क्या निशांत की होगी पॉलिटिकल लॉन्चिंग?खरमास बाद जेडीयू पार्टी में दिखेगा बड़ा बदलाव
बिहार की सत्ताधारी पार्टी जेडीयू का नया बॉस कौन होगा? इसको लेकर इन दिनों खूब चर्चा चल रही है. राष्ट्रीय अध्यक्ष और प्रदेश अध्यक्ष बदले जा सकते हैं. इसके साथ ही ये भी तय हो जाएगा कि नीतीश कुमार का राजनीतिक उत्तराधिकारी कौन होगा? मुख्यमंत्री के साथ-साथ वह जनता दल यूनाइटेड के अध्यक्ष भी हैं. ऐसे में अगर वह पार्टी प्रमुख का पद छोड़ते हैं तो जेडीयू को नया सुप्रीम लीडर मिल जाएगा. पिछले कुछ समय से उनके बेटे निशांत कुमार को संगठन की जिम्मेदारी सौंपने की जोर-शोर से मांग हो रही है. ऐसे में उन पर भी नजर रहेगी.जेडीयू पिछले 20 सालों से बिहार की सत्ता पर काबिज है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के इर्द गिर्द ही बिहार की राजनीति होती रही है. जिस गठबंधन के साथ वह जाते हैं, उसकी सरकार बनती है और सीएम भी वे ही बनते हैं. हालिया विधानसभा चुनाव में भी एनडीए को जबरदस्त जीत मिली है. जेडीयू का भी प्रदर्शन शानदार हुआ है. वहीं अब पार्टी में संगठन चुनाव के लिए प्रक्रिया शुरू होने वाली है. दिसंबर से सदस्यता अभियान चल रहा है. इस बार पार्टी ने एक करोड़ लक्ष्य रखा है. 15 जनवरी के बाद संगठन चुनाव की घोषणा हीगी. पंचायत स्तर से लेकर राष्ट्रीय अध्यक्ष के पद तक का चुनाव होगा।

जेडीयू के प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा ने कहा कि हमारी पार्टी में हर 3 साल पर संगठन का चुनाव होता है. इसके लिए सदस्यता अभियान चल रहा है. वर्ष 2022 से 2025 तक जो सदस्यता अभियान चला, उसमें 75 लाख का लक्ष्य रखा गया था लेकिन अब 2025 से 2028 तक के लिए एक करोड़ का लक्ष्य रखा गया है. उन्होंने कहा कि 15 जनवरी तक सदस्यता अभियान का लक्ष्य रखा गया है, उस पर तेजी से काम हो रहा है. उसके बाद संगठन चुनाव की प्रक्रिया शुरू होगी.उमेश कुशवाहा ने कहा कि पंचायत स्तर से लेकर राष्ट्रीय अध्यक्ष तक का चुनाव होगा. चुनाव पंचायत, प्रखंड और राज्य स्तर पर होता है. उसके बाद राष्ट्रीय स्तर पर भी चुनाव होता है. जो भी निर्वाचन अधिकारी होंगे, घोषणा के बाद उसके बारे में विस्तृत जानकारी साझा की जाएगी.उमेश कुशवाहा ने कहा पार्टी में लोकतांत्रिक प्रक्रिया है. उसके तहत ही चुनाव होता है. विधानसभा चुनाव में लोगों ने हमारे नेता पर विश्वास जताया है. 14 करोड़ जनता के लिए हमारे नेता काम करते हैं, अब संगठन का भी चुनाव होना है. उसमें भी लोकतांत्रिक तरीके से सदस्यों और कार्यकर्ताओं की पसंद से सब कुछ तय होगा.खरमास के बाद मंत्रिमंडल विस्तार और खुद के मत्री बनाए जाने के सवाल पर उमेश कुशवाहा ने कहा कि वह तो पार्टी के सिपाही हैं और एक सिपाही के तौर पर पार्टी में काम कर रहे हैं. जहां तक मंत्री बनने की बात है तो यह विशेषाधिकार मुख्यमंत्री का होता है, यह तो मुख्यमंत्री ही बताएंगे कि किनको मंत्री बना रहे हैं और मंत्रिमंडल विस्तार में किनको ला रहे हैं.बिहार में इस साल खरमास के बाद मंत्रिमंडल विस्तार के साथ ही राज्यसभा की पांच सीटों पर चुनाव होना है. इसी साल 19 विधान परिषद सदस्यों का भी चयन होना है, जो विभिन्न माध्यमों से होगा. केंद्र सरकार में जेडीयू कोटे से कर्पूरी ठाकुर के बेटे रामनाथ ठाकुर मंत्री हैं लेकिन राज्यसभा की सदस्यता इस साल समाप्त हो रही है. चर्चा है कि उनको संगठन में बड़ी जिम्मेवारी दी जा सकती है. वहीं नीतीश कुमार के बेटे निशांत को लेकर भी चर्चा है कि उन्हें भी पार्टी में महत्वपूर्ण जिमवादी दी जा सकती है. आईएएस से राजनीति में कदम रखने वाले मनीष वर्मा पार्टी में राष्ट्रीय महासचिव है लेकिन उन्हें भी नई जिम्मेदारी देने की चर्चा है.नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार अबतक सक्रिय राजनीति से दूर हैं लेकिन राजनीति में उनकी एंट्री की चर्चा पिछले साल से लगातार चल रही है. पार्टी के नेता और कार्यकर्ता लगातार डिमांड कर रहे हैं. यहां तक कि राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने भी उन्हें राजनीति में जल्द आने का आग्रह किया है. परिवार के लोग भी चाहते हैं कि निशांत राजनीति में आएं. ऐसे में मुख्यमंत्री पर भी दबाव है. साथ ही उनके स्वास्थ्य को लेकर भी लगातार सवाल उठ रहे हैं.निशांत अगर पार्टी में आते हैं और कमान संभालते हैं तो पार्टी पर टूट का खतरा भी कम रहेगा. पार्टी का जो कोर वोटर कुर्मी कुशवाहा और अति पिछड़ा है, वह एकजुट रहेगा लेकिन फैसला नीतीश कुमार और निशांत कुमार को लेना है. नीतीश कुमार का ग्रीन सिग्नल मिला और निशांत की स्वीकृति हुई तो तय है कि इस बार निशांत राजनीति में दिखेंगे और पार्टी में कोई बड़ी भूमिका में होंगे.नीतीश कुमार ने जेडीयू में ‘एक व्यक्ति एक पद’ का सिद्धांत तय किया है. इसी के आधार पर जब आरसीपी सिंह केंद्र में मंत्री बने तो उनको राष्ट्रीय अध्यक्ष का पद छोड़ना पड़ा था. खुद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इसी तर्क का हवाला देकर 2016 में अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था लेकिन 2024 में ललन सिंह के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद की कुर्सी छोड़ने के बाद से नीतीश कुमार इस पद पर बने हुए हैं।
