यूपी चुनाव में फिर से भाजपा का दिखेगा जलवा,OBC को साधने के लिए पार्टी ने बनाया नया प्लान
उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव में अभी एक साल का वक्त है, लेकिन राज्य में सत्तारुढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) अभी से चुनावी तैयारियों में लग गई और सामाजिक समीकरण साधने में जुट गई है. बताया जा रहा है कि अगले महीने अप्रैल के मध्य तक यूपी में 2 बड़े फैसले लिए जाने हैं और इसके जरिए वोट बैंक का खास ध्यान रखा जाएगा.अगले महीने योगी आदित्यनाथ कैबिनेट का दूसरा विस्तार और अलग-अलग आयोगों, बोर्डों तथा निगमों में सैकड़ों खाली पदों को भरा जाना, ये 2 अहम प्रक्रिया होगी. लेकिन पूरी प्रक्रिया की फाइनल लिस्ट दिल्ली में तैयार होगी. पार्टी से जुड़े सूत्रों के अनुसार, कैबिनेट विस्तार संक्षिप्त लेकिन टॉरगेटेड होगा. फिलहाल राज्य में योगी कैबिनेट में छह मंत्री पद खाली हैं. इन्हें भरने के साथ कुछ वरिष्ठ मंत्रियों को संगठन में भी भेजा जाएगा तो कुछ नए चेहरों को मौका भी दिया जाएगा. कुछ मंत्रियों के विभागों में भी फेरबदल होगा, लेकिन शीर्ष स्तर पर कोई बड़ा फेरबदल नहीं किया जाएगा. इस बदलाव का मुख्य उद्देश्य क्षेत्रीय और सामाजिक असंतुलन को दूर करना है.दिसंबर 2025 में कुर्मी बिरादरी से आने वाले पंकज चौधरी को प्रदेश अध्यक्ष बनाकर बीजेपी ने ओबीसी समाज को मजबूत संदेश दिया था.

अब इस हफ्ते अति पिछड़ा वर्ग की निषाद बिरादरी की साध्वी निरंजन ज्योति को राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग का अध्यक्ष बनाकर पार्टी ने अपनी रणनीति और स्पष्ट कर दी है. सूत्र बताते हैं कि कैबिनेट विस्तार और खाली पड़े पदों को भरने के दौरान अगड़ी जाति, गैर-यादव ओबीसी, अति-पिछड़ा और गैर-जाटव वोट बैंक को एक साथ साधने की कोशिश की जाएगी. वहीं वोट बैंक जिसकी बदौलत बीजेपी पिछले एक दशक से यूपी में अजेय रही है.यूपी में शुक्रवार से बैठक का सिलसिला शुरू हो गया है. आज और कल संघ-बीजेपी समन्वय समिति, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, सह-सरकार्यवाह अरुण कुमार, प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी, दोनों डिप्टी CM ब्रजेश पाठक और केशव प्रसाद मौर्या के अलावा संघटन मंत्री धर्मपाल सिंह के साथ अहम बैठकें हुई. सूत्रों का कहना है कि कुछ और बैठकें भी होनी हैं. इसके बाद पूरी सूची को अंतिम रूप देने के लिए दिल्ली में उच्चस्तरीय बैठक बुलाई जाएगी.प्रदेश के 12 बड़े आयोगों, बोर्डों और निगमों में सैकड़ों पद अभी भी खाली पड़े हैं. मनोनीत पार्षदों के पद भी लंबे समय से रिक्त हैं. आपसी खींचतान और सहमति नहीं बन पाने के कारण ये पद भर नहीं पाए थे. अब केंद्रीय नेतृत्व ने साफ निर्देश दे दिया है कि अप्रैल के मध्य तक इन पदों को हर हाल में भरा जाए.पार्टी के रणनीतिकार मानते हैं कि 2024 से पहले वाला मजबूत वोट बैंक फिर से जोड़ने के लिए सामाजिक समीकरण सबसे जरूरी है. कैबिनेट विस्तार और आयोग-निगमों में नियुक्तियां इसी लक्ष्य को पूरा करेंगी. वरिष्ठ पत्रकार राजेंद्र कुमार कहते है कि इन पदों पर ऐसे चेहरों को तरजीह दी जाएगी जो अलग-अलग जातीय समीकरणों को संतुलित करें और पार्टी की पहुंच हर वर्ग तक बढ़ाए.बीजेपी नेतृत्व का मानना है कि इन कदमों से न सिर्फ संगठन मजबूत होगा बल्कि अगले साल होने वाले चुनाव के दौरान कोई भी सामाजिक वर्ग नाराज नहीं रहेगा. अब देखना यह है कि अगले महीने अप्रैल तक दिल्ली से जारी होने वाली फाइनल लिस्ट कितने नए चेहरों को मौका देती है और कितना सामाजिक संतुलन साध पाती है.
