JIO ने बदला टेलीकॉम सेक्टर का पूरा गणित,10 साल में जियो ने मचा दी तबाही

 JIO ने बदला टेलीकॉम सेक्टर का पूरा गणित,10 साल में जियो ने मचा दी तबाही
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भारतीय टेलीकॉम इंडस्ट्री की तस्वीर को पूरी तरह से बदलने वाली रिलायंस जियो अब शेयर बाजार में तहलका मचाने आ रही है. जब भी सस्ते इंटरनेट की बात होती है, तो सबसे पहला नाम जियो का ही आता है. मुकेश अंबानी की इस कंपनी ने मोबाइल डेटा को एक महंगी सर्विस से निकालकर आम आदमी की रोजमर्रा की जरूरत बना दिया. इसी शानदार सफर के 10 साल पूरे होने पर कंपनी अपना बहुप्रतीक्षित आईपीओ लेकर आ रही है.रिलायंस जियो ने शेयर बाजार नियामक के पास अपने कागजात जमा कर दिए हैं. जियो का बहुचर्चित आईपीओ 21 अक्टूबर को खुलेगा. निवेशक इसमें 23 अक्टूबर तक अपनी किस्मत आजमा सकेंगे. ये भारत के इतिहास का सबसे बड़ा पब्लिक ऑफर होने वाला है. इसमें 27 करोड़ नए शेयर जारी किए जाएंगे. रिलायंस इंडस्ट्रीज के मौजूदा शेयरधारकों के लिए 2,500 करोड़ रुपये के शेयर रिजर्व रखे गए हैं. कंपनी के कर्मचारियों के लिए भी 500 करोड़ रुपये का खास कोटा तय किया गया है. रिलायंस जियो की नजर 10.3 लाख करोड़ रुपये की वैल्यूएशन पर है. इस आईपीओ का प्राइस बैंड 1,065 रुपये से लेकर 1,119 रुपये के बीच रखा गया है. इसके जरिए कंपनी बाजार से लगभग 30,200 करोड़ रुपये जुटाने की बड़ी तैयारी में है.5 सितंबर 2016 को जियो ने बाजार में कमर्शियल तौर पर कदम रखा था. जियो ने शुरुआत में ग्राहकों को फ्री वॉयस कॉलिंग के साथ मुफ्त नेशनल रोमिंग की सुविधा दी. डेटा की कीमतें भी बाजार के मुकाबले बेहद कम रखी गईं. कनेक्टिविटी के साथ-साथ मुफ्त मनोरंजन ऐप भी दिए गए. जियो की इस आक्रामक रणनीति से बाजार में खलबली मच गई. पुरानी टेलीकॉम कंपनियों के राजस्व पर भारी दबाव पड़ा.छह महीने तक सब कुछ मुफ्त देने के बाद अप्रैल 2017 से जियो ने डेटा के पैसे लेने शुरू किए. हालांकि वॉयस कॉल तब भी फ्री ही रही. अपनी पहली सालगिरह तक जियो ने 13 करोड़ ग्राहक जोड़ लिए थे. बाजार में हिस्सेदारी 10 प्रतिशत से ज्यादा हो गई थी. जियो ने इंटरनेट को घर-घर पहुंचाने के लिए ‘जियो फोन’ भी लॉन्च किया. इसका मकसद उन ग्राहकों को इंटरनेट से जोड़ना था जो सस्ते विकल्प तलाश रहे थे.जियो की एंट्री के दो साल बाद 2018 तक इसका व्यापक असर साफ दिखने लगा. जियो के आने से पहले देश में हर महीने 20 करोड़ जीबी मोबाइल डेटा इस्तेमाल होता था. जियो के आने के बाद ये खपत बढ़कर 370 करोड़ जीबी तक पहुंच गई. डेटा की कीमत भी 250 रुपये प्रति जीबी से गिरकर 15 रुपये से नीचे आ गई. जून 2018 के अंत तक जियो के पास 21.5 करोड़ यूजर्स हो चुके थे. बाजार में आठ-नौ कंपनियों की जगह अब सिर्फ तीन बड़ी कंपनियां ही बची थीं. इनमें भारती एयरटेल, वोडाफोन आइडिया के साथ जियो शामिल थी.2019 में कंपनी ने अपनी रणनीति में बदलाव किया. जियो ने दूसरे नेटवर्क पर कॉल करने के लिए इंटरकनेक्ट यूसेज चार्ज (IUC) वसूलना शुरू किया. सालों की आक्रामक कीमत वाली जंग के बाद कंपनी ने अपने सब्सक्राइबर बेस से मुनाफा कमाने की ओर कदम बढ़ाया.साल 2020 में रिलायंस इंडस्ट्रीज ने अपने डिजिटल बिजनेस के दरवाजे विदेशी निवेशकों के लिए खोल दिए. फेसबुक ने 43,574 करोड़ रुपये लगाकर जियो प्लेटफॉर्म्स में 9.99 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीदी. इसके बाद गूगल ने भी 33,737 करोड़ रुपये का भारी निवेश किया. इन बड़े निवेशों से रिलायंस की बैलेंस शीट काफी मजबूत हो गई. जुलाई 2020 तक जियो 40 करोड़ ग्राहकों वाली भारत की पहली टेलीकॉम कंपनी बन गई.2021 में जियो ने अपनी डिजिटल सर्विस को काफी ज्यादा विस्तार दिया. कंपनी ने व्हाट्सएप के साथ मिलकर जियोमार्ट को बढ़ाया. गूगल के साथ सस्ते स्मार्टफोन बनाने पर काम शुरू किया. इसके अलावा 5G इकोसिस्टम के लिए क्वालकॉम के साथ मिलकर स्थानीय उपकरणों के निर्माण पर भी फोकस किया.साल 2022 के अक्टूबर महीने से जियो ने मुंबई, दिल्ली, कोलकाता जैसे शहरों में अपनी 5G सर्विस का ट्रायल शुरू किया. जनवरी 2023 तक ये सर्विस 225 शहरों तक पहुंच गई. सालों तक बेहद सस्ते प्लान देने के बाद जून 2024 में जियो ने अपने टैरिफ में 12 से 25 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी कर दी.

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JIO ने बदला टेलीकॉम सेक्टर का पूरा गणित,10 साल में जियो ने मचा दी तबाही इसका सीधा मकसद प्रति यूजर कमाई बढ़ाना था. जियो की इस बढ़ोतरी के तुरंत बाद एयरटेल तथा वोडाफोन आइडिया ने भी अपने दाम बढ़ा दिए.2025 की रिपोर्ट के मुताबिक जियो के पास 48 करोड़ से ज्यादा यूजर्स हो चुके थे. इनमें से 19.1 करोड़ लोग 5G नेटवर्क से जुड़े हुए थे. 2026 आते-आते कंपनी का दायरा सिर्फ मोबाइल नेटवर्क तक सीमित नहीं रहा. अब कंपनी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, फिक्स्ड ब्रॉडबैंड से लेकर सैटेलाइट कम्युनिकेशंस पर काम कर रही है.मार्च 2026 तक जियो के कुल ग्राहकों की संख्या 52.4 करोड़ हो चुकी है. इनमें 26.8 करोड़ 5G यूजर्स हैं. कंपनी के वायरलेस डेटा ट्रैफिक में 5G की हिस्सेदारी 55 प्रतिशत हो चुकी है. जियो एयरफाइबर की शानदार मांग की वजह से फिक्स्ड ब्रॉडबैंड के ग्राहक भी 2.71 करोड़ हो गए हैं. अब कंपनी अंतरिक्ष से इंटरनेट देने की बड़ी योजना पर काम कर रही है. जियो अपना ‘लो-अर्थ ऑर्बिट’ सैटेलाइट नेटवर्क बनाने जा रही है, जिसके लिए 1600 से ज्यादा सैटेलाइट लॉन्च करने का प्रस्ताव है. जुलाई में इसे स्पेस रेगुलेटर से तकनीकी मंजूरी भी मिल चुकी है. अपने 10 साल के सफर में कंपनी ने जो मुकाम हासिल किया है, वो टेलीकॉम इतिहास में एक मिसाल है।

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