ति होती है, वहीं 9 कन्याओं की पूजा करने वालों को सभी प्रकार के ऐश्वर्य और वैभव मिलते हैं।

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