ग्लोबल ग्रोथ के लिए भारत-चीन का बड़ा योगदान,पीछे छूटने लगा अमेरिका
दुनिया की आर्थिक ताकत का संतुलन तेजी से बदल रहा है। दशकों तक ग्लोबल इकॉनमी की कमान संभालने वाला अमेरिका अब उस रफ्तार में नहीं दिख रहा, जो पहले उसकी पहचान थी। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के ताजा आंकड़े इस बात की गवाही दे रहे हैं कि ग्लोबल ग्रोथ की गाड़ी अब एशिया के कंधों पर सवार है, जहां भारत और चीन ड्राइविंग सीट पर नजर आ रहे हैं। ग्लोबल रियल जीडीपी ग्रोथ में चीन की हिस्सेदारी 26.6 फीसदी तक पहुंच चुकी है, जबकि भारत का योगदान 17 फीसदी हो गया है। इसके मुकाबले अमेरिका की हिस्सेदारी महज 9.9 फीसदी रह गई है। यानी भारत अकेले अमेरिका से करीब दोगुना योगदान दे रहा है, जबकि चीन का हिस्सा अमेरिका से लगभग तीन गुना है।

यह बदलाव बताता है कि वैश्विक विकास की दिशा अब पश्चिम से पूर्व की ओर खिसक रही है।अगर चीन और भारत की हिस्सेदारी को जोड़ा जाए तो दोनों मिलकर ग्लोबल ग्रोथ में 43.6 फीसदी योगदान दे रहे हैं। वहीं पूरे एशिया-पैसिफिक क्षेत्र की हिस्सेदारी 50 फीसदी तक पहुंच गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि मजबूत घरेलू मांग, इन्फ्रास्ट्रक्चर पर भारी निवेश, मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर की तेज ग्रोथ ने एशिया को ग्लोबल इकॉनमी का नया पावरहाउस बना दिया है।ग्लोबल रियल जीडीपी ग्रोथ में योगदान देने वाले देशों की लिस्ट में इंडोनेशिया 3.8 फीसदी के साथ चौथे स्थान पर है। इसके बाद तुर्की 2.2 फीसदी के साथ पांचवें नंबर पर है। अफ्रीका से नाइजीरिया 1.5 फीसदी के साथ छठे स्थान पर पहुंच गया है। वहीं ब्राजील (1.5 फीसदी), वियतनाम (1.6 फीसदी), सऊदी अरब (1.7 फीसदी) और जर्मनी (0.9 फीसदी) भी टॉप-10 में शामिल हैं। यह तस्वीर बताती है कि उभरती अर्थव्यवस्थाएं अब ग्लोबल ग्रोथ में अहम भूमिका निभा रही हैं।हालांकि नॉमिनल जीडीपी के लिहाज से अमेरिका का दबदबा अभी कायम है। 31.82 ट्रिलियन डॉलर की जीडीपी के साथ अमेरिका दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बना हुआ है। चीन 20.65 ट्रिलियन डॉलर के साथ दूसरे, जर्मनी 5.33 ट्रिलियन डॉलर के साथ तीसरे और भारत 4.51 ट्रिलियन डॉलर के साथ चौथे स्थान पर है। इसके बावजूद ग्रोथ के मोर्चे पर तस्वीर साफ है कि भविष्य की रफ्तार भारत और चीन तय करते नजर आ रहे हैं।
