बिहार भवन पर गरम हुई देश की सियासत,महाराष्ट्र में बिहार भवन पर टकराव
महाराष्ट्र में बिहार भवन बनाने के प्रस्ताव और राज ठाकरे की पार्टी महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (एमएनएस) के विरोध से देश की सियासत गरमा गई है. इस मुद्दे पर आरोप और प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है. एमएनएस के विरोध के बाद अब बिहार के वरिष्ठ मंत्री अशोक चौधरी ने एमएनएस पर तीखा हमला बोला है.मीडिया से बात करते हुए मंत्री अशोक चौधरी ने कहा कि ये फालतू की बात है. घटिया लोग हैं. किसी के बाप का है, जो बनने नहीं देंगे. उन्होंने सवाल किया कि कैसे नहीं बनने देंगे? देश में किसी की जबरदस्ती नहीं चलेगी, नहीं बनने देंगे. क्या राजतंत्र है? राज ठाकरे महाराष्ट्र के राजा हैं?उन्होंने विरोध पर कहा कि यह फालतू का बात है. बिहार के लोग जो इलाज के लिए जाते हैं, उनके लिए यह बन रहा है. सभी स्टेट में भी बनेगा. किसी की ताकत नहीं की रोक दे.एमएनएस के नेता यशवंत किलेदार ने मंगलवार को कहा था कि उनकी पार्टी मुंबई में प्रस्तावित बिहार भवन के कंस्ट्रक्शन की इजाजत नहीं देगी. बिहार सरकार की खर्च की प्राथमिकताओं पर सवाल उठाते हुए किलेदार ने कहा कि महाराष्ट्र इस समय खेती की तंगी, बढ़ती पढ़ाई की लागत, महंगाई और बेरोज़गारी जैसी कई चुनौतियों से जूझ रहा है.उन्होंने बिहार भवन प्रोजेक्ट पर 314 करोड़ रुपये खर्च करने के प्रस्ताव की आलोचना करते हुए कहा कि इस फंड का बेहतर इस्तेमाल बिहार में ही किया जाएगा. उन्होंने कहा कि अगर बिहार से आने वाले कैंसर मरीजों के लिए पैसा खर्च किया जा रहा है, तो वह पैसा बिहार में खर्च किया जाना चाहिए.

मुंबई में ऐसे प्रोजेक्ट का कोई मतलब नहीं है.महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना उत्तर भारत के राज्यों से लोगों के बेवजह आने का कड़ा विरोध करने के लिए जानी जाती है. किलेदार ने दोहराया कि पार्टी इस प्रोजेक्ट का विरोध करती रहेगी. उन्होंने जोर देकर कहा कि जब तक एमएनएस यहां है, बिहार भवन नहीं बनेगा.MNS के बयान की जदयू और भाजपा की आलोचनाजदयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव रंजन प्रसाद ने मनसे के विरोध पर तीखी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि मनसे उपद्रवी एवं हुल्लड़बाजों की राजनीति करती है और अपने राजनीतिक फायदे के लिए संवेदनशील और सतही मुद्दों को उछालती रही है. बिहार भवन के निर्माण का फैसला महाराष्ट्र एवं बिहार सरकार की सहमति से हुआ है. किसी की गीदड़ भभकी से यह प्रोजेक्ट नहीं रूकेगावहीं, भाजपा ने भी मनसे के बयान की आलोचना करते हुए कहा कि यह संकीर्ण सोच एवं स्थानीय राजनीति का उदाहरण है. प्रदेश प्रवक्ता प्रभाकर मिश्र का कहना है कि मुंबई को देश की आर्थिक राजधानी कहा जाता है और यहां बिहार भवन का निर्माण होता है तो बिहार के श्रमिकों, छात्रों एवं कारोबारियों के लिए बहुत ही उपयोगी होगा.दक्षिण मुंबई के एलफिंस्टन एस्टेट में बिहार भवन बनाने का प्रस्ताव है. इसे मुंबई पोर्ट ट्रस्ट की जमीन पर बनाया जाएगा. बिहार भवन बनाने के लिए बिहार सरकार की ओर से 314.20 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है. यह 30 मंजिला भवन होगा.इसमें बिहार से इलाज कराने गए कैंसर मरीजों एवं उनके परिजनों के लिए 240 बेड की डॉरमेट्री बनाने की बात कही गई है. बिहार फाउंडेशन (मुंबई) के अध्यक्ष कैसर खालिद का कहना है कि यह भवन बिहार में उद्योग एवं निवेश को बढ़ावा देने की योजनाओं के तहत बनाया जाएगा.
