असम में अकेले चुनाव लड़ेगी जेडीयू,बीजेपी के लिए बनेगी मुसीबत!

 असम में अकेले चुनाव लड़ेगी जेडीयू,बीजेपी के लिए बनेगी मुसीबत!
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इसी साल असम में विधानसभा का चुनाव होना है, वहां 10 सालों से भारतीय जनता पार्टी की सरकार है. बिहार की सत्ताधारी दल जेडीयू की तरफ से कोशिश हो रही है कि बीजेपी के साथ गठबंधन हो जाए. 2021 में नीतीश कुमार की पार्टी ने 37 सीटों पर चुनाव लड़ा था लेकिन किसी सीट पर जीत नहीं मिली. असम प्रभारी राजीव रंजन का कहना है कि इस बार बीजेपी अकेले चुनाव लड़ना चाहती है, इसलिए गठबंधन की संभावना कम है लेकिन हम लोग कुछ महत्वपूर्ण सीटों पर चुनाव लड़ेंगे.2021 में जेडीयू ने असम में कुल 126 विधानसभा सीटों में से 37 विधानसभा सीटों पर अपने उम्मीदवार खड़े किए थे. अधिकांश सीटों पर जेडीयू की जमानत जब्त हो गई थी. जेडीयू के उम्मीदवार 1,000 वोट भी हासिल नहीं कर सके. असम में जेडीयू के प्रदर्शन का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि जिस सीट पर सबसे ज्यादा उम्मीद थी, उसमें से रूपोहिहाट निर्वाचन क्षेत्र में केवल 478 वोट मिला. ढींग में जेडीयू उम्मीदवार को केवल 767 वोट मिला और बतद्रोबा में केवल 815 वोट मिला।मुख्यमंत्री नीतीश कुमार 2021 में चुनाव प्रचार में नहीं गए थे लेकिन पार्टी के कई मंत्री चुनाव प्रचार में कूदे थे. सबसे नजदीकी मंत्रियों में से एक श्रवण कुमार ने भी कई दिनों तक चुनाव प्रचार किया था. पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने भी असम में कैंप किया था. जेडीयू को बहुत उम्मीद थी कि असम में खाता खुलेगा लेकिन खाता नहीं खुला. 2021 विधानसभा चुनाव से पहले भी जेडीयू की तरफ से कई बार कोशिश की गई लेकिन न तो खाता खुला और न ही वोट प्रतिशत बेहतर हुआ. अब एक बार फिर से विधानसभा चुनाव में जेडीयू तैयारी कर रहा है. सीटों को लेकर फिलहाल मंथन चल रहा है.दिल्ली में असम चुनाव को लेकर पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ मंथन कर रहे हैं. अभी तक कुछ भी तय नहीं हो पाया है. हालांकि बीजेपी के साथ गठबंधन की गुंजाइश बेहद कम है. असम प्रभारी राजीव रंजन कहते हैं कि बीजेपी इस बार अकेले लड़ना चाहती है. लिहाजा हमलोग अपने दम पर चुनाव मैदान में उतरेंगे, इसकी तैयारी चल रही है.इस सवाल पर कि पिछली बार जेडीयू 37 सीटों पर चुनाव लड़ा था, क्या इस बार भी उतनी ही सीटों पर लड़ेंगे? राजीव रंजन ने कहा कि इस बार हम लोग इतनी सीटों पर तो नहीं लड़ेंगे लेकिन महत्वपूर्ण सीटों पर जरूर मजबूती से चुनाव लड़ेंगे।जेडीयू प्रभारी राजीव रंजन ने कहा कि असम में भी बड़ी संख्या में बिहार के लोग रहते हैं. ऐसे में हम लोग अभी उन सीटों को लेकर चर्चा कर रहे हैं.

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फिलहाल उन सीटों के नाम को बताना संभव नहीं है लेकिन जल्द ही हम लोग सारी जानकारी मीडिया के साथ साझा करेंगे.बिहार में सत्ता में सहयोगी जेडीयू के अलावे उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी राष्ट्रीय लोक मोर्चा भी है. उपेंद्र कुशवाहा के विधायक माधव आनंद का कहना है कि हम लोग असम में बीजेपी के साथ हैं. संगठन पर भी काम हो रहा है. माधव आनंद के बयान से साफ लग रहा है कि उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी असम में चुनाव लड़ने की स्थिति में नहीं है. बीजेपी को ही अपना समर्थन देगी.असम में 5% के करीब बिहारी और हिंदी भाषी वोटर हैं. इसी वोटर पर नीतीश कुमार और बिहार के प्रमुख दलों की नजर रहती है. असम की तिनसुकिया जिला में बड़ी संख्या में हिंदी भाषी और उसमें भी बिहारी की संख्या अच्छी खासी है. तिनसुकिया जिले के 1100 गांव में से 300 गांव में बिहार और यूपी के लोगों की बहुलता है. तिनसुकिया से बिहार के भोजपुर के रहने वाले शिव शंभू ओझा कांग्रेस के टिकट पर विधायक रह चुके हैं. तिनसुकिया को मिनी बिहार के नाम से भी जाना जाता है।जेडीयू ने 2006 में 12 सीटों पर उम्मीदवार उतारा था. सभी उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई. जदयू को कुल 12,337 वोटों के साथ 0.1 % वोट मिले. इसके बाद 2011 में सिर्फ 2 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे लेकिन दोनो सीटों पर उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई और कुल 3,020 वोट मिला. वोट प्रतिशत जीरो रहा. 2016 में 4 उम्मीदवार उतारे थे, चारों उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई।

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