तीसरी बार जेडीयू का अध्यक्ष बनने जा रहे हैं नीतीश कुमार?नहीं छोड़ना चाहते है पार्टी की कमान
2003 में जब से जनता दल यूनाइटेड का गठन हुआ था, तब से नीतीश कुमार ही तमाम फैसले लेते रहे हैं. हालांकि राष्ट्रीय अध्यक्ष पद की कमान शरद यादव की ‘बगावत’ के बाद संभाली. बीच में आरसीपी सिंह और ललन सिंह को भी राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया लेकिन उसके बाद से जेडीयू की कमान अपने पास रख ली. अब तीसरी बार राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने जा रहे हैं. नीतीश कुमार मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़ेंगे, क्योंकि राज्यसभा के सदस्य चुने जा चुके हैं. ऐसे में राजनीतिक विशेषज्ञ कह रहे हैं कि वह आगे क्या करेंगे, किसी को नहीं पता लेकिन इतना तय है कि दिल्ली जाकर भी बिहार की सरकार पर अपनी पकड़ बनाए रखेंगे। 2003 में पहली बार जॉर्ज फर्नांडिस राष्ट्रीय अध्यक्ष बने थे. उसके बाद 2006 से शरद यादव राष्ट्रीय अध्यक्ष थे. जेडीयू में पहले दो ही बार राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने का प्रावधान था लेकिन शरद यादव के लिए 2013 में पार्टी में संशोधन किया गया और वह तीसरी बार भी इस पर काबिज हुए.

बाद में नीतीश कुमार के साथ विवाद के चलते 2016 में उनको पद छोड़ना पड़ा।शरद यादव के बाद नीतीश कुमार ने राष्ट्रीय अध्यक्ष पद की कमान संभाली. पहली बार नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री रहते इस पद को भी संभाला. 27 दिसंबर 2020 को नीतीश कुमार ने इस पद को छोड़ते हुए अपने खास आरसीपी सिंह को राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया था. वहीं, आरसीपी जब केंद्र में मंत्री बने, तब यह पद ललन सिंह के पास चला गया लेकिन लोकसभा चुनाव 2024 से पहले ललन सिंह ने राष्ट्रीय अध्यक्ष पद छोड़ दिया. 29 दिसंबर 2023 में नीतीश दूसरी बार राष्ट्रीय अध्यक्ष बने और तब से लगातार इस पद पर बने हुए हैं.अब तीसरी बार राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने जा रहे हैं. पहले माना जा रहा था कि निशांत या किसी अन्य नेता को ये जिम्मेदारी मिल सकती है लेकिन वह पार्टी की कमान अपने ही पास रखना चाहते हैं. प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा कहते हैं कि नीतीश कुमार तो हमेशा से हमारी पार्टी के नेता रहे हैं. आगे भी उनके नेतृत्व में ही पार्टी आगे बढ़ेगी.नीतीश कुमार राजनीति के अंतिम पारी भले ही खेल रहे हैं लेकिन राजनीति पर पकड़ उनकी कम नहीं हुई है. लोकसभा चुनाव के समय से ही कहा जा रहा है कि जेडीयू समाप्त होने वाली है लेकिन आज विधानसभा में पार्टी काफी मजबूत स्थिति में है. लोकसभा में भी बीजेपी के बराबर प्रदर्शन हुआ था. नीतीश कुमार अपने बेटे निशांत की भी पॉलिटिक्स में एंट्री करवा चुके हैं.नीतीश कुमार के साथ एक बड़ा वोट बैंक है. बिहार में उन्होंने विकास के कई काम किए हैं. सड़क, बिजली, स्वास्थ्य, शिक्षा, महिला सशक्तिकरण और कानून व्यवस्था से राज्य की तस्वीर को काफी हदतक बदली है. नीतीश कुमार ने जो काम किया है, बिहार की जनता उसे जानती है और उसके कारण भी उनकी एक अलग इमेज है. मुख्यमंत्री की कुर्सी तो बीजेपी ले रही है लेकिन बिहार की राजनीति से पूरी तरह से अलग-अलग नीतीश कुमार को करना संभव नहीं है. ऐसे में राष्ट्रीय अध्यक्ष की कमान अपने पास रखकर वह एक मैसेज देने की कोशिश भी कर रहे हैं.दिल्ली में नीतीश कुमार की तरफ से राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिए नॉमिनेशन कर दिया गया है. राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा सहित पार्टी के बड़े नेता प्रस्तावक बने हैं. 22 मार्च राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के नॉमिनेशन का अंतिम दिन है. 24 मार्च नामांकन वापस लेने का अंतिम तिथि है. 27 मार्च चुनाव की तिथि तय की गई है. नीतीश कुमार के सामने पार्टी का कोई दूसरा लीडर आएगा, इसकी संभावना नहीं के बराबर है.ऐसे में 22 मार्च को ही साफ हो जाएगी कि वही तीसरी बार अध्यक्ष बनेंगे. हालांकि राष्ट्रीय अध्यक्ष की घोषणा राष्ट्रीय परिषद की बैठक में होगी और राष्ट्रीय कार्यकारिणी में मुहर लगेगी. राष्ट्रीय परिषद की बैठक 29 मार्च को पटना में प्रस्तावित है. इसमें बदलाव भी हो सकता है।
